यह साल का वह वक्त होता है जब आप वित्तीय योजनाएं बनाते हैं. इनसे आपका आर्थिक भविष्य प्रभावित हो सकता है. यहां कुछ नुस्खे दिए जा रहे हैं, जिनसे आप अपनी वित्तीय स्थिति को लंबे वक्त के लिए मजबूत कर सकते हैं.
टैक्स की योजना बनाएं
- देश में कमाने वाले हर शख्स को टैक्स देना पड़ता है. सो शुरू में ही 80सी के नियम के हिसाब से निवेश करना शुरू कर दें.
- आखिरी वक्त में अपने वित्तीय सलाहकार का मुंह ताकने की बजाए इसकी प्रक्रिया जल्द शुरू कर दें और टैक्स का बोझ कम करने के लिए निवेश करने वाली रकम की पूरी योजना बना लें.
- पीपीएफ जैसे जरियों, जिनमें निवेश पर ब्याज मिलता है, को जितना जल्दी हो, शुरू कर दें.
- जब यह ईएलएसएस जैसे इक्विटी से जुड़े प्रोडक्ट हों या टैक्स बचाने वाले साझा फंड हों तो साल के शुरू में ही इसकी शुरुआत कर देने का मतलब है एसआइपी के जरिए ज्यादा यूनिट जमा कर लेना.

सही बीमा चुनें
- बीमा (जीवन, स्वास्थ्य आदि) को निवेश के तौर पर न समझें, बल्कि उसे किसी अनजाने खतरे से बचाव के साधन के रूप में लें.
- इस आम मान्यता से बाहर निकलें कि बीमा लेने से सिर्फ टैक्स बचाने में फायदा मिलता है.
- बीमा को जीवन के खतरे से सुरक्षा के तौर पर लें.
- अगर आपने कोई बीमा योजना ले रखी है तो देखें कि बीमा से मिलने वाली रकम मौजूदा जीवन स्तर के हिसाब से क्या आपके परिवार को सुरक्षा देने के लिए पर्याप्त है. अगर ऐसा नहीं है तो एक और बीमा योजना ले लें.
- अगर आप सिर्फ ऑफिस से मिलने वाली स्वास्थ्य बीमा योजना पर आश्रित हैं तो आपको उस पॉलिसी की पूरी बारीकियां व उपयोगिता समझने की दरकार है.
- यह सुनिश्चित करें कि आप पर निर्भर परिजनों को इस स्वास्थ्य बीमा योजना का लाभ मिल रहा है या नहीं. अगर ऐसा नहीं है तो कोई नई स्वास्थ्य योजना ले लें.
- इसे जल्द ले लें क्योंकि इन योजनाओं में मौजूदा या कुछ खास बीमारियों के लिए प्रतीक्षा की अवधि होती है.
- मौजूदा 7 फीसदी की महंगाई दर को देखते हुए आज के 1,000 रु. की क्रय-शक्ति 30 साल बाद 760 रु. के बराबर रह जाएगी.
- सो, रिटायरमेंट के लिए 1 करोड़ रु. बचत बहुत ज्यादा नहीं रहेगी.
- अपने रिटायरमेंट की योजना बनाने के लिए 40 साल की उम्र पार करने का इंतजार न करें. इस मामले में भी आप जितनी जल्दी शुरू कर देंगे, उतना ही अच्छा. जल्दी शुरू करने से आपका निवेश धीरे-धीरे बहुत बढ़ जाएगा.
- बुढ़ापे के लिए एनपीएस और इक्विटी वाले फंड जैसे रिटायरमेंट वाले प्रोडक्ट में पैसा लगाएं.
- अपने ख्वाबों का घर खरीदने के लिए जेब पर जरूरत से ज्यादा बोझ डालने वाला बजट न बनाएं.
- अगर आप जेब की क्षमता से ज्यादा बोझ डालेंगे तो बड़ी
- गलती कर रहे हैं. आपको उसके लिए बहुत ज्यादा ईएमआइ देना होगा.
- ईएमआइ ज्यादा होने पर आप दूसरी बचत योजनाओं के लिए पैसा नहीं बचा पाएंगे. अपनी
- बजट के माकूल घर खरीदें, न कि ख्वाबों के.
अपने मकान की चाबीबहुप्रतीक्षित रियल एस्टेट (रेगुलेशन ऐंड डेवलपमेंट) विधेयक को मंजूरी मिल गई है. इसका मकसद खरीदारों के हितों की हिफाजत और रियल एस्टेट क्षेत्र में पारदर्शिता लाना है. एक नजर...
विधेयक के फायदे
- डेवलपर को प्रोजेक्ट का अनिवार्य पंजीकरण कराना होगा. डेवलपर को प्रोजेक्ट की पूरी जानकारी का खुलासा करना होगा, नहीं करने पर उसकी लागत का 10 फीसदी जुर्माना या जेल.
- मंजूर प्रोजेक्ट में कोई बदलाव करने से पहले दो-तिहाई खरीदारों की लिखित मंजूरी लेनी होगी.
- किसी देरी-गड़बड़ी पर बिल्डरों को उसी दर से खरीदार को ब्याज देना होगा जिससे वे वसूलते हैं
- ढांचागत गड़बड़ी पर बिल्डर पांच साल तक जवाबदेह होंगे.
- कीमतों में मनमानी नहीं चलेगी क्योंकि प्रोजेक्ट की लागत अब कार्पेट एरिया से तय होगी.
- रियल एस्टेट एजेंट की जानकारी में पारदर्शिता बरतनी होगी.
- प्रोजेक्ट वक्त पर देना होगा.
- अपार्टमेंट के आकार का पूरा खुलासा करना होगा.
- प्रोजेक्ट का अलग अकाउंट रखना होगा, बिल्डरों की 70 फीसदी राशि इसी खाते में रखनी होगी.

- रियल एस्टेट बाजार में सुस्ती है, अपने पहले घर के लिए
- यह अच्छा वक्त है क्योंकि डेवलपर अनबिके मकान
- बेचने के लिए रियायत और उपहार दे रहे हैं.
- अभी थोड़े वक्त तक कीमतें कम रहेंगी, पर बाद में बढ़ेंगी.
- निवेश के लिहाज से खरीदार इंतजार करें और बाजार को सुस्ती से उबरने की उम्मीद करें.
- कानून को अमल में लाने में कम से कम एक साल लगेगा, खरीदारों को निर्माणाधीन प्रोजेक्ट को लेकर सतर्क रहना चाहिए.
- बना-बनाया घर खरीदें या निर्माणाधीन घर?
- निर्माणाधीन प्रोजेक्ट से लागत का फायदा मिलेगा.
- दोनों मामलों में प्रामाणिकता और पिछले कामकाज जांच लें.
- निर्माणाधीन प्रोजेक्ट में रकम जमा करने के लिए वक्त दिया जाता है और भुगतान में लचीलेपन की पेशकश दी जाती है. पर देरी होने पर ईएमआइ और किराए से आपकी वित्तीय हालत पर दबाव आ सकता है.
- निवेश के मामलों में सरकारी मंजूरियों, काम की तत्परता, कानूनी वैधता, करों की अदायगी की जांच कर लें. बने-बनाए घर आसानी से मिल रहे हैं.
- पहली बार घर खरीदने वालों को बना-बनाया मकान खरीदना चाहिए. यह 25-40 फीसदी ज्यादा महंगा होता है, पर जोखिम कम.
- बने-बनाए घर में आपको बिल्डर-जमीन-क्षेत्र, सुविधाओं से जुड़े मुद्दों से निजात मिल सकती है. पर सारे दस्तावेजों की जांच आपको खुद करनी होती है.
- बने-बनाए घरों पर सेवा कर नहीं, निर्माणाधीन संपत्तियों के एक हिस्से पर 15 फीसदी सेवा कर.
- बने-बनाए मकान के लिए लिए गए कर्ज के 1.5 लाख रु. तक के मूलधन के वापस भुगतान पर धारा 80सी में कटौती का लाभ मिलता है, पर कब्जे के बाद.
- निर्माणाधीन संपत्ति के मामले में कर लाभ के दावे के लिए निर्माण अवधि तक इंतजार करना होता है क्योंकि निर्माण अवधि के दौरान चुकाए गए ब्याज की पांच बराबर किस्तों में कटौती निर्माण पूरा होने के बाद ही की जा सकती है
- कर्ज की पात्रता बढ़ाने के लिए संयुक्त घर कर्ज लेना या सह-आवेदक को जोडऩा बेहतर होगा. इससे कर लाभ दोगुने हो जाते हैं.
- बजट 2016 में पहली बार घर खरीदने वालों को धारा 80ईई के तहत 50,000 रु. के अतिरिक्त कर लाभों का प्रस्ताव है, बशर्ते घर का मूल्य 50 लाख रु. से ज्यादा न हो और कर्ज की रकम 35 लाख रु. से कम हो.

