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टाटी स्टील के फौलादी मंसूबे

अपनी नींव रखे जाने के बाद से ही टाटा स्टील ने लगातार नवाचारी, टिकाऊ और किफायती स्टील उत्पाद, सेवाओं और समाधानों के जरिए राष्ट्र निर्माण में अपना अतुलनीय योगदान दिया है.

 फौलादी कदम जमशेदपुर में कर्मचारियों के साथ रतन टाटा
फौलादी कदम जमशेदपुर में कर्मचारियों के साथ रतन टाटा
अपडेटेड 21 अगस्त , 2017

टाटा स्टीलः स्थापनाः 1907

राष्ट्र निर्माता

अपनी नींव रखे जाने के बाद से ही टाटा स्टील ने लगातार नवाचारी, टिकाऊ और किफायती स्टील उत्पाद, सेवाओं और समाधानों के जरिए राष्ट्र निर्माण में अपना अतुलनीय योगदान दिया है. दिल्ली, चेन्नै और कोलकाता हवाई अड्डों के निर्माण में टाटा के स्टील का इस्तेमाल किया गया है और कई महानगरों में मेट्रो रेल बनाने में यह काम आया है. मुंबई के बांद्रा-वर्ली सी लिंक में लगा हाइ टेंशन तार भी टाटा का ही है.

तब और अब

मैनचेस्टर के अपने दौरे पर स्कॉटिश दार्शनिक और शिक्षक थॉमस कार्लाइल का व्याख्यान सुनने के बाद जमशेदजी नौशेरवानजी टाटा की एक स्टील प्लांट लगाने की इच्छा ने मूर्त रूप लिया. कार्लाइल ने कहा था, ''जो देश लोहे पर नियंत्रण कायम कर लेता है वह जल्द ही सोने को भी अपने वश में कर लेता है." जमशेदजी इस वाक्य से बहुत प्रभावित हुए.

तब से लेकर अब तक कंपनी ने न सिर्फ गुणवत्ता पर ध्यान दिया है बल्कि अपने परियोजना स्थल के आसपास रहने वाले लोगों के जीवन को सुधारने में भी योगदान दिया है. जमशेदजी मानते थे कि मुक्त उद्यमिता में समुदाय किसी कारोबार का केवल हितधारक ही नहीं होता बल्कि उस कारोबार के अस्तित्व का मूल कारण होता है.

कंपनी का लक्ष्य रहा है कि भारत में प्रति व्यक्ति स्टील के उपभोग के स्तर को अधिकतर विकसित देशों के स्तर तक पहुंचाया जा सके.

टाटा स्टील के प्रबंध निदेशक टी.वी. नरेंद्रन कहते हैं, ''अगले एक दशक के दौरान हम दुनिया में प्रौद्योगिकी और नवाचार समेत डिजिटल तकनीक के इस्तेमाल के मामले में अग्रणी स्टील कंपनी बनना चाहते हैं." अब तक तो टाटा स्टील ने देश के साथ इस्पाती कदम बढ़ाए हैं. ऐसे में फौलादी इच्छाशक्ति के पेड़ में फूल भी इस्पाती ही लगेंगे.

 

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