
केंद्रीय बजट 2021/ प्रतिरक्षा
पिछले साल मई में सरहद पर गतिरोध की शुरुआत के बाद से ही चीन ने भारत के ऊपर जो सैन्य बोझ थोपा, उसकी कीमत देश को करीब 20,766 करोड़ रुपए से चुकानी पड़ी है. पिछले अप्रैल में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर चीन की तरफ से अचानक सैन्य तैनाती की वजह से भारतीय सशस्त्र बलों को और ज्यादा हथियार और सैन्य साजो-सामान खरीदने पड़े.
फरवरी की 1 तारीख को केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने जो बजट पेश किया, उसकी मुख्य बातों में से एक पूंजीगत खर्च में 20 फीसद की बढ़ोतरी—यानी बजटीय अनुमान (सरकार ने जो रकम तय की) और संशोधित अनुमान (जो रकम असल में खर्च की गई) के बीच अंतर—भी थी. यह एक बार किया गया आपातकालीन खर्च हो सकता है, लेकिन इस रुझान का कायम रहना तय है.
बजट ने रक्षा खर्च को बराबर कर दिया—1.4 फीसद की बढ़ोतरी कई सालों में सबसे कम बढ़ोतरी है—लेकिन नए युद्धपोतों, टैंकों, लड़ाकू विमानों और सरहदी सड़कों तथा पुलों के निर्माण पर खर्च करने के लिए सशस्त्र बलों का पूंजीगत खर्च बढ़ा दिया. पिछले साल 1.13 लाख करोड़ रुपए खर्च किए गए थे. इस साल नए सैन्य साजो-सामान खरीदने पर 1.35 लाख करोड़ रुपए खर्च होंगे.
इस साल कुल रक्षा बजट में ठहराव चिंताजनक है, लेकिन सरकार पर भारी दबाव को देखते हुए इसे समझा जा सकता है. रक्षा बजट कुल केंद्रीय बजट का करीब 10 फीसद है और कर्जों की अदायगी के बाद यह दूसरा सबसे बड़ा खर्च है.
कुल 4.7 लाख करोड़ रुपए के रक्षा बजट के तीन अनिवार्य स्तंभ हैं—राजस्व, पूंजी और रक्षा पेंशन. राजस्व और पूंजी में तनख्वाह और ईंधन तथा स्टोर सरीखे खर्च आते हैं और यह कुल रक्षा बजट का सबसे बड़ा 61 फीसद हिस्सा है. रक्षा पेंशन, जिसका भुगतान सरकार अपने 26 लाख पूर्व सैनिकों और असैन्य रक्षा कर्मियों को करती है, तीसरा सबसे बड़ा हिस्सा है जिस पर 1.15 लाख करोड़ रुपए (बजट के करीब 24.4 फीसद) खर्च होते हैं.

पिछले साल पेंशन बजट रक्षा बजट का दूसरा सबसे बड़ा हिस्सा था क्योंकि सरकार ने पेंशन की बकाया रकम के तौर पर 18,000 करोड़ रुपए का अतिरिक्त भुगतान किया था. पेंशन की मद में यह 13.4 फीसद की कमी सशस्त्र बलों के लिए राहत की तरह आई है.
इस साल कड़ी नजर रखी जाएगी कि जिसे रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने ‘‘15 सालों में रक्षा के लिए पूंजीगत खर्च में सबसे बड़ी बढ़ोतरी’’ कहा है, उसे सशस्त्र बल कैसे संभालते हैं. सेनाओं को आधुनिक बनाने का पिछला बकाया काम ही बहुत सारा है और पैसा उड़ते देर नहीं लगेगी. इस महीने, भारतीय वायु सेना पुराने हो चुके 100 से ज्यादा मिग-21 लड़ाकू विमानों को बदलने के लिए सरकार की मिल्कियत वाले हिंदुस्तान एरोनॉटिक्स लिमिटेड से 48,000 करोड़ रुपए के 83 तेजस मार्क 1 लड़ाकू विमान खरीदेगी.
नौसेना जल्द ही 45,000 करोड़ रुपए की उस परियोजना के लिए प्रस्तावों का निवेदन जारी करेगी जिसमें विदेशी फर्म भारतीय भागीदार के साथ छह पारंपरिक पनडुब्बियों का निर्माण करेगी. सेना कई हजार करोड़ रुपए की असॉल्ट राइफलें, सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलें और ड्रोन खरीदने की योजना बना रही है.
जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के राष्ट्रीय सुरक्षा अध्ययनों के विशेष केंद्र में एसोसिएट प्रोफेसर लक्ष्मण कुमार बेहरा अगले साल के रक्षा के बजट के लिए चिंताजनक स्थिति का अनुमान लगाते हैं. वे कहते हैं, ''नकारात्मक वृद्धि के साल में तो ऊंचे राजकोषीय घाटे की वजह बताई जा सकती है, लेकिन लंबे वक्त में इसका बचाव नहीं किया जा सकता और यही वजह है कि रक्षा बजट (जो भारत सरकार के बजट का दूसरा सबसे बड़ा खर्च है) जबरदस्त दबाव में आ जाएगा.’’
शीर्ष सरकारी अधिकारियों का कहना है कि उन्हें अपने अफसरों और सैनिकों की सेवानिवृत्ति की उम्र बढ़ाकर तेज बढ़ते पेंशन बजट में कमी लाने की उम्मीद है. रक्षा प्रमुख (सीडीएस) जनरल बिपिन रावत ने बीते दिसंबर में एक इंटरव्यू में इंडिया टुडे को बताया था कि इससे हाल-फिलहाल सरकार कई हजार करोड़ रुपए बचा सकेगी.
लंबे वक्त में सेना के पास अपने मानवबल में कटौती शुरू करने के अलावा कोई चारा नहीं है. सेना की रक्षा बजट में 50 फीसद और उसके राजस्व तथा पेंशन बजट में 80 फीसद हिस्सेदारी है. 12 लाख सैनिकों के साथ भारतीय सेना चीन की पीपल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) के बाद दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी सेना है. भारतीय सेना असल में पीएलए के जमीनी बलों से भी ज्यादा बड़ी है, जिन्हें एक दशक की कटौती के बाद 10 लाख सैनिकों से भी कम पर ले आया गया है.
भारतीय सेना को पाकिस्तान और चीन से सटी अनसुलझी 4,000 किमी लंबी सरहदों पर गश्त के लिए इन सैनिकों की जरूरत है. पिछले महीने सेना प्रमुख जनरल एम.एम. नरवणे ने कहा था कि सेना चीन के साथ सटी पूरी 3,448 किमी लंबी एलएसी पर अलर्ट है. इसका यह मतलब भी हो सकता है कि विस्तारित प्रशिक्षण तैनातियों के लिए सरहद पर बड़ी तादाद में सैनिकों की तैनाती की गई है, जो दूसरे क्षेत्रों में चीन की तरफ से परेशानी पैदा करने की स्थिति में तत्काल मोर्चा संभालने के लिए तैयार हैं.
सैन्य अफसर स्वीकार करते हैं कि सेना को कम से कम 3,00,000 सैनिकों की कटौती करने की जरूरत है ताकि वह आधुनिक बनने का खर्च उठा पाए. यह लंबी चलने वाली प्रक्रिया है लेकिन फिर भी इतनी धीमी रफ्तार से चल रही है कि इसका कोई असर दिखाई नहीं देता.
जनरल रावत ने सेना को आधुनिक बनाने का जो काम हाथ में लिया था और उनके उत्तराधिकारी जनरल नरवणे ने जिसे आगे बढ़ाया है, वह सुस्ती से आगे बढ़ रहा है और सैनिकों में कटौतियों की पहचान तक होना बाकी है. सवाल यह है कि जब दुश्मन दरवाजे पर खड़ा हो तब यह काम कैसे किया जा सकता है. और इसी का जवाब खोजकर अरबों रुपए बचाए जा सकते हैं. ठ्ठ
1.4 %
बढ़ोतरी की गई है प्रतिरक्षा बजट में जो हाल के कुछ सालों में सबसे कम है
4.7 %
लाख करोड़ रु. का है कुल प्रतिरक्षा बजट

