मध्य प्रदेश कुछेक अपवादों को छोड़कर पिछले दस साल से कृषि में दहाई अंकों की वृद्धि दर्ज करता आ रहा है. इस साल लग रहा था कि खराब मानसून उसकी इस रक्रतार को थाम लेगा. मगर यह उन विरले राज्यों में है, जहां किसान शायद उतनी हताशा की हालत में नहीं हैं. कृषि क्षेत्र में कीर्तिमान बनाने वाला मध्य प्रदेश सबसे ज्यादा सोयाबीन उगाने वाला राज्य है और सरसों की खेती में क्रांतिकारी बदलाव से गुजर रहा है. मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान कहते हैं कि “जबरदस्त कृषि वृद्धि पर इत्मीनान से सवार्य्य मध्य प्रदेश इस साल के मानसून की चुनौती से भी डटकर निपट लेगा.
तो, इस मुकाम पर वे आखिर कैसे पहुंचे? ग्वालियर जिले के एक किसान नेता अशोक पटसरिया कहते हैं कि खेती-किसानी के लिए कर्ज लेने, पैदावार बेचने और उसका भंडारण करने में अच्छा-खासा सुधार आया है. राज्य में गोदामों की गिनती में उछाल आया है, जो सरकार और निजी एजेंसियां, दोनों ने बनाए हैं. इससे किसान अपनी पैदावार को ज्यादा लंबे वक्त तक सुरक्षित रख पा रहे हैं. राजमार्गों से लगे इलाकों में गेहूं खरीद केंद्रों में खासा इजाफा भी वरदान साबित हुआ है. कृषि विभाग के प्रमुख सचिव राजेश राजौरिया कहते हैं, “हम अगले पांच साल तक 10 फीसदी से ऊपर की कृषि वृद्धि दर कायम रख सकते हैं.” गेहूं के न्यूनतम समर्थन मूल्य पर ऊपर से बोनस भी दिया जाता है, जिससे गेहूं की खरीद बढ़ाने में मदद मिली है.

