गोदरेजः स्थापनाः 1897
साबुन से आगे की कहानी
ताला, साबुन से लेकर पशुचारा और अंतरिक्ष कार्यक्रम के लिए इंजन बनाने तक ऐसे कई उद्योग हैं जिनके विकास में इस समूह ने बड़ी भूमिका निभाई है. इस समूह की जड़ें भारत की आजादी और स्वदेशी आंदोलन तक जाती हैं. इसके संस्थापक अर्दशीर गोदरेज शुरुआत में कुछ धंधों में नाकाम रहे लेकिन ताले का कारोबार चमक गया. इसके बाद सुरक्षा उपकरण और स्टील के फर्नीचर का कारोबार खुला.
साबुन बनाने के बाद समूह ने डिटर्जेंट, घरेलू और निजी उपयोग के उत्पाद बनाने शुरू किए. साबुन बनाने के लिए चूंकि वनस्पति तेल का उपयोग होता था इसलिए उसका उप-उत्पाद ऑयल केक पशुचारे के तौर पर बेचा जाता था. मुंबई के पास विक्रोली में बड़ी जमीन होने के चलते समूह ने रियल एस्टेट क्षेत्र में भी प्रवेश किया.
दुनिया भर में गोदरेज समूह के 1.1 अरब उपभोक्ता हैं और राजस्व 4.1 अरब डॉलर है. 1918 में कंपनी ने छवि नाम से दुनिया का पहला ऐसा साबुन निकाला जिसमें पशु वसा नहीं था. इसके बाद गोदरेज नंबर 2 के नाम से एक और साबुन 1919 में लाया गया. नाम के बारे में अर्दशीर की दलील थी, ''लोग अगर नंबर 2 को इतना अच्छा पाएंगे तो नंबर 1 को उससे भी बेहतर मान लेंगे."
गोदरेज का नंबर 1 साबुन 1922 में बाजार में आया. गोदरेज के उत्पादों का विज्ञापन एनी बेसेंट और रवींद्रनाथ टैगोर ने किया. महात्मा गांधी ने एक बार गोदरेज के प्रतिद्वंद्वी को एक पत्र लिखा था, ''मैं अपने भाई गोदरेज का इतना सम्मान करता हूं कि अगर आपका उद्यम इन्हें किसी भी तरीके से नुक्सान पहुंचाएगा तो मुझे खेद है कि मैं आपको अपना आशीर्वाद नहीं दे सकूंगा."
अब क्या स्थिति है
चेयरमैन आदि गोदरेज कहते हैं, ''हमारा सपना है कि 2020 में हम 2010 के आकार का 10 गुना हों. हम अपनी रणनीति पर लगातार ध्यान केंद्रित किए हुए हैं और नए क्षेत्रों में निवेश कर रहे हैं जबकि क्रियान्वयन में पूरी क्षमता और श्रेष्ठता बरत रहे हैं."
क्या आप जानते हैं?
इस समूह के पास विक्रोली में 1943 से ही सबसे बड़ा निजी रूप से प्रबंधित मैंग्रोव का जंगल है जो आकार में न्यूयॉर्क के सेंट्रल पार्क का तीन गुना है.

