scorecardresearch

थार में प्यार, सूचना सीमापार

राजस्थान के सीमावर्ती क्षेत्रों में पाकिस्तान की महिला एजेंटों का 'हनी ट्रैप' बना एक बड़ी चुनौती, इसमें फंसकर सेना के जवान और स्थानीय लोग खुफिया जानकारियां सीमापार भेजते हुए पकड़े जा रहे

शिकार और शिकारी : जयपुर आर्टिलरी यूनिट में तैनात रहे जवान शांतिमय राणा और दो पाकिस्तानी एजेंट जिन्होंने उसे हनी ट्रैप में फंसाया
शिकार और शिकारी : जयपुर आर्टिलरी यूनिट में तैनात रहे जवान शांतिमय राणा और दो पाकिस्तानी एजेंट जिन्होंने उसे हनी ट्रैप में फंसाया
अपडेटेड 8 अगस्त , 2022

आनंद चौधरी

वह दिसंबर 2021 की एक सर्द शाम थी. जोधपुर में भारतीय सेना में गनर के पद पर कार्यरत जवान प्रदीप कुमार प्रजापत के मोबाइल पर अनजान नंबर से एक वीडियोकॉल आई. प्रदीप ने फोन अटैंड किया तो मोबाइल पर आधुनिक पोशाक में सजीधजी एक 30-35 साल की महिला नजर आई. फोन पर प्रदीप का चेहरा देखते ही महिला ने कहा, ''सॉरी...मैं किसी ओर को कॉल लगा रही थी, गलती से आपको कॉल लग गया.'' इसके बाद फोन डिस्कनेक्ट हो जाता है. करीब 10 मिनट बाद प्रदीप के वॉट्सऐप पर उसी नंबर से 'हाय' लिखा हुआ मैसेज आता है. प्रोफाइल पिक्चर देखकर प्रदीप समझ जाता है कि यह तो वही महिला है. प्रदीप 'हाय' का जवाब 'हैलो' से देता है, तो वह महिला कहती है, ''मैंने आपको गलती से फोन कर दिया था, उसके लिए एक बार फिर सॉरी.'' प्रदीप ने कहा, ''कोई बात नहीं'' तो महिला कहती है, ''आपकी पर्सनेलिटी बहुत अच्छी है, आप आर्मी ड्रेस में बहुत सुंदर दिखते हैं, मैं भी आर्मी से ही हूं.'' अपनी तारीफ सुनकर प्रदीप बस इतना ही कह पाता है - 'धन्यवाद.'

अपना परिचय देते हुए महिला बातचीत का सिलसिला आगे बढ़ाती है. वह कहती है, ''मेरा नाम रिया है, मैं मध्य प्रदेश में ग्वालियर की रहने वाली हूं और बेंगलूरू की मिलिट्री नर्सिंग सर्विस (एमएनएस) मंं कार्यरत हूं. इसके बाद करीब एक घंटे तक वह प्रदीप के साथ खुलकर बातचीत करती है. अगले दिन सुबह ही प्रदीप और महिला के बीच व्हाट्सऐप पर बातचीत का सिलसिला फिर शुरू हो जाता है. इसके बाद कई महीने तक दोनों के बीच बार-बार वीडियोकॉल और व्हाट्सऐप मैसेज के जरिए बातचीत हुई. इस दौरान महिला ने अपनी कई अश्लील तस्वीरें भी प्रदीप को भेजीं. उसने प्रदीप को दिल्ली में मिलने और शादी का भी झांसा दिया. वीडियोकॉल के वक्त वह हिंदू देवी-देवताओं की मूर्तियों के सामने बैठकर पूजा भी करती थी ताकि प्रदीप को उस पर भरोसा हो जाए. जब प्रदीप उसके मोहजाल में पूरी तरह फंस गया तो वह उससे जो चाहती, वे जानकारियां हासिल करने लगी. यह सिलसिला करीब छह महीने तक यानी, इस साल 18 मई तक चला जब तक कि प्रदीप राजस्थान पुलिस इंटेलिजेंस शाखा की स्टेट स्पेशल ब्रांच (एसएसबी) के हत्थे नहीं चढ़ गया.

एसएसबी ने गहन पूछताछ और मोबाइल की छानबीन के बाद 21 मई को प्रदीप को गिरफ्तार कर लिया. उसके मोबाइल की जांच से यह पता चला कि उसने कई बार सेना की गोपनीय जानकारियां पाकिस्तानी एजेंट को भेजी थीं और ऊपर की जिस बातचीत का जिक्र हमने किया, उसकी तस्दीक भी उसने ही की थी.

दरअसल, रिया नाम की वह महिला कोई और नहीं बल्कि एक पाकिस्तानी एजेंट थी, जो प्रदीप को अपने सौंदर्य के जाल में फंसाकर (हनी ट्रैप) उससे सामरिक महत्व की कई जानकारियां हासिल कर रही थी. हनी ट्रैप में फंसने के बाद प्रदीप ने कई बार सेना के गोपनीय दस्तावेजों की तस्वीरें खींचकर रिया को भेजी थीं. राजस्थान पुलिस की एसएसबी यूनिट प्रदीप पर काफी समय से नजर रख रही थी.

करीब दो महीने बाद एसएसबी यूनिट की यही चुस्ती तब एक बार फिर दिखी जब बीती 27 जुलाई को जयपुर आर्टिलरी यूनिट में तैनात एक जवान शांतिमय राणा को जासूसी के आरोप में गिरफ्तार किया गया. राणा पाकिस्तान की दो खुफिया एजेंटों के हनी ट्रैप में फंसकर उन्हें भारतीय सेना की गोपनीय जानकारियां और वीडियो भेज रहा था. इनमें निशा नाम की एक एजेंट तो वही थी, जिसने कुछ समय पहले रिया के नाम से जोधपुर में कार्यरत जवान प्रदीप कुमार को अपने हनी ट्रैप में फंसाया था. इस बार वह निशा बन गई, लेकिन उसने अपना कार्यस्थल बेंगलूरू में मिलिट्री नर्सिग सर्विस (एमएनएस) ही बताया था. बताया जा रहा है कि इससे पहले भी उसने अलग-अलग नामों से कई जवानों को अपने जाल में फंसाने की कोशिश की थी. शांतिमय को जाल में फंसाने वाली दूसरी महिला ने खुद का परिचय उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर जिले में मिलिट्री इंजीनियरिंग सर्विस (एमईएस) में तैनात अंकिता उर्फ गुरनूर कौर के रूप में दिया. इंटेलिजेंस की पड़ताल में यह सामने आया कि दोनों पाकिस्तानी एजेंटों ने शांतिमय को पहले वीडियोकॉल, व्हाट्सऐप मैसेज और अर्धनग्न तस्वीरें भेजकर अपने जाल में फंसाया और फिर सेना से जुड़ी कई गोपनीय जानकारियां हासिल कीं.

प्रदीप कुमार और शांतिमय राणा तो एक बानगी भर हैं. पिछले आठ साल (2015-2022) में राजस्थान में पाकिस्तान के लिए जासूसी करने के 27 मामले सामने आ चुके हैं. राजस्थान पुलिस की इंटेलिजेंस शाखा ने हनी ट्रैप या पैसों के लालच में फंसकर सेना की गोपनीय जानकारियां पाकिस्तान भेजने के मामले में सेना के 15 से ज्यादा जवानों को गिरफ्तार किया है. इसके अलावा, इतने ही सरकारी कर्मचारी और स्थानीय लोग भी शामिल हैं, जो देश की सुरक्षा से खिलवाड़ कर रहे थे. (देखें: 'लव, सेक्स और जासूसी', 10 नवंबर, 2021 का अंक)

राजस्थान में इतनी बड़ी तादाद में जासूसी और हनी ट्रैप के मामले सामने आने के पीछे सबसे अहम वजह तो यही है कि पाकिस्तान की भारत के साथ करीब 1048 किलोमीटर की सबसे लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमा राजस्थान से लगती है और यहां भारतीय सेना के विशेष अभ्यास चलते रहते हैं. पाकिस्तानी सेना और उसकी खुफिया एजेंसी आइएसआइ हर हाल में यहां की गतिविधियों पर नजर रखना चाहती है और भारतीय सेना की दूसरी संवेदनशील जानकारियां जुटानी चाहती है.

राजस्थान पुलिस इंटेलिजेंस विंग की स्टेट स्पेशल ब्रांच (एसएसबी) के एडीजी एस. सेंगाथिर बताते हैं, ''केंद्रीय एजेंसियों के साथ तालमेल, हमारे अपने संपर्कों और तकनीकी के जरिए हम सोशल मीडिया पर चल रही ऐसी जासूसी गतिविधियों पर कड़ी नजर रखते हैं और इस नेटवर्क को तोड़ने में भी बहुत हद तक कामयाब हुए हैं.''

सेना को सीमापार बैठी 'मोहनियों' से अपने जवानों को बचाने का तरीका खोजना होगा. इसका सबसे कारगर तरीका है- जागरूकता. सेना बीते कुछ समय से इसके लिए लगातार प्रयास भी कर रही है. इसके लिए सेना ने 15 सूत्रीय दिशा-निर्देश जारी किए हैं. एक वरिष्ठ सैन्य अधिकारी के मुताबिक सेना अपने भीतर इन खतरों के प्रति कमजोर लोगों का पता लगाने के लिए एक आंतरिक सैन्य अभ्यास चलाती है. इसके अलावा शाम को रोल-कॉल के दौरान जवानों को सोशल मीडिया और हनीट्रैप के खतरों के बारे में बताया जाता है. इसके लिए सैनिक सम्मेलनों का उपयोग भी किया जाता है.

सेना की ये कवायदें लगातार चल रही हैं, लेकिन हनी ट्रैप के मामले पूरी तरह खत्म हो गए हों, यह नहीं कहा जा सकता. जाहिर है कि अगर ऐसा नहीं होता तो फिर यह बड़ी चिंता की बात होगी 

सिंध से शुरू हुआ हनी ट्रैप का मॉड्यूल

भारत की मिलिट्री इंटेलिजेंस के मुताबिक पाकिस्तान के सिंध प्रांत में स्थित हैदराबाद से पाकिस्तानी सेना की इंटेलिजेंस यूनिट 412 ने हनी ट्रैप का मॉड्यूल लॉन्च किया है. इस मॉड्यूल के निशाने पर राजस्थान और गुजरात बॉर्डर के सैन्य ठिकानों पर तैनात भारतीय सेना के जवान हैं. पाकिस्तान की महिला एजेंट हिंदू देवी-देवताओं की फोटो दिखाकर, शादी का झांसा देकर और न्यूड वीडियो कॉल के जरिए भारतीय सेना के जवानों को हनी ट्रैप में फंसाकर सेना की गुप्त सूचनाएं देने के लिए ब्लैकमेल करती हैं.

पाकिस्तानी सेना इस काम के लिए कॉलेज में पढ़ने वाली युवतियों, स्थानीय वेश्याओं और गरीब लड़कियों का इस्तेमाल करती है. इससे पहले इन्हें बाकायदा ट्रेनिंग दी जाती है और इन्हें पूजा, रिया, अवनी, मुस्कान या हरलीन जैसे भारतीय नाम देकर हिंदू पहचान दी जाती है. पाकिस्तानी सेना की ये महिला एजेंट भारतीय पोशाक जैसे साड़ी, सलवार कुर्ती या नर्सिग सर्विस की यूनिफॉर्म पहनती हैं. इन्हें बॉर्डर इलाकों की भाषाएं भी सिखाई जाती हैं जिसके कारण ये भारतीय जवानों से हिंदी, मारवाड़ी व पंजाबी में आसानी से बात कर लेती हैं.

भारत के मोबाइल नंबर +91 का वॉट्सऐप इस्तेमाल करने के लिए ये अपने जाल में फंसाए गए किसी भी भारतीय नागरिक से दोस्ती कर उनसे ओटीपी हासिल कर स्थानीय नंबर पर वॉट्सऐप चलाने लगती हैं. किसी भी जवान को हनीट्रैप में फंसाने के लिए शुरूआत सामान्य तरह के व्हाट्सऐप कॉल और मैसेज के जरिए होती है. फिर धीरे-धीरे एक दूसरे को न्यूड वीडियो कॉल तक करने लगती हैं. ये एजेंट न्यूड कॉल को रिकॉर्ड कर लेती हैं. फिर उसके आधार पर जवान को ब्लैकमेल किया जाता है. इससे घबराया जवान पाक एजेंट के  हनी ट्रैप में पूरी तरह से फंस जाता है और उसे सेना गुप्त दस्तावेज भेजना शुरू कर देता है.

नशीले पदार्थों की तस्करी का अंदाज भी बदला

पाकिस्तान नशीले पदार्थों की तस्करी से भी बाज नहीं आ रहा. अब वह नशीली खेप भारत पहुंचाने के लिए ड्रोन जैसे साधनों का इस्तेमाल कर रहा है. बीते 7 जून को गंगानगर जिले के गजसिंहपुर कस्बे के नजदीक ख्यालीवाला अंतरराष्ट्रीय सीमा के पास बीएसएफ की 34वीं बटालियन ने पंजाब के चार तस्करों को गिरफ्तार कर 3.6 किलोग्राम हेरोइन बरामद की थी. यह हेरोइन पाकिस्तान से ड्रोन के जरिए भेजी गई थी. अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसकी कीमत करीब 15 करोड़ रुपए बताई जा रही है. वहीं पिछले तीन माह में गंगानगर जिले से सटी अंतरराष्ट्रीय सीमा पर तीन बार हेरोइन तस्करी पकड़ी जा चुकी है. तीनों बार ड्रोन के जरिए मादक पदार्थ भारत में भेजे गए. 27 जुलाई को भी हिंदूमल कोट के पास एक पाकिस्तानी ड्रोन नजर आया था जो बीएसएफ की मुस्तैदी के चलते सीमा पार नहीं कर पाया. वहीं 14 जुलाई को गंगानगर सीमा पर नशीले पदार्थ की खेप पकड़ी जा चुकी है.

इससे पहले 5 जून को गंगानगर पुलिस ने एक मजदूर को पकड़ा था, जिसने कुछ समय के दौरान ही करीब 10 किलो हेरोइन इधर से उधर की थी. मजदूर को पांच लाख रुपए का लालच दिया गया था जिसमें से पहली किस्त के रूप में डेढ़ लाख रुपए उसे मिल भी गए थे. पुलिस ने उसे हिरासत में लेकर सख्ती से पूछताछ की तो उसने पाकिस्तान की ओर से 10 किलोग्राम हेरोइन भेजे जाने की बात कबूल की. बीती 24 जुलाई को भी पाकिस्तान ने तारबंदी के ऊपर से दो बार 15 किलो हेरोइन बाड़मेर के इलाके में फेंकी थी. पुलिस के मुताबिक, पाकिस्तान ने यह खेप सीमा से सटे गडरा रोड इलाके के सातलिया तला गांव के रहने वाले एक किसान स्वरूप सिंह और उसके बेटे मोती सिंह के जरिए पंजाब तक पहुंचाई.

बाड़मेर से लगता भारत-पाक का शांत बॉर्डर जासूसी, हेरोइन और नकली नोटों की तस्करी को लेकर हमेशा सुर्खियों में रहता है. कुछ माह पहले ही बाड़मेर पुलिस ने यहां 6.55 लाख रुपए के नकली नोट बरामद कर चार आरोपियों को गिरफ्तार किया था. पूछताछ में आरोपियों ने दो हजार और 500 के नकली नोटों की दो बार खेप भारत में आना कबूल किया. पुलिस पड़ताल में यह भी पता चला कि करीब 12 लाख के नकली नोटों की खेप भारत आई, जिसमें से 5.45 लाख रुपए बाजार में चला दिए गए. 

Advertisement
Advertisement