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प्रशासन जा पहुंचा जनता के द्वार

सिक्किम में राज्य सरकार ने कम से कम 31 ग्राम विकास केंद्र और 176 ग्राम प्रशासन केंद्र स्थापित किए हैं ताकि स्थानीय स्तर पर सेवाओं के जन वितरण को सुदृढ़ किया जा सके.

अपडेटेड 10 नवंबर , 2015

सिक्किम के लोक प्रशासन के केंद्र में है गंगटोक की विकेंद्रीकृत सरकार और समूचे पहाड़ी राज्य के लोगों से लगातार बना रहने वाला संपर्क. राज्य सरकार ने कम से कम 31 ग्राम विकास केंद्र और 176 ग्राम प्रशासन केंद्र स्थापित किए हैं ताकि स्थानीय स्तर पर सेवाओं के जन वितरण को सुदृढ़ किया जा सके.

प्रशासन के विकेंद्रीकरण और लोकतंत्रीकरण के अंश के बतौर राज्य सरकार ने सिक्किम के सुदूरतम हिस्सों में ब्लॉक विकास कार्यालय और पंचायत कार्यालय स्थापित किए हैं. यहां की 75 फीसदी आबादी के ग्रामीण होने के नाते यह काफी कारगर है.

इस कदम से गांव वालों की कितनी मदद हुई है, इसका अंदाजा इसी तथ्य से लगता है कि मुख्‍यमंत्री पवन कुमार चामलिंग की पार्टी सिक्किम डेमोक्रेटिक फ्रंट 1994 से लगातार सत्ता में है. ग्राम पंचायतों और जिला पंचायतों को यह अधिकार है कि वे अपने इलाकों में लागू करने के लिए योजनाओं को तैयार करें, उन्हें मंजूरी दें और निगरानी करें.

इन पंचायत कार्यालयों को 25 लाख रु. तक के ठेके मंजूर करने की छूट मिली हुई है, बीडीओ कार्यालय की सीमा 50 लाख रु. तक के ठेकों को मंजूरी देने की है और सभी जिलास्तरीय कार्यालय दो करोड़ रु. तक की परियोजनाओं को मंजूर कर सकते हैं.

कानून व्यवस्था के मामले में भी राज्य सरकार का रिकॉर्ड अब तक बेदाग रहा है. मुख्यमंत्री चामलिंग कहते हैं, “भारत में 109 उग्रवादी संगठन हैं लेकिन उनमें से एक भी सिक्किम का नहीं है.” गोवा के बाद सिक्किम गरीबी में सबसे तेज गिरावट का सबसे बड़ा उदाहरण रहा है. ताजा आंकड़े दिखाते हैं कि यहां की बीपीएल आबादी 2004-05 के 30.9 फीसदी से गिरकर 2011-12 में 8.19 फीसदी पर आ गई है.

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