हिंदुस्तान एरोनॉटिक्स लिमिटेडः स्थापनाः 1964
दमदार शुरुआत
एक असामान्य दृष्टि वाले कारोबारी ने 1940 में हिंदुस्तान एयरक्राफ्ट के नाम से विमान बनाने वाला कारखाना लगाया था. इनका नाम था सेठ वालचंद हीराचंद, जिन्होंने भारत के पहले शिपयार्ड सिंधिया स्टीम नैविगेशन कंपनी और ऑटोमोबाइल प्लांट प्रीमियर ऑटोमाबाइल की भी स्थापना की थी. जब वे मैसूर के राजा के पास अपने स्टार्ट-अप के लिए पैसे मांगने गए, तो आजाद भारत के औद्योगिक आधार की शक्ल उनके दिमाग में थी.
जल्द ही यह साकार भी हुआ. आज हिंदुस्तान एरोनॉटिक्स विमानों की डिजाइन, विकास और उत्पादन का इकलौता केंद्र है. बीते 70 साल में इसने 29 किस्म के विमान बनाए हैं—मिग-21 से लेकर सुखोई एसयू-30एमके1 और तेजस, चेतक, चीता और ध्रुव हेलिकॉप्टर तथा सुरक्षाबलों के लिए मालवाहक विमान. दो दशक से ज्यादा समय पहले यहां एक एयरोस्पेस विंग का गठन किया गया था.
इसने भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान परिषद को मंगलयान अभियान और 2014 के जीएसएलवी मार्क 3 के प्रक्षेपण के लिए प्रमुख घटकों की आपूर्ति भी की है. करीब 2,400 साझीदारों से घटकों को मंगवाकर कंपनी ने एक समग्र विमानन और उच्च तकनीक औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण किया है. एचएएल एयरबस ए-320 और बोइंग-777 के लिए हाइ प्रिसीजन स्ट्रक्चरल और कम्पोजिट काम भी करता है.
इसने अब तक 4,060 विमान और हेलिकॉप्टर, 4,900 विमान इंजन तैयार किए हैं. 11,000 से ज्यादा विमानों और 32,000 इंजनों का इसने ओवरहॉल किया है. अब यह कंपनी मैन्युफैक्चरिंग से प्रौद्योगिकी फ र्म बनने की ओर बढ़ रही है जिसके लिए इसने अपने मुनाफे का 10 फीसदी शोध-अनुसंधान में लगाया है. अगले एक दशक में कंपनी 1,000 हेलिकॉप्टर और 100 से ज्यादा लड़ाकू जेट बनाएगी.
क्या आप जानते हैं?
पिछले पांच साल में एचएएल ने 1,500 पेटेंट दाखिल किए हैं जो 2012 में केवल दो थे.

