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इंसाफ का इकलौता रखवाला

पश्चिम बंगाल शिक्षक भर्ती घोटाले के पीड़ितों के लिए न्यायमूर्ति अभिजित गांगुली आखिर उम्मीद बनकर उभरे

अभिजित गांगुली, 60 वर्ष, कलकत्ता हाइकोर्ट के न्यायाधीश
अभिजित गांगुली, 60 वर्ष, कलकत्ता हाइकोर्ट के न्यायाधीश
अपडेटेड 8 अगस्त , 2022

पश्चिम बंगाल शिक्षक भर्ती घोटाले में सबसे अहम भूमिका निभाने वाले न्यायमूर्ति अभिजित गांगुली ने करियर की शुरुआत पश्चिम बंगाल प्रशासनिक सेवा अधिकारी के नाते भूमि विभाग से की थी. बाद में, वे नौकरी छोड़कर वकालत करने लगे.

राज्यसभा के सदस्य तथा बड़े वकील बिकास रंजन भट्टाचार्य उन्हें बेहद गंभीर जूनियर की तरह याद करते हैं. वे कहते हैं, ''वकालत के दौरान उन्हें अंदाजा लगा कि भ्रष्टाचार की जड़ें कितनी गहरी हैं और अब वे उसे गहरे खोद रहे हैं.'' वकील फिरदौस शमीम को गांगुली अपनी हाजिरजवाबी और संस्कृति में रुचि के लिए याद आते हैं. शमीम कहते हैं, ''वे जवानी के दिनों में नाटकों में सक्रिय थे.''

गांगुली को 2018 में बतौर जज पदोन्नति मिली और 2021 में शिक्षक भर्ती में अनियमितताओं से जुड़े मामले जब उनके सामने आए तो वे सुर्खियों में छाने लगे. शुरू से ही न्यायमूर्ति गांगुली कथित भर्ती घोटाले में लिप्त अधिकारियों के खिलाफ सख्त थे और अब उन्होंने दो वजनदार मंत्रियों पूर्व शिक्षा मंत्री पार्थ चटर्जी और मौजूदा स्कूल शिक्षा विभाग के राज्यमंत्री परेश चंद्र अधिकारी पर बेहद कठोर रुख अपना लिया, जिनकी बेटी की शिक्षक पद पर नियुक्ति गैर-कानूनी ढंग से हुई. उन्होंने हाइकोर्ट की खंडपीठ के उस फैसले के खिलाफ भी आवाज उठाई, जिसमें सीबीआइ जांच के निर्देश सहित उनके कई आदेश पर रोक लगा दी गई.

जब खंडपीठ ने चौथी बार उनके आदेशों पर रोक लगाई तो उन्होंने 13 अप्रैल, 2022 को देश के प्रधान न्यायाधीश को एक कड़ी चिट्ठी लिखी. चिट्ठी में लिखा, ''मैं समझ नहीं पाता हूं कि एक जज की पीठ के हाथ बांधने से किसे फायदा होगा.'' इस बीच, तृणमूल कांग्रेस से जुड़े वकीलों ने उनकी पीठ का बॉयकॉट करने का आह्वान किया और गुपचुप धमकियां दीं. गांगुली नहीं घबराए. उन्होंने कहा, ''आप चाहो तो मेरे माथे पर बंदूक रखकर मुझे मार सकते हो लेकिन मुझे इंसाफ करने से नहीं रोक पाओगे.''

पश्चिम बंगाल स्कूल सेवा आयोग के चेयरमैन के इस्तीफे के बाद जब वादियों ने गड़बड़ी और सबूत मिटाने की आशंका जाहिर की तो गांगुली ने 18 मई को रात 10.45 बजे विशेष सुनवाई की और सीआरपीएफ जवान तैनात करने और अगले चेयरमैन के कार्यभार संभालने तक सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित रखने का आदेश दिया.

अगस्त 2024 में रिटायर होने वाले 60 वर्षीय जज के दिल का एक कोना करुणा से भी भरा है. उन्होंने एक खबर देखी कि कैंसर मरीज सोमा दास शिक्षक नियुक्ति का इंतजार कर रही हैं, उन्होंने अपने अधिकारियों को उन्हें अपने चैंबर में बुलाने के लिए भेजा. उन्होंने उन्हें आश्वस्त किया कि सरकार उन्हें नियुक्त करेगी, क्योंकि उन्होंने चयन परीक्षा में ऊंचे अंक हासिल किए हैं. सोमा कहती हैं, ''एक अभिभावक, एक पिता की तरह वे हमारे साथ खड़े हुए.'' एक और मामले में उन्होंने एक 76 साल की श्यामली घोष की पेंशन की अर्जी पर फटाफट सुनवाई की, जिन्हें पिछले 25 साल से पेंशन नहीं मिली थी.

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