मई 2019 में सत्ता संभालते वक्त आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री वाइ.एस. जगन मोहन रेड्डी ने चुनाव से पहले किए गए अपने वादों में एक और वादा जोड़ा था. उन्होंने कहा था कि वे पांच साल के कार्यकाल में बीच में ही मंत्रियों को मंत्रिमंडल से हटाकर पार्टी के काम में लगाएंगे. 30 नवंबर को इसकी समय सीमा खत्म होते ही फेरबदल को लेकर उनकी पार्टी युवजन श्रमिक रायतु कांग्रेस (वाइएसआरसी) की धुकधुकी बढ़ गई है. सूत्रों का कहना है कि पांच उपमुख्यमंत्रियों में से कुछेक और 20 अन्य मंत्रियों को बनाए रखा जा सकता है ताकि राजकाज को एकदम-से झटका न लगे.
यह फेरबदल मध्य जनवरी में प्रस्तावित था लेकिन इस पर काम अभी जारी है. जगन के लिए यह निर्णायक क्षण हो सकता है. तब तो और भी जब सियासी पार्टी के तौर पर वाइएसआरसी में राजकाज का कोई आंतरिक तंत्र नहीं है. अलबत्ता पार्टी में असंतोष की संभावना नहीं है. 175 सदस्यों वाली विधानसभा में उसके 151 विधायक जो हैं. फिर विधानसभा चुनाव जीतने के बाद भी वाइएसआरसी लगातार चुनाव जीतती रही है. उसने हर स्तर पर जबरदस्त बहुमत हासिल किया.
2019 के आम चुनाव में वाइएसआरसी ने लोकसभा की 25 में से 22 सीटें जीतीं. मार्च 2021 में सभी 12 नगर निगमों और 75 में 74 नगर पालिकाओं पर कब्जा किया. सितंबर में पार्टी ने सभी 13 जिला परिषदों और 90 फीसद से ज्यादा मंडल परिषद प्रादेशिक निर्वाचन क्षेत्रों (एमपीटीसी) में परचम लहराया. राज्य में पहली बार सत्तारूढ़ दल ने सभी जिला परिषदें जीतीं. मुख्य विपक्षी दल तेलुगु देशम पार्टी का सफाया हो गया. किसी भी जिला परिषद में वह दहाई का आंकड़ा पार नहीं कर पाई. मुख्यमंत्री के सलाहकार (लोक मामले) सज्जला रामकृष्णा रेड्डी कहते हैं, ''चुनाव नतीजों से साफ है कि जब सरकार अपने लोगों और उनकी जरूरतों का ध्यान रखती है तो षड्यंत्र और झूठ औंधे मुंह गिरते हैं.'' नवंबर में वाइएसआरसी ने चित्तूर जिले में टीडीपी के पूर्व मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू के कुप्पम विधानसभा क्षेत्र के बीचोबीच कुप्पम नगर पालिका के 25 में से 19 वार्ड जीतकर बड़ी चुनावी फतह हासिल की. यह हार भारी शर्मिंदगी का सबब थी. 1989 में पहली बार कुप्पम सीट जीतने के बाद से ही यह उनका गढ़ रहा है. 2019 के विधानसभा चुनाव में वे यह सीट जरूर जीते, पर उसके बाद टीडीपी ने सभी चुनावों में यहां इतना खराब प्रदर्शन किया कि अगले चुनाव में पूरे दमखम से लौटने की संभावना धूमिल ही दिखाई देती है.
चुनावी फतह से साफ है कि लोक लुभावन कल्याणकारी उपायों (हालांकि राज्य भारी वित्तीय संकट से डगमगा रहा है) की बदौलत जगन को जबरदस्त जनसमर्थन हासिल है. चुनाव से पहले के अपने वादे निभाते हुए जगन ने ढेर सारी योजनाएं लॉन्च कीं (देखें बॉक्स: खुले हाथ से खर्च). इनके नाम उनके दिवंगत पिता और संयुक्त आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री वाइ.एस. राजशेखर रेड्डी (वाइएसआर के नाम से लोकप्रिय) और खुद उनके नाम पर रखे गए. कल्याण योजनाएं सबका कल्याण के सिद्धांत को ध्यान में रखकर लाई गईं, उनके पिता वाइएसआर ने उन्हें सलाह दी थी कि प्रदेश के सभी साधनहीन परिवारों तक कोई न कोई सरकारी योजना पहुंचनी ही चाहिए. इसके भारी-भरकम खर्च के बावजूद जगन डिगे नहीं.
वित्त मंत्री बी. राजेंद्रनाथ रेड्डी कहते हैं, ''हमारे मुख्यमंत्री के मन में साफ है कि प्राथमिकता कल्याणकारी उपाय लागू करना और मानव पूंजी में निवेश करना है, इसकी चाहे जो कीमत हो. अगले कार्यकाल में हम बढ़-चढ़कर बुनियादी ढांचे का विकास करेंगे. राज्य पुनर्गठन के बाद हमने पांच साल गंवा दिए (2014-19), क्योंकि नायडू ने तेजी से विकेंद्रीकृत विकास की योजना नहीं बनाई. वे राज्य को तकरीबन दिवालिया छोड़कर गए.''
वित्तीय दुश्वारियां
वाइएसआर के ढेरों कल्याणकारी उपाय वोट-जुटाऊ भले हों, पर इनसे सरकार गंभीर नकदी संकट में पड़ गई है. राज्य के भीतर राजस्व बढ़ाना और निवेश आकर्षित करना बड़ी चुनौती साबित हो रहा है. जगन बेबस हैं और केंद्र तथा निकटवर्ती राज्यों से बकाया रकम का भुगतान करने के लिए कह रहे हैं. राजेंद्रनाथ कहते हैं कि बिजली बकाया, राजस्व घाटा अनुदान, बहुउद्देश्यीय पोलावरम परियोजना की लागत, पीडीएस के लिए चावल के तर्कसंगत आवंटन की मद में केंद्र से 6,300 करोड़ रुपए लेने हैं. तेलुगु गंगा परियोजना का तमिलनाडु पर बकाया है. 2014 में राज्य पुनर्गठन के बाद फिक्स्ड डिपॉजिट खाते डी-फ्रीज करने और तेलंगाना के साथ संपत्तियों के बंटवारे का तेलगांना पर बकाया है. इस बीच सरकार ने आंध्र प्रदेश राज्य विकास निगम (एपीएसडीसी) के जरिए 25,000 करोड़ रु. का कर्ज लिया. टीडीपी ने एपीएसडीसी और अनेक योजनाओं को लागू करने के लिए धन जुटाने के उसके तौर-तरीकों की संवैधानिक वैधता को लेकर सवाल उठाए हैं.
नियमित खर्च पूरे करने के लिए धन उगाहने की खातिर सरकार हर संसाधन खंगाल रही है. संकट का आलम यह है कि 9 नवंबर को राज्य सरकार ने प्रतिभूति बॉन्ड की नीलामी में भाग लेकर भारतीय रिजर्व बैंक से और 1,000 करोड़ रुपए का कर्ज लिया. यह उसने सात फीसद ब्याज की पेशकश करके लिया, जो चार राज्यों की बोली से ज्यादा था. तनख्वाह और पेंशन मिलने में देरी के कारण राज्य सरकार के कर्मचारी और पेंशनभोगी परेशान हैं. आर्थिक तंगी के बावजूद जगन ने सरकारी कर्मचारियों को खुश करने के लिए 7 जनवरी को 23 प्रतिशत (अनुशंसित 14.3 प्रतिशत के विपरीत) वेतनवृद्धि की घोषणा कर दी. साथ ही हाउसिंग प्लॉट, अनुकंपा नियुक्ति और लंबित महंगाई भत्ता देने जैसे लाभों की घोषणा की. इसमें 10,247 करोड़ रु. का अतिरिक्त खर्च शामिल है. उन्होंने सेवानिवृत्ति आयु भी 60 वर्ष से बढ़ाकर 62 वर्ष कर दी. इसके बावजूद राज्य के कर्मचारी 7 फरवरी से हड़ताल की धमकी दे रहे हैं.
पूर्व राजस्व मंत्री डी.एल. रवींद्र रेड्डी अफसोस से कहते हैं, ''2018 में नायडू ने जब 9,400 करोड़ रुपए वाली पासुपु कुमकुमा योजना लागू करके स्वयं-सहायता समूहों की हर महिला को 10,000 रुपए की सहायता दी थी, हालात तभी से बिगड़ने शुरू हुए. राज्य दिवालिया होने की तरफ बढ़ रहा है. हम एक-एक पैसा राजस्व व्यय (परिचालन लागतों के लिए जरूरी व्यय) पर खर्च कर रहे हैं जबकि कम से कम 30 फीसद रकम पूंजीगत खर्च और परिसंपत्ति निर्माण के लिए रखी जानी चाहिए.''
वर्ष 2021-22 की पहली छमाही में राजस्व घाटा अप्रत्याशित रूप से 662.8 प्रतिशत बढ़ चुका है जबकि राजकोषीय घाटा बढ़कर 107.8 प्रतिशत हो गया है. राज्य ने राजस्व घाटा 5,000.08 करोड़ रुपए होने का अनुमान लगाया था लेकिन अप्रैल-सितंबर की अवधि में ही यह 33,140.6 करोड़ रु. हो गया. सीएजी की तरफ से साल की पहली छमाही के लिए हुए लेखा परीक्षण के अनुसार, कुल 1,04,804.9 करोड़ रु. की कमाई में से लगभग आधी रकम कल्याणकारी योजनाओं पर खर्च हुई. यह रकम पूरे साल के लिए राजेंद्रनाथ के बजट में आवंटित 48,083.9 करोड़ रु. की रकम और 39,914.2 करोड़ की उधारियों (जो पूरे साल के लक्ष्य की सीमा के पार कर गई) से कहीं अधिक है.
विश्लेषक कह रहे हैं कि राज्य संकट से ध्यान दूसरी तरफ ले जाने की कोशिश कर रहा है. 26 नवंबर को जगन सरकार ने राजकोषीय उत्तरदायित्व और बजट प्रबंधन कानून (एफआरबीएम) कानून, 2005 में बदलाव किए ताकि उधारियों की सीमा बढ़ाई जा सके और ज्यादा राजस्व घाटे को अनुमति दी जा सके. एफआरबीएम कानून में बदलावों को तर्कसंगत ठहराते हुए राजेंद्रनाथ कहते हैं, ''कोविड-19 के कारण राजस्व प्राप्तियों में भारी कमी आई. साथ ही 15वें वित्त आयोग के अवार्ड में केंद्र का क्षैतिज हस्तांतरण भी कम हो गया. इन बाधाओं से राजकोषीय दबाव और बढ़ गया.'' पूर्व वित्त मंत्री और राज्य विधान परिषद में विपक्ष के नेता यनमाला रामकृष्णुदू ''लापरवाही से हुए खर्च की विस्तृत जांच'' की मांग कर रहे हैं.
गहराता संकट
वाइएसआरसी ने राजस्व खर्चों को अभूतपूर्व ऊंचाई पर पहुंचा दिया है. जून 2019 से अनेक प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) योजनाओं और रेवड़ियों के जरिए 6.612 करोड़ से ज्यादा लोगों को कुल 1.12 लाख करोड़ रुपए मिले. फीडबैक के आधार पर जगन अब भी योजनाओं में कतरब्यौंत कर रहे हैं. गरीब तबकों के विद्यार्थियों की फीस लौटाने वाली जगनन्ना विद्या दीवेना योजना में माताओं के पैसा नहीं चुकाने की रिपोर्ट लगातार बढ़ रही हैं. लिहाजा ऐसी माताओं को नोटिस दिया गया कि कॉलेज में समय पर भुगतान करने वाली मांओं को ही अगली किस्त मिलेगी. ग्राम और वार्ड सचिवालय के 11,162 गांवों में फैले व्यापक नेटवर्क और शहरी इलाकों में 3,842 वार्ड सचिवालयों के जरिए इन अनेक कल्याणकारी योजनाओं के अमल पर नजर रखी जाती है.
कल्याणकारी एजेंडे में जगन का ज्यादा ध्यान शिक्षा और स्वास्थ्य कार्यक्रमों पर है. जून 2019 और अक्तूबर 2021 के बीच वाइएसआर आरोग्यश्री के जरिए 13,74,087 लोगों ने 4,828.7 करोड़ रुपए के सरकारी खर्च पर इलाज करवाया. पात्रता बदलकर 5 लाख रुपए तक की आमदनी वाले लोगों को शामिल करने के बाद राज्य के 95 फीसद परिवार इस योजना के लाभार्थी हैं.
विश्लेषकों का कहना है कि ज्यादातर कल्याणकारी योजनाओं के साथ निवेश के मार्फत विकास की कोई ऐसी योजना जुड़ी नहीं है जिससे नौकरियों का सृजन हो सके. विशाखापटनम, अमरावती और कुर्नूल में तीन राजधानियां बनाने की त्रि-राजधानी योजना की अनिश्चितता ने भी संभावित निवेशकों को डरा दिया है क्योंकि यह कानूनी झगड़ों में फंसी है. एक सेवानिवृत्त अफसरशाह कहते हैं, ''हम भारत के इतिहास की सबसे भीषण वित्तीय अनुशासनहीनता के गवाह हैं.'' विश्लेषक बताते हैं कि वाइएसआरसी सरकार ने पिछले साल जो कर्ज लिए, वे इससे पहले की सरकार की ओर से लिए गए कर्जों की कुल धनराशि के बराबर थे. वे उन चिंताजनक रिपोर्टों का हवाला देते हैं जिनमें कहा गया है कि सरकार ने नियमों का उल्लंघन करके और एफआरबीएम (राजकोषीय जिम्मेदारी और बजट प्रबंधन) कानून की सीमा से ज्यादा कर्ज लिए और मांग करते हैं कि सरकार वित्तीय स्थिति पर श्वेत पत्र लाए. बैंक और वित्तीय संस्थाएं अब संपत्ति गिरवी रखे बिना सरकार को कर्ज देने से परहेज कर रही हैं.
लंबा खेल
वाइएसआरसी और टीडीपी के बीच बढ़ती राजनैतिक कटुता से हालात और बिगड़ गए. 19 अक्तूबर को यह कटुता नए रसातल में पहुंच गई, जब टीडीपी के प्रवक्ता कोम्मारेड्डी पट्टाभिरम और अन्य नेताओं ने वाइएसआरसी और मुख्यमंत्री जगन के खिलाफ चुन-चुनकर अपशब्दों का प्रयोग किया. तुरंत पलटवार करते हुए वाइएसआरसी के कार्यकर्ता भी टीडीपी के मुख्यालय में घुस गए और तोड़-फोड़ करके ताकत दिखाई, बावजूद इसके कि पुलिस ने संवैधानिक पदों पर बैठे लोगों के प्रति अपशब्द कहने के लिए पट्टाभिरम को गिरफ्तार किया था. नाराज नायडू पार्टी मुख्यालय पर 36 घंटे की हड़ताल पर बैठ गए. फिर राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाने की मांग लेकर उन्होंने राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को ज्ञापन दिया. जवाबी ज्ञापन में वाइएसआरसी ने राष्ट्रपति से ''सार्वजनिक जीवन में शालीनता और मर्यादा का निर्वाह नहीं कर पाने के लिए'' टीडीपी की मान्यता रद्द करने की मांग की.
इस अप्रिय लड़ाई के नवीनतम अध्याय में नायडू एक मीडिया कॉन्फ्रेंस में फूट-फूटकर रो पड़े और ऐलान किया कि जगन के बाकी कार्यकाल तक विधानसभा में नहीं जाएंगे. राजनैतिक टिप्पणीकार के. नागेश्वर कहते हैं, ''जगन को विशाल जनादेश हासिल है. इसका इस्तेमाल वे राजकाज पर ध्यान देने में कर सकते हैं. इसके उलट वाइएसआरसी नाहक ही कटुता और विवादों में उलझ रही है.''
कुछ आलोचकों का कहना है कि यह सब प्रतिद्वंद्वियों को खत्म करने की जगन की रणनीति का हिस्सा है. आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्य सचिव और अब भाजपा कार्यकर्ता आइ.वाइ.आर. कृष्ण राव कहते हैं, ''यह राजकाज की बेहद केंद्रीकृत, असहिष्णु और एकतरफा शैली है. अंधाधुंध चुनावी वादे लागू करने की यह कोशिश राज्य को बर्बाद कर देगी.'' दूसरों का कहना है कि 21 दिसंबर को जीवन के 50 वसंत पूरे कर रहे जगन दबंग शासक की स्पष्टता और इरादे के साथ आगे बढ़ रहे हैं. उन्हें करीब से देख चुके एक अफसरशाह कहते हैं, ''वे काफी कुछ एक आदमी की सेना हैं और अपने कार्य और विचार से स्वतंत्र शख्सियत हैं. उनकी याददाश्त तेज है, खासकर संख्याओं के मामले में. जगन का लक्ष्य, लंबे समय तक सत्ता में रहना, खुद के अलावा अपने साथ के लोगों को समृद्ध करना और वोट बैंक बरकार रखते हुए विपक्ष का दम घोंटना है.'' कैबिनेट मंत्रियों या खुद के नियुक्त सलाहकारों से भी वे बामुश्किल ही कभी सलाह लेते हैं. केवल पार्टी सांसद वी. विजय साई रेड्डी, सज्जला रामकृष्ण रेड्डी (सलाहकार, लोक मामले) और जगन के मामा वाइ.वी. सुब्बा रेड्डी, जिन्हें दूसरे कार्यकाल के लिए तिरुमला तिरुपति देवस्थानम (टीटीडी) का अध्यक्ष बनाया गया है, को ही ऐसे व्यक्तियों के रूप में जाना जाता है, जिनकी बात वे सुनते हैं.
अलबत्ता जगन की झोली में राज्य के लिए नई योजनाओं की कमी नहीं है. इनमें सबसे ताजातरीन है जिलों का पुनर्गठन, जो अब करीब दोगुने बढ़कर 13 से 25 हो जाएंगे. इसका मतलब बेशक यह है कि उन्हें फिर और नए वादे करने होंगे. वह भी तब जब चुनाव के बाद किए गए कुछ वादों पर जरा काम नहीं हुआ. इनमें हरेक जिले में नया मेडिकल कॉलेज व सुपर स्पेशिएलिटी अस्पताल खोलने का वादा भी शामिल है. जगन के हाथों वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए एक साथ सभी के शिलान्यास के अलावा इस पर कुछ काम नहीं हुआ है.

