सुनहरा अतीत
यह परमाणु विज्ञान और इंजीनियरिंग के क्षेत्र में भारत का शीर्ष अनुसंधान और विकास केंद्र है. इसके वैज्ञानिकों ने परमाणु बम विकसित करके देश को एक रणनीतिक बढ़त दिलाई है. उन्होंने देश में परमाणु बिजली संयंत्रों की जरूरतें पूरी करने के लिए विभिन्न प्रकार के परमाणु ईंधन तैयार किए हैं, साथ ही परमाणु हथियारों के लिए भी जरूरी सामग्री विकसित की है. देश के पहले परमाणु कार्यक्रम की योजना बनाने वाले होमी जहांगीर भाभा के सहयोग से भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र (बीएआरसी) को परमाणु ऊर्जा प्रतिष्ठान, ट्रॉम्बे (एईईटी) के तौर पर स्थापित किया गया था.
भाभा इसके पहले निदेशक थे. इसका पहला काम था परमाणु ऊर्जा आयोग के तहत परमाणु रिएक्टरों के लिए हर तरह के शोध और अनुसंधान को एक मंच पर लाना. 1967 में एईईटी का नाम बदलकर बीएआरसी रख दिया गया. बीएआरसी में पहला परमाणु परीक्षण रिएक्टर और तारापुर परमाणु ऊर्जा स्टेशन में पहला ऊर्जा रिएक्टर अमेरिका से मंगाया गया था. बीएआरसी में रिसर्च और रेडियोस्टोप उत्पादन के लिए रिसर्च रिएक्टर, यूरेनियम धातु और परमाणु ईंधन बनाने के लिए संयंत्र, ईंधन का पुनर्प्रसंस्करण और भूकंप स्टेशन शामिल हैं. इन सभी रिसर्च रिएक्टरों में इंजीनियरिंग की सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धि है ध्रुव.
इस हाइ न्यूट्रॉन फ्लक्स रिएक्टर का डिजाइन, निर्माण और संचालन पूरी तरह से भारतीय इंजीनियरों ने किया था. इस रिएक्टर में ईंधन के तौर पर प्राकृतिक यूरेनियम का इस्तेमाल होता है और गुरु जल को मॉडरेटर और कूलैंट की तरह इस्तेमाल किया जाता है. पावर रिएक्टर संबंधित तकनीक की जांच और रेडियोस्टोप के उत्पादन में ध्रुव बहुत उपयोगी है. हालांकि 100 मेगावॉट का रिएक्टर 1985 में ही तैयार हो गया था लेकिन शुरुआती समस्याओं की वजह से प्लूटोनियम के उत्पादन में कई वर्ष की देरी हो गई. 1974 और 1998 में भारत के एटमी परीक्षणों में इस्तेमाल होने वाला प्लूटोनियम परमाणु ईंधन बीएआरसी के रिएक्टरों से आया था.
इस प्रयास ने भारतीय वैज्ञानिकों को न सिर्फ भविष्य के परमाणु ईंधन को विकसित करने के लिए तकनीकी जानकारी और आत्मविश्वास दिया बल्कि उन्होंने परमाणु हथियारों के लिए इसे परिशोधित करने की क्षमता भी हासिल कर ली. बीएआरसी ने भारत का पहला प्रेशराइज्ड वाटर रिएक्टर डिजाइन करने और विकसित करने में सफलता पाई है, जिसे चेन्नै के पास कलपक्कम में लगाया गया है. इसने 2016 में नौसेना में शामिल हो चुकी और परमाणु ऊर्जा से चलने वाली भारत की पहली स्वदेशी मिसाइल पनडुब्बी आइएनएस अरिहंत के लिए पावर यूनिट और प्रोपल्शन रिएक्टर भी विकसित किया है.
उज्ज्वल भविष्य
उन्नत रिएक्टर तकनीकों में विशेषज्ञता रखने वाला बीएआरसी परमाणु ऊर्जा पैदा करने के लिए अब नई तकनीकें विकसित करने पर ध्यान दे रहा है. इस समय करीब 5,780 मेगावॉट या कहें कि देश के कुल बिजली उत्पादन का 3.5 प्रतिशत हिस्सा परमाणु ऊर्जा पर आधारित है.
परमाणु ईंधन चक्रमें थोरियम के इस्तेमाल और एक एडवांस्ड हेवी वाटर रिएक्टर की तकनीकी पर काफी अनुसंधान हो चुकी है. तारापुर में इस तरह का 300 मेगावॉट का रिएक्टर प्रदर्शन के लिए लगाया जाएगा. इसके अलावा बड़े स्तर पर व्यावसायिक परमाणु ऊर्जा उत्पादन करने के लिए थोरियम आधारित ईंधन के इस्तेमाल पर भी काफी अनुसंधान किया जा चुका है. यह भारत के तीन चरणों वाले परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम का हिस्सा है.
—अमरनाथ के. मेनन

