बुनियादी बदलाव
पांचेक साल पहले राज्य सरकार ने निवेशकों के लिए सहज वाणिज्यिक और औद्योगिक माहौल बनाने के मकसद से तेलंगाना राज्य औद्योगिक परियोजना मंजूरी और स्वप्रमाणन प्रणाली (टीएस—आइपीएएसएस) नाम से एक नई व्यवस्था लागू की. इसके तहत सरकार फटाफट मंजूरी का इंतजाम करती है और निवेशकों को अर्जी दाखिल करने के तुरंत बाद ही काम शुरू करने की अनुमति दे देती है.
इसके लिए इन्फोसिस के डिजाइन किए गए सॉक्रटवेयर का इस्तेमाल किया जाता है: ऐसी किसी भी अर्जी की सूचनाएं संबंधित सरकारी विभागों को अपने आप ही पहुंच जाती हैं, जो जरूरत पडऩे पर उसमें पूछताछ करते हैं अन्यथा 48 घंटे में उसे मंजूरी दे दी जाती है.
राज्य के उद्योग और वाणिज्य तथा सूचना-प्रौद्योगिकी महकमों के प्रमुख सचिव जयेश रंजन नजरिए को थोड़ा और साफ करते हुए बताते हैं, ‘‘अर्जियां फटाफट निबटाने के लिए हमने तमाम सारी प्रक्रियाओं और कागजी काम को संक्षिप्त कर दिया है.
अर्जी में अगर कोई कमी/खामी है तो उसके मिलने के 48 घंटे के भीतर वह बता दी जानी चाहिए. भौतिक सत्यापन के लिए मौके का मुआयना करने की बजाए टेक्नोलॉजी, यहां तक कि सैटेलाइट इमेजरी तक की भी मदद ली जा रही है. इसके अलावा हम निवेशकों के खुद से प्रमाणित तथ्यों पर भी भरोसा करके चलते हैं.’’
टीएस-आइपीएएसएस के जरिए अब तक 13,000 अर्जियों को मंजूरी दी जा चुकी है. रंजन के शब्दों में, ''निवेशकों के भरोसे का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है 23 फीसद निवेशक ऐसे हैं जिन्होंने दोबारा निवेश के लिए अर्जी दी है. और इनमें से एक हिंदुस्तान सैनिटरीवेयर ने तो सात प्रस्ताव दिए हैं.’’
माइक्रोमैक्स इन्फॉर्मेटिक्स के एमडी राजेश अग्रवाल कहते हैं कि इस सिंगल विंडो क्लियरेंस से वक्त भी बचता है और खर्च भी. इसके अलावा प्रक्रिया भी पारदर्शी रहती है. ऑनलाइन होने से प्रक्रिया काफी तेजी से आगे बढ़ती है. हम सारी जरूरी मंजूरियों के लिए एक ही बार में अर्जी लगा सकते हैं.’’
राज्य सरकार ने डिजिटल लैंड बैंक की भी व्यवस्था बना रखी है. इससे निवेशकों को दूरदराज के इलाकों की जमीन भी एक जगह बैठकर देख लेने और फिर उस हिसाब से अपेक्षित लॉजिस्टिक्स का अंदाज लगाने में आसानी हो जाती है.

