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इंडिया टुडे वुमन समिट ऐंड अवार्ड्स: बुलंदियां चूमने के जज्बे का सम्मान

इंडिया टुडे वुमन समिट ऐंड अवार्ड्स में महिला शक्ति का हुआ सम्मान.

राज चेंगप्पा, शिवराज सिंह चौहान और अंशुमान तिवारी के साथ इंडिया टुडे वुमन समिट ऐंड अवॉर्ड्स की वि
राज चेंगप्पा, शिवराज सिंह चौहान और अंशुमान तिवारी के साथ इंडिया टुडे वुमन समिट ऐंड अवॉर्ड्स की वि
अपडेटेड 20 सितंबर , 2016

इंडिया टुडे वुमन समिट अवार्ड्समध्य प्रदेश के इंदौर में 10 सितंबर को आयोजित इंडिया टुडे वुमन समिट ऐंड अवॉर्ड्स समारोह के सभागार में मौजूद हर श्रोता साहस और संकल्प तथा तमाम इनसानी और दैवीय जटिलताओं के खिलाफ कामयाबी की अदम्य दास्तानें सुनकर हैरत में था. राज्य से विभिन्न क्षेत्रों की कामयाब महिलाओं को पुरस्कृत किया गया, उनकी कामयाबियों का जश्न मनाया गया और उनके अनुभव सुने गए.
अपने बीज वक्तव्य में मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा, ''मेरे लिए महिला सशक्तीकरण एक अभियान है. '' उन्होंने बताया कि यह उनका जुनून, जिद और जज्बा है कि महिलाएं अच्छे दिनों की गवाह बन सकीं. चौहान ने याद किया कि कैसे जैत गांव में अपने बचपन के दिनों में उन्होंने बच्चियां पैदा करने के लिए महिलाओं को प्रताडि़त होते हुए देखा है. उन्होंने कहा, ''अपने राजनैतिक करियर की शुरुआत में मैं एक जनसभा को संबोधित कर रहा था और श्रोताओं को बता रहा था कि महिलाओं से समानता भरा व्यवहार क्यों जरूरी है. उसी वक्त एक बुजुर्ग महिला ने खड़े होकर कहा कि ये सारी बातें तो ठीक हैं लेकिन लड़की के ब्याह के लिए दहेज का इंतजाम कौन करेगा? उस दिन मुझे महसूस हुआ कि मुझे कुछ ऐसा करना है जिससे बेटियां बोझ की तरह न देखी जा सकें. '' वहीं से उन्हें कन्यादान योजना का विचार आया. मुख्यमंत्री ने कहा कि एक सांसद के बतौर वे सामूहिक विवाह समारोह करवाने लगे और बाद में जब वे मुख्यमंत्री बने, तो मुख्यमंत्री कन्यादान योजना के माध्यम से उसे संस्थागत शक्ल दी, जिसमें शादी का खर्च राज्य सरकार उठाती है. मुख्यमंत्री पद पर पिछले 11 साल के दौरान शिवराज सिंह की राजनीति महिला सशक्तीकरण और कृषि पर ही टिकी रही है.
इससे पहले मध्य प्रदेश की महिला एवं बाल विकास मंत्री अर्चना चिटनिस ने कहा कि पुरुष और स्त्री एक-दूसरे के पूरक होते हैं. उन्होंने कहा, ''हर कामयाब आदमी के पीछे एक औरत होती है और हर कामयाब औरत के पीछे भी एक आदमी होता है, चाहे वह पिता के रूप में हो, भाई के, बेटे के या पति के रूप में. '' चिटनिस ने कहा कि अपनी क्षमताओं को बाहर लाने की ताकत खुद महिलाओं के भीतर है. उन्होंने कहा, ''जब विवेकानंद से पूछा गया कि औरतों की स्थिति कब सुधरेगी, तो उन्होंने जवाब दिया कि ऐसा तब होगा जब औरतें खुद इसका फैसला करेंगी.''

प्रधान सचिव, तकनीकी शिक्षा और कौशल विकास, कल्पना श्रीवास्तव ने भी कहा कि महिलाओं की स्थिति को सुधारने के लिए काफी काम किए गए हैं लेकिन काफी कुछ किया जाना बाकी है. भारत लैंगिक सूचकांक में 152 देशों के बीच 127वें स्थान पर आता है. उन्होंने महिला सशक्तीकरण विभाग की भूमिका पर जोर दिया, जिसने 80,000 बाल विवाह को रोकने में निर्णायक भूमिका निभाई है. उन्होंने कहा, ''इस मसले पर जागरूकता का स्तर यह रहा कि खुद 21 लड़कियों ने आगे आकर अपने बाल विवाह को रद्द करने की पहल की. '' उन्होंने बताया कि इस संबंध में कुल 157 एफआइआर दर्ज की गईं.

इंडिया टुडे वुमन समिट अवार्ड्समहिलाओं को सम्मानित करने के अलावा आयोजन में एक परिचर्चा भी रखी गई जिसका विषय था, ''महिला सशक्तीकरण: मेरी कहानी. '' इसमें ऐसी तीन महिलाओं ने हिस्सा लिया जिन्होंने अपने-अपने पेशे में तमाम प्रतिकूलताओं के बावजूद अपनी खास जगह बनाई है. फैजाबाद की डीएम पद पर तैनात यूपी से 2008 बैच की आइएएस अफसर किंजल सिंह ने अपने, अपनी बहन प्रांजल और अपनी मां विभा के संघर्ष की कहानी सुनाई कि कैसे उनके डीएसपी रहे पिता के.पी. सिंह की एक फर्जी मुठभेड़ में मातहतों के हाथों हुई हत्या के बाद उन्होंने जीवन गुजारा. बाद में किंजल और प्रांजल की मां की कैंसर से मौत हो गई, जिसके बाद दोनों बहनें अकेली पड़ गईं. इस संघर्ष की परिणति बाद में सिविल सेवा परीक्षा में कामयाबी के रूप में हुई और पूरे 31 साल बाद उनके पिता के हत्यारों को सजा मिल सकी. परिचर्चा में भाग लेते हुए भावुक किंजल ने कहा, ''मेरी मां बुरे वक्त में कहती थीं कि तुम मेरी राजकुमारी हो. उनके ये शब्द मेरी सबसे बड़ी ताकत थे. ''

श्रोताओं में से कुछ ने जब उनसे सलाह मांगी तो उन्होंने कहा, ''कामयाबी चाहते हो तो खुद को दूसरा मौका मत दो. जब मेरी मां को कैंसर का पता चला, तब तक मैं पढऩे में अच्छी नहीं थी. मेरी मां ने कहा कि वे मुझे आइएएस अफसर के रूप में देखना चाहती हैं. मेरे अंकल ने मुझे न्यायिक सेवा के लिए कहा, क्योंकि मैंने विधि की पढ़ाई की थी लेकिन मैंने इनकार कर दिया और सिविल की तैयार करने लगी. मैं उसके बाद से हमेशा पढ़ाई में अव्वल रही और यूपीएससी में मेरा 25वां रैंक आया. '' किस्मत की बात थी कि जब उनके पिता की हत्या के मामले में फैसला आया तब किंजल बहराइच में जिलाधिकारी के बतौर तैनात थीं. यह जिला गोंडा के पड़ोस में है, जहां उनके पिता की हत्या हुई थी.

किंजल सिंह ने अगर हालात से मुकाबला कर के अपनी किस्मत बदली, तो मॉडल और अभिनेत्री टीना सिंह ने भारतीय समाज में गहरे जड़ें जमाए पूर्वाग्रहों के खिलाफ संघर्ष किया. लुधियाना से आने वाली टीना ने अपने अनुभव सुनाते हुए बताया कि उन्हें घर के लोगों ने दिल्ली जाने से रोका था. बाद में वे दिल्ली आईं लेकिन यहां इतना अनिश्चय था कि उन्हें अगले पहर के भोजन का भी पता नहीं होता था. बाद में टीना जब मॉडलिंग और फिल्मों में किस्मत आजमाने मुंबई पहुंचीं, तो उन्हें हर ऑडिशन में यही कहा गया कि वे सफल नहीं हो पाएंगी क्योंकि वे सांवली हैं. उन्होंने कहा, ''वो तो बाद में जब मैं विदेश गई तब पता चला कि भारत के लोग ही सांवले रंग को लेकर पूर्वाग्रहग्रस्त रहते हैं. मैंने खुद से कहा कि मैं अपने सांवले रंग और छोटे बालों से ही कामयाबी हासिल करूंगी. आज मैं 70 से ज्यादा विज्ञापन कर चुकी हूं और अब फिल्में कर रही हूं. ''

इंडिया टुडे वुमन समिट अवार्ड्स
छोटी उम्र में पिता को खोने का दर्द बालाघाट जिले की लांजी सीट से कांग्रेसी विधायक 31 वर्षीया हिना कावड़े को भी है, जिनके पिता और तत्कालीन मंत्री लिखीराम कावरे की वामपंथी चरमपंथियों ने 1999 में हत्या कर दी थी. उसके बाद हिना की मां उस सीट से लड़ीं और जीत गईं. मां ने 2013 में बेटी के लिए रास्ता बनाया और वह भी विधायक का चुनाव जीत गई. वे पुरानी बातों को याद करते हुए कहती हैं, ''मुझे याद है कि मैं अपनी मां के उपचुनाव प्रचार में 15 साल की थी और जनसभाओं को संबोधित करती थी. मेरी मां के पास राजनैतिक अनुभव नहीं था और वे बमुश्किल ही बोल पाती थीं. मेरे मंच पर आने से उन्हें चुनाव में मदद मिलती थी. ''

गायिका और अभिनेत्री सोफी चौधरी ने आयोजन में अपनी मौजूदगी से चार चांद लगा दिए. लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स से ग्रेजुएट सोफी ने कहा कि वे भले ही लड़कियों के बैंड संसारा की 17 साल की उम्र में सदस्य थीं, लेकिन उन्होंने अपनी डिग्री इसलिए हासिल की क्योंकि वे शिक्षा की अहमियत को जानती थीं. सोफी ने महिलाओं के लिए आर्थिक आत्मनिर्भरता पर जोर दिया. उन्होंने कहा, ''बॉलीवुड का करियर छोटा होता है और दूसरे पेशों की तरह यहां भी नकारात्मकता है. '' श्रोताओं की मांग पर उन्होंने बातचीत के बीच में गीत भी सुनाए. श्रोताओं की ओर से सेल्फी के अनुरोध के बीच अपने वक्तव्य का समापन इन शब्दों से किया, ''महिलाओं के सशक्तीकरण की शुरुआत उनके घर से होती है. ''

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