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बिन बाधा सरपट दौड़ रही विकास की रेल

गुजरात विविध क्षेत्रों में नई ऊंचाइयों पर पहुंच रहा है और उसने मोदी सरकार के समय से चली आ रही लगभग दो अंकों की विकास दर बनाए रखी है. मुख्यमंत्री आनंदीबेन पटेल नई योजनाओं का अनावरण कर रही हैं, इसके  अलावा राज्य सरकार ने पूर्व मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के शुरू किए गए कार्यक्रमों को भी आगे बढ़ाया है.

अपडेटेड 10 नवंबर , 2015

मई 2014 में जब उन्होंने मुख्यमंत्री का पदभार संभाला था, तब आनंदीबेन पटेल की दृष्टि स्पष्ट थीः अपने पूर्ववर्ती नरेंद्र मोदी की निर्धारित विकास गति को बनाए रखने की कोशिश करते हुए, वे सामाजिक मानकों पर ध्यान केंद्रित करके गुजरात के मानव विकास सूचकांक में सुधार की कोशिश करेंगी. उन्हें यह पद इस वजह से मिला था क्योंकि यह देश विकास के मोदी के “गुजरात मॉडल” के प्रेम में इस कदर मुग्ध हो गया था कि उसने पूरे देश में इसे दोहराने के लिए वोट डाला था. उस कुर्सी पर 18 महीने बिताने के बाद आनंदीबेन पटेल अब निश्चिंत हो सकती हैं और प्रधानमंत्री के छोड़े हुए पदचिन्हों पर अपने पैर ठीक से जमा सकने पर संतुष्ट हो सकती हैं.
मुख्यमंत्री के चीफ प्रिंसिपल सेक्रेटरी के. कैलाशनाथन कहते हैं कि अपने पक्के इरादों की वजह से शुरुआत से ही उन्होंने गुजरात के लिए जो दृष्टि रखी थी, उसे साकार करने में वे कामयाब रही हैं. राज्य विविध क्षेत्रों में नई ऊंचाइयों पर पहुंच रहा है और उसने मोदी सरकार के समय से चली आ रही लगभग दो अंकों की विकास दर बनाए रखी है.

मसलन, लघु सिंचाई को लें. पटेल सरकार के तहत गुजरात में 3 लाख हेक्टेयर का हैरान कर देने वाला भारी-भरकम क्षेत्र ड्रिप और स्प्रिंकलर सिंचाई के तहत लाया गया है और लक्षित सब्सिडी के माध्यम से छोटे और सीमांत किसानों को इसे अपनाने के लिए सक्षम बनाया गया है. नतीजतन, 2,00,000 से ज्यादा किसान इससे लाभान्वित हुए हैं.

कृषि के क्षेत्र में सरकार की ओर से एक और नया कदम जैविक खेती नीति है, जो गुजरात की इस किस्म की पहली नीति है. राज्य कृषि उपज मंडी समितियों (एपीएससी) और निजी क्षेत्र के निगमों के माध्यम से उनकी उपज के लिए शक्तिशाली विपणन मंच प्रदान करके किसानों को जैविक खेती अपनाने के लिए प्रोत्साहित कर रहा है. नर्मदा के सब-माइनर नहर नेटवर्क का विस्तार तेजी से किया जाना जारी है, जिससे अधिक से अधिक कृषि भूमि सिंचाई के दायरे के तहत आ रही है.

स्वास्थ्य क्षेत्र में कुपोषण मुख्यमंत्री के प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में से एक है, जो अब तक एक कमजोर कड़ी था. आनंदीबेन पटेल के शुरुआती कदमों में से एक था-छह महीने से लेकर छह वर्ष तक के बच्चों के लिए एक नई स्वास्थ्य जांच योजना शुरू करना, जिसमें हाथ की परिधि के माध्यम से बॉडी मास इंडेक्स का अंदाजा लगाना शामिल है, जिससे मांसपेशियों के विकास और शरीर के वास्तविक पोषण पर नजर रखी जा सके. 43 लाख बच्चों की स्वास्थ्य जांच हो चुकी है, और उनमें से एक लाख बच्चे गंभीर कुपोषण से पीड़ित पाए गए. जांच के पहले से मौजूद मानकों की तुलना में, नई योजना से राज्य में छह साल से कम उम्र के बच्चों के बीच कुपोषण की एक अधिक स्पष्ट तस्वीर सामने आई है और इससे सरकार को लक्षित योजनाएं तैयार करने का मौका मिल गया है.

आनंदीबेन पटेल ने मधुमेह पर नजर रखने के लिए भी बड़े पैमाने पर स्वास्थ्य शिविरों का आयोजन किया है. नतीजा यह है कि 1,38,000 लोग, जो ज्यादातर गरीब या निक्वन मध्यम वर्ग के हैं, उनके मधुमेह का निदान किया गया है और उन्हें इलाज मुहैया कराया गया है. अतीत में प्रधानमंत्री मोदी के साथ काम कर चुके गुजरात के प्रधान सचिव (स्वास्थ्य और परिवार कल्याण) अनिल मुकीम का कहना है कि “स्वास्थ्य के क्षेत्र में सरकार की सबसे बड़ी उपलब्धि यह है कि उसने बीमार लोगों की सटीक पहचान कर ली है और उनकी हालत सुधारने के लिए ठोस कदम तय किए हैं.”

14 अक्तूबर को गुजरात ने अपने शैक्षिक नेटवर्क वंदे गुजरात के भाग के रूप में 16 चैनलों की शुरुआत की, जो प्राथमिक शिक्षा से लेकर उच्च शिक्षा के पाठ और कृषि से लेकर स्वास्थ्य तक कई किस्म के अन्य विषयों के पाठ प्रसारित करते हैं, और यहां तक कि एक चैनल प्रतियोगी परीक्षाएं देने वाले छात्रों के लिए भी है. राज्य के 34,000 सरकारी स्कूलों में से 20,500 स्कूलों में स्कूल शिक्षा कार्यक्रम पहले ही सेट टॉप बॉक्सों के माध्यम से प्रसारित
किया जा रहा है.

बात सिर्फ यह नहीं है कि आनंदीबेन पटेल नई योजनाओं का अनावरण कर रही हैं. सरकार ने मुख्यमंत्री मोदी के शुरू किए गए कई कार्यक्रमों को भी आगे बढ़ाया है. मुख्‍यमंत्री अमृतम योजना के तहत मिलने वाले स्वास्थ्य कवर का दायरा बढ़ा दिया गया है. यह गरीबी की रेखा से नीचे की श्रेणी के मौजूदा लाभार्थियों के अलावा अब निम्न मध्यम वर्ग के लिए भी उपलब्ध है. कैंसर सहित सात प्रमुख रोगों का मुक्रत इलाज इस योजना
के तहत होता है.

पशु स्वास्थ्य सुधार योजना को, जिसे मोदी ने मुख्यमंत्री रहते हुए शुरू किया था, आनंदीबेन पटेल सरकार के दौरान जबरदस्त बढ़ावा मिला है. लगभग 1,700 पशुपालन मेलों में 18 लाख मवेशियों की पशु चिकित्सकों से जांच कराई गई है, और उनमें से 6,000 मवेशियों का इलाज करने के लिए ऑपरेशन किया गया है.
जाने-माने अर्थशास्त्री योगेंद्र्र अलघ का मुख्यमंत्री के बारे में कहना है, “सुशासन के लिए एक निश्चित प्रतिबद्धता उनके स्तर पर निश्चित रूप से दिखाई दे रही है.”
बात मुख्यमंत्री आनंदीबेन पटेल की इस बात से खत्म होती हैः “हम गुजरात के विकास की यात्रा में हरेक को साथ लेकर चलने को प्रतिबद्ध हैं. हर शख्स तक प्रभावी वितरण हमारी प्राथमिकता है.”

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