लखनऊ के गोमतीनगर में लोहिया पथ के किनारे बने पर्यटन भवन के दूसरे तल पर स्थित उत्तर प्रदेश इंडस्ट्रियल एक्सप्रेसवेज डेवलेपमेंट अथॉरिटी (यूपीडा) के दफ्तर में 21 अप्रैल की सुबह से काफी हलचल थी. अतिरिक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) श्रीश चंद्र वर्मा, फाइनेंस कंट्रोलर विश्वजीत राय, पूर्वांचल एक्सप्रेस का काम देख रहे चीफ जनरल मैनेजर ए. के. पांडेय, बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे का जिम्मा संभालने वाले चीफ इंजीनियर मनोज गुप्ता, गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे का काम देख रहे विश्वदीपक और यूपीडा के सलाहकार दुर्गेश उपाध्याय अपने कक्षों में मुस्तैदी से जुटे थे.
लॉकडाउन के बाद 20 अप्रैल से दोबारा शुरू हुए एक्सप्रेसवे के निर्माण कार्य के बाद की ताजा जानकारी जुटाई जा रही थी. निर्माण कार्य में लगी हर यूनिट को लॉकडाउन की गाइडलाइन की जानकारी देकर हर हाल में मजदूरों के बीच सोशल डिस्टेंसिग बनाये रखने का निर्देश दे रहे थे. शाम छह बजे सीईओ और अपर मुख्य सचिव गृह, सूचना अवनीश कुमार अवस्थी यूपीडा के दफ्तर पहुंचे. उन्होंने लॉकडाउन के बाद शुरू हुए निर्माण कार्य को पूरा करने के तौर-तरीकों की समीक्षा की.
बैठक में मौजूद अधिकारियों ने सीईओ अवस्थी को बताया कि कोरोना वायरस के बढ़े संक्रमण के कारण लॉकडाउन में सख्ती के चलते लखनऊ के अलावा एक्सप्रेसवे के निर्माण से जुड़े सभी जिलों में प्रोजेक्ट इंप्लीमेंटेशन यूनिट (पीआइयू) के दक्रतर खुल चुके हैं. पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे के निर्माण में कुल 10 हजार मजदूर लगाए गए हैं. लॉकडाउन के बाद इनमें से करीब पांच हजार मजदूर सभी आठ पैकेजों में मौजूद हैं.
यूपी में लॉकडाउन लागू होने से पहले यूपीडा पूर्वांचल एक्सप्रेसवे, बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे और गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे का निर्माण करा रहा था. पूर्वांचल एक्सप्रेसवे का काम 42 फीसद से ज्यादा पूरा हो गया था और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इसे इसी वर्ष दीपावली में आम जनता के लिये खोलने की घोषणा कर दी थी. लॉकडाउन लागू होने के बाद सारा निर्माण कार्य ठप हो गया और इन सभी प्रोजेक्ट को उनके तय समय में पूरा होना संभव नहीं रह गया है.
अवनीश कुमार अवस्थी बताते हैं, ''मार्च अप्रैल में जिस वक्त लॉकडाउन रहा वही समय किसी भी प्रोजेक्ट में तेजी से काम करने का होता है. अगर मई में लॉकडाउन कुछ शर्तों के साथ हटता भी है तो उसके बाद बारिश का मौसम आ जाएगा.
जिससे एक बार फिर कामकाज रुकेगा. ऐसी स्थिति में सभी प्रोजेक्ट अपने तय समय से कम से कम तीन महीने आगे खिसक जाएंगे.'' प्रदेश में चल रहे निर्माण कार्यों के पूरा होने की नई समयसीमा तय करने के लिए मुख्यमंत्री ने उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य की अध्यक्षता में एक कमेटी बना दी है. यह कमेटी विचार करेगी कि प्रदेश में एक्सप्रेसवे, हाइवे, लोक निर्माण विभाग के बड़े कार्य और अन्य विभागों के प्रोजेक्ट को कैसे आगे बढ़ाया जाए?
मजदूरों की सुरक्षा बनी चुनौती
लॉकडाउन के समय निर्माण कार्य शुरू करने के पीछे सरकार की बड़ी मंशा बेकार बैठे मजदूरों में किसी प्रकार के असंतोष को फैलने से रोकने की है. प्रदेश के बड़े प्रोजेक्ट में शुमार एक्सप्रेस के निर्माण में फिलहाल एक तिहाई मजदूरों से की काम शुरू कराया गया है. 20 अप्रैल से दोबारा शुरू हुए निर्माण कार्य में पूर्वांचल एक्सप्रेसवे पर आधे मजदूर काम कर रहे हैं तो बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे पर कुल मजदूरों की संक्चया 6,000 है जिनमें वर्तमान में मौजूद 2,150 मजदूरों से की काम कराया जाना है.
इसी प्रकार गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे पर भी एक तिहाई से कुछ ज्यादा 488 मजदूर लॉकडाउन की बंदिशों के बीच काम करने के लिए उपलब्ध हैं. इन सभी मजदूरों की सुरक्षा एक बड़ी चुनौती है. यूपीडा के सलाहकार दुर्गेश उपाध्याय बताते हैं, ''एक्सप्रेसवे के निर्माण में लगे सभी मजदूरों में सख्ती के साथ सोशल डिस्टेंसिंग का पालन कराया जा रहा. काम में जाने से पहले सभी मजदूरों की थर्मल स्कैनिंग की जाती है. हर पीआइयू के पास एक मेडिकल टीम है जो इन सारे मजदूरों के स्वास्थ्य पर नजर रख रही है.''
उधर, प्रदेश सरकार किसी भी प्रकार के निर्माण कार्य में लगे मजदूरों के लिए दो हफ्ते तक क्वारंटीन योजना बना रही है. सरकार के एक अधिकारी बताते हैं कि 20 अप्रैल के बाद कुछ निर्माण कार्य शुरू होने के बाद वे मजदूर अपने पुराने कार्यस्थल पर लौटेंगे जो फैक्ट्री या निर्माण कार्य बंद होने पर वापस चले गए थे. ऐसे मजदूर इस दौरान किस हालात में रहे? किनके बीच रहे? इसकी जानकारी न होने से इनके संक्रमित होने की आशंका से इंकार नहीं किया जा सकता.
ऐसे में सरकार निर्माण कार्य में लगने से पहले इन मजदूरों को दो हफ्ते क्वारंटीन में रहना अनिवार्य कर सकती है. यह तय किया जा रहा है कि यह क्वारंटीन उस जिले के किसी अस्पताल में हो या फिर प्रोजेक्ट के करीब अस्थायी क्वारंटीन सेंटर बनाकर मजदूरों को मेडिकल टीम की निगरानी में रखा जाए.
निर्माण कार्य में लगे मजदूरों और अन्य लोगों को जागरूक करने के लिए लोक निर्माण विभाग ने एक वीडियो क्लिप बनाई है. करीब 5 मिनट के इस वीडियो में मजदूरों को कैसे काम करना और रहना है, सारी जानकारी दी गई है. वीडियो में बताया गया है कि कार्यस्थल के पास शेल्टर होम बनाकर मजदूर वहीं पर निर्धारित दायरे में रहेंगे. कार्यस्थल पर मजदूरों को हाथ धोने की व्यवस्था की जा रही है. मजदूरों को कार्यस्थल पर सोशल डिस्टेंसिंग के साथ लाया जाएगा.
सबसे पहले उनका टेंपरेचर मापा जाएगा. मजदूरों को सुरक्षा किट दी जाएगी, जिसमें दास्ताने, खाने की सामग्री, गमछा, साबुन आदि सामान होगा तथा उपकरणों को भी सैनिटाइज किया जाएगा. सभी मजदूर दास्ताने पहनकर कार्य कार्य करेंगे. श्रमिकों को काम का विभाजन इस तरह से किया जाएगा कि सोशल डिस्टेंसिंग बनी रहे.
योगी के जिले में दूर हुए लक्ष्य
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के गृह जिले गोरखपुर में इस वक्त करीब तीन हजार करोड़ रुपए की योजनाओं पर कार्य चल रहा है. इनमें से कई तो इसी वर्ष पूरा होने वाली थीं पर लॉकडाउन ने इन योजनाओं के लक्ष्य का आगे की ओर ढकेल दिया है. इन्हीं योजनाओं में मुख्यमंत्री का ड्रीम प्रोजेक्ट गोरखपुर चिडिय़ाघर का काम भी लॉकडाउन में रुका हुआ था. 20 अप्रैल के बाद कुछ ढील मिलने के बावजूद इसका काम अभी पूरी तरह से शुरू नहीं हो सका है.
चिडिय़ाघर के निर्माण में अबतक कुल 213 करोड़ रुपए खर्च हो चुके हैं. इसका निर्माण कर रही कार्यदायी संस्था राजकीय निर्माण निगम ने अप्रैल के अंत तक इस प्रोजेक्ट को पूरा करने का लक्ष्य रखा था लेकिन लॉकडाउन के बाद काम बंद हो गया.
शासन से निर्माण की मद में मिलने वाले 42 करोड़ रुपए भी जारी नहीं हुए हैं. राजकीय निर्माण निगम के एक अधिकारी बताते हैं, ''अगर मई में इस प्रोजेक्ट पर तेजी से काम शुरू हुआ तो अगले दो महीनों में ही इसे पूरा किया जा सकता है.'' वहीं लॉकडाउन ने गोरखपुर के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में 750 बेड के अस्पताल और प्रशासनिक भवन का निर्माण कार्य भी बंद कर दिया था. सरकार ने इस प्रोजेक्ट को अप्रैल, 2021 में पूरा करने का लक्ष्य रखा है लेकिन अब इस प्रोजेक्ट के कम से कम छह महीने आगे खिसकने की आशंका है.
कोरोना संकट ने गोरखपुर में विमान सेवाओं के विस्तार को भी थाम दिया है. यहां 26 करोड़ रुपए की लागत से 350 यात्रियों की क्षमता वाले टॢमनल के निर्माण के लिए टेंडर प्रक्रिया अंतिम चरण में थी जिसे अप्रैल में पूरा हो जाना था. यह टेंडर प्रक्रिया कब पूरी होगी?
इसका जवाब अभी किसी के पास नहीं है. इस स्थिति में इस वर्ष के अंत तक बनकर तैयार होने वाले टर्मिनल के लिए अब अगले साल की राह तकनी होगी. गोरखपुर में रहने वाले एक रिटायर्ड आइपीएस अफसर रामेंद्र कुमार बताते हैं ''जबतक टर्मिनल का निर्माण पूरा नहीं होता तब तक चाहकर भी यहां से विमान सेवाओं में विस्तार कर पाना संभव नहीं होगा. फिलहाल गोरखपुर से दिल्ली के लिए तीन, मुंबई, हैदराबाद, कोलकाता, प्रयागराज के लिए एक-एक विमान सेवा है. दो विमान के बीच लैंडिंग और टेकआफ का समय बहुत कम है. ऐसे में एक भी फ्लाइट में देरी होने से दूसरे का शिड्यूल प्रभावित होता है जिससे 50 यात्रियों की क्षमता वाले टर्मिनल में अफरातफरी का महौल हो जाता है.''
थमा काशी विश्वनाथ मंदिर का सौंदर्यीकरण
इस वर्ष जनवरी में मकर संक्रांति के बाद वाराणसी के काशी विश्वनाथ मंदिर के विस्तारीकरण के दूसरे चरण का काम शुरू हुआ था. दूसरे चरण के निर्माण कार्य को चार चरणों में बांटा गया है. इसमें सबसे पहले मंदिर छोर के हिस्से पर फोकस किया गया है. पहले चरण में 28 हजार वर्ग मीटर क्षेत्रफल में एक मंदिर चौक का निर्माण किया जाएगा.
मंदिर चौक में श्रद्धालुओं की कतार के साथ-साथ विश्राम की जगह होगी. इसमें बनारस म्यूजियम समेत कुछ दुकानें भी बनेंगी. मंदिर के विस्तारीकरण से जुड़े एक अधिकारी बताते हैं, ''दूसरे चरण में काशी विश्वनाथ के मंदिर परिसर को विस्तारित किया जाएगा.
इसमें कालिका गली और पिछले हिस्से यानी गेट संख्या एक और पांच से होते हुए ज्ञानवापी परिसर भी सजाया जाएगा.'' तीसरे चरण में ललिता घाट, जलासेन और मणिकॢणका-सिंधिया घाट तक के सौंदर्यीकरण के काम कराए जाएंगे.
अंत में गेट नंबर चार यानी छत्ताद्वार की ओर से कार्य करते हुए मशीनें बाहर की ओर निकल जाएंगी. लॉकडाउन से पहले पहले चरण का कार्य तेजी पर था पर अब काम शुरू करने की सशर्त छूट मिलने के बाद नए सिरे से काशी विश्वनाथ मंदिर के विस्तारीकरण की योजना बनाई जा रही है. इस वर्ष दिसंबर तक पूरा होने वाला मंदिर का सौंदर्यीकरण और विस्तारीकरण का कार्य अब अगले वर्ष जून तक पूरा होने की संभावना है.
उधर, शहरी सुविधाओं को बेहतर करने वाली प्रदेश की 3,000 से अधिक बड़ी परियोजनाओं को फिर से शुरू कराने की दिशा में काम तेज कर दिया है. जल निगम शहरों के साथ ग्रामीण क्षेत्रों में सुविधाएं देने का काम कराता है. इसमें सीवर से लेकर पाइप पेयजल आपूर्ति के काम शामिल हैं.
जल निगम अभी अटल मिशन फॉर रेजूवेनेशन ऐंड अर्बन ट्रांसफारमेशन (अमृत), नमामि गंगे, ग्रामीण क्षेत्रों में पाइप पेयजल परियोजनाओं का काम करा रहा है. इसके अलावा जल निगम की निर्माण कार्यदायी संस्था निर्माण एवं अभिकल्प भी कई योजनाओं पर कार्य कर रही है.
कोरोना के महामारी घोषित होने के बाद लॉकडाउन के चलते सभी परियोजनाओं के काम रोक दिए गए थे. जल निगम प्रबंधन 20 अप्रैल के बाद बंद पड़ी परियोजनाओं को नई रणनीति के साथ शुरू करना चाहता है ताकि इनमें ज्यादा देरी न हो. चूंकि जल निगम के पास अधिकतर परियोजनाएं केंद्र सरकार की हैं इसलिए केंद्र से नामित नोडल अधिकारियों से संपर्क कर इन योजनाओं को पूरा करने का संशोधित लक्ष्य तय किया जाएगा.
वर्ष 2022 में विधानसभा चुनाव का सामना करने वाली प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती समय के साथ निर्माण कार्यों को पूरा करने की होगी. कोरोना संकट से उबरने के बाद यही योगी सरकार की सबसे बड़ी परीक्षा भी होगी.
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