असम के मुख्यमंत्री सर्वानंद सोनोवाल की छवि भले ही सीधे-सादे धरतीपुत्र की हो लेकिन उनके अधिकारियों के बारे में ऐसा नहीं कहा जा सकता. मई 2016 में उनके मुख्यमंत्री बनने के बाद से 315, जिनमें एक आइएएस अधिकारी और कई स्वायत्तशासी संस्थाओं के प्रमुख शामिल हैं, भ्रष्टाचार के आरोपों में गिरफ्तार हो चुके हैं. पिछले 18 महीने में आठ बड़े घोटाले सामने आ चुके हैं जिनमें असम लोक सेवा आयोग में नौकरी के लिए पैसा लेने का घोटाला भी शामिल है.
इस में गिरफ्तार लोगों में सुनयना एड्यु और पूर्व-कांग्रेसी मंत्री नीलमणि सेन डेका के पुत्र राजर्षि सेन डेका समेत विभिन्न स्तरों के 23 अफसर शामिल हैं. सोनोवाल कहते हैं, ''हमने भ्रष्टाचार मुक्त शासन देने का वादा किया था और हम वैसा करके रहेंगे.'' 7 नवंबर को मुख्यमंत्री के सतर्कता प्रकोष्ठ ने सूचना और जनसंपर्क विभाग के निदेशक रंजीत गोगोई को 2015 में 34 करोड़ रु. के अनधिकृत मल्टी-मीडिया प्रचार श्विजन असम, मिशन असम्य में कथित रूप से हाथ होने के लिए गिरफ्तार कर लिया.
एक और बड़े अधिकारी गौतम बरुआ फरार हैं, जो असम बिल्डिंग ऐंड अदर कंस्ट्रक्शन वर्कर्स वेलफेयर बोर्ड के पूर्व चेयरमैन रहे हैं. विपक्ष इसे बदले की कार्रवाई बता रहा है क्योंकि ये सारे घोटाले उस समय के हैं जब राज्य में कांग्रेस की सरकार थी. सबसे बड़े घोटालों में से एक है राज्य के समाज कल्याण विभाग में कथित रूप से 2,000 करोड़ रु. का घोटाला. इसमें अब तक छह कर्मचारी गिरक्रतार किए जा चुके हैं.
भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई ने खुद मुख्यमंत्री सोनोवाल पर परेशान करने वाले कुछ सवाल खड़े कर दिए हैं. शर्मिदगी का पहला मामला सितंबर में देखने को मिला जब असम हाइकोर्ट ने यह कहते हुए कि गुवाहाटी मेट्रोपोलिटन डेवलपमेंट अथॉरिटी (जीएमडीए) से जुड़े कई करोड़ रु. के लुई बर्जर मामले में सीआइडी पक्षपातपूर्ण तरीके से जांच कर रही है, जांच का काम सीबीआइ को सौंप दिया था. इस मामले की जड़ें जुलाई 2015 की हैं जिसमें अमेरिकी न्याय विभाग के फॉरेन करप्ट प्रैक्टिसेज अधिनियम के तहत एक अमेरिकी कंसल्टेंसी फर्म लुई बर्जर के खिलाफ याचिका दाखिल की गई थी.
फर्म के अधिकारियों ने अमेरिकी कोर्ट को बताया था कि उन्होंने—1998 से 2010 के बीच—जल प्रबंधन कंसल्टेंसी परियोजना पाने के लिए असम और गोवा सरकार के अज्ञात अधिकारियों को 97,66,630 डॉलर की रिश्वत दी थी. जीएमडीए की परियोजना का निर्णय कथित रूप से गुवाहाटी विकास विभाग की ओर से लिया गया था, जिसके तत्कालीन प्रभारी मंत्री हेमंत बिस्वसर्मा थे जो मौजूदा असम सरकार में दूसरे नंबर की हैसियत रखते हैं.
दूसरी शर्मिंदगी अक्तूबर में झेलनी पड़ी जब तेजपुर से भाजपा सांसद आर.पी. शर्मा ने राज्य के सिंचाई मंत्री रंजीत दत्ता पर अपने विभाग में काम आवंटित करने के लिए पैसा लेने का आरोप लगाकर बड़ा धमाका कर दिया. सांसद शर्मा ने यह भी आरोप लगाया था कि कुछ दूसरे मंत्री भी परियोजनाओं के लिए 10 प्रतिशत कमिशन लेते हैं.

