उत्तर प्रदेश के लखनऊ का बड़ा इमामबाड़ा बनने के दिनों में वहां के मजदूरों के लिए मामूली-सा व्यंजन दम बिरयानी बना करता था. लेकिन नवाब आसफुद्दौला को इसकी खुशबू इतनी रास आई कि उन्होंने अपने खानसामों को रसोई में इसे बनाने के लिए कहा और इस तरह एक मामूली डिश शाही मेन्यू में शामिल हो गई. क्या आप जानते हैं शिव और शंकर में क्या अंतर है? लेखक देवदत्त पटनायक बताते हैं कि जिसने दुनिया को त्याग दिया है, वह शिव है और जो दुनिया को भोग रहा है वह शंकर है.
इस कप्तान की घोषणा हुई थी प्लेन में
क्या आप जानते हैं कि भारतीय टीम के एक ऐसे कप्तान भी हैं जिनके चयन की घोषणा क्रलाइट में प्लेन के कप्तान ने की थी? इस कप्तान का नाम सुनील गावस्कर है. आज के दौर में जब ज्यादातर सीरियल सास-बहू और विदेशी रियलिटी शो की देशी नकल के दम पर मार्केट में सेंधमारी की जुगत में लगे हैं, उसी दौर में एपिक चैनल खुद को राजा, रसोई और अन्य कहानियां, देवलोक विद देवदत्त पटनायक और मिडविकेट टेल्स विद नसीरुद्दीन शाह जैसे प्रोग्राम की वजह से भीड़ से अलग पहचान बनाने की कोशिश में लगा है.
यह है एपिक चैनल का मकसद
इस चैनल के एमडी महेश सामत कहते हैं, 'हमारे टीवी चैनल एक ही तरह के प्रोग्राम दिखा रहे हैं. हमारा इरादा इतिहास और पौराणिक कथाओं को युवाओं तक पहुंचाना था, जिनसे वे पूरी तरह अनजान हैं. हमने इतिहास और पौराणिक कथाओं को आधुनिक रंग दिया है.' कहानियां हिंदुस्तान की स्लोगन वाला यह चैनल 19 नवंबर को अपनी पहली वर्षगांठ मनाने जा रहा है. यह पूछे जाने पर कि एपिक का आइडिया कैसे आया, सामत कहते हैं, 'इतिहास मेरा खुद का जुनून रहा है और डिजिटाइजेशन की वजह से मुझे लगा कि जॉनर स्पेसिफिक चैनल लाने का यह सही समय है.'
नकल बनाम असल
इस समय टीवी पर रियलिटी शो का दौर चल रहा है, जिसमें विदेशों में हिट रहे रियलिटी शो ज्यादा पॉपुलर हैं. जैसे बिग ब्रदर का भारतीय वर्जन बिग बॉस और अमेरिका'ज गॉट टैलेंट का इंडिया'ज टैलेंट शो अपने कई सीजन कर चुके हैं जबकि अनिल कपूर अमेरिकी सीरीज 24 के अपने दूसरे सीजन के साथ जल्द लौट रहे हैं. वहीं, फियर फैक्टर के भारतीय संस्करण खतरों के खिलाड़ी का अगला सीजन भी तैयार है. सोनी पिक्स और एएक्सएन के बिजनेस हेड सौरभ याज्ञनिक मानते हैं कि इंटरनेशनल फॉर्मेट्स के शो को स्थानीय भाषाओं में लाने के वैश्विक रुझान में इजाफा हुआ है और वे इसी सही भी मानते हैं.
क्या कहते हैं सौरभ
उन्हीं के शब्दों में, 'भारत में इस रुझान में लगातार वृद्धि हो रही है जो अच्छा है. हमारे चैनल के द वॉयस, 24 और फियर फैक्टर सभी हिंदी में आए हैं, और अच्छा कर रहे हैं." हालांकि सामत कहते हैं कि हमारा जॉनर एकदम अलग है, और हमारे यहां रियलिटी शोज की गुंजाइश नहीं है." न ही उनका इरादा कुछ इस तरह के सीरियल्स को लाना है. वजह: भारतीयता का रंग.

फिक्शन और नॉन फिक्शन
भारतीयों का अपने इतिहास और उससे जुड़ी किस्सागोई का खास इतिहास है और एपिक इसी बात को भुनाने की कोशिश करता नजर आता है. चैनल के फिक्शन और नॉन फिक्शन शो दोनों ही एकदम अलग तरह के हैं. फिक्शन में स्टोरीज बाइ रवींद्रनाथ टैगोर काफी लोकप्रिय है. इसे बर्फी और लाइफ इन अ मेट्रो के डायरेक्टर अनुराग बसु लेकर आए हैं. इसमें चोखेर बाली जैसी उनकी सशक्त कहानियों को परदे पर उतारा जा रहा है. नॉन फिक्शन में एकांत में भुला दिए गए ऐतिहासिक स्थलों की पड़ताल की जाती है तो संरचना में ऐतिहासिक महत्व के स्थलों के आर्किटेक्चर और उससे जुड़ी दूसरों बातों को दिखाया जाता है तथा राजा, रसोई और अन्य कहानियां भी खूब पसंद की जाते हैं.
इस पर होती है हैरानी
सामत बताते हैं, 'हैरत में डालने वाला तथ्य हमारे नॉन फिक्शन कार्यक्रमों को मिलने वाली लोकप्रियता है. इनको बहुत अच्छा रेस्पॉन्स मिल रहा है.' यह रेस्पॉन्स ही है कि नई पीढ़ी और शहरी इलाकों में इस चैनल की पहुंच बढ़ रही है. मूलत: लखनऊ के लेकिन दिल्ली में रहने वाले 28 वर्षीय आसिफ कहते हैं कि जब उन्होंने दम बिरयानी की कहानी देखी तो उसे खाने का उनका जायका दोगुना हो गया. वे कहते हैं, ''सचाई मैं नहीं जानता लेकिन लखनऊ कनेक्शन ने खुशबू को दमदार बना दिया.'

किस्सागोई शैली में खुराक
ऐसे दौर में जब टेक्नोलॉजी के हाथों आपसी संवाद का आनंद लुट चुका है, और इतिहास हमारी याद्दाश्त में फीका पड़ चुका है, उस दौर में टेक्नोलॉजी के ही जरिए इतिहास और परंपरा की किस्सागोई शैली में खुराक देना अच्छा है. लेकिन अभी लंबा सफर तय करना है. सामत कहते हैं, ''अभी तो शुरुआत है. अभी कई प्लान बाकी हैं.'

