आप क्या ऐसे सरकारी स्कूल की कल्पना कर सकते हैं, जहां अत्याधुनिक विज्ञान प्रयोगशालाओं, कॉन्फ्रेंस कक्षों, संवाद की सुविधाओं वाले विज्ञान केंद्र, किताबों से भरी लाइब्रेरी, आधुनिक रसोई और कैंटीन हो और जहां बुनियादी ढांचा और पढ़ाई अच्छे से अच्छे निजी स्कूलों से भी अव्वल ठहरती हो? केरल ने यह सब और इससे भी ज्यादा हासिल करके दिखा दिया है और इसका जरिया बना हैरू प्रिज्म (प्रमोटिंग रीजनल स्कूल्स टू इंटरनेशनल स्टैंडर्ड्स थ्रू मल्टीपल इंटरवेंशंस) यानी बहुआयामी पहल के जरिए क्षेत्रीय स्कूलों को अंतरराष्ट्रीय मानदंडों के अनुरूप बढ़ाना. राज्य ने कोझिकोड के नडाक्कावु में लड़कियों के लिए शासकीय वोकेशनल हायर सेकंडरी स्कूल (जीवीएचएसएस) की कायापलट करके रख दी है और यह दिखा दिया है कि किस तरह सरकार के द्वारा संचालित स्कूल भी निजी संस्थाओं का मुकाबला कर सकते हैं.
यहां के विधायक ए. प्रदीप कुमार ने प्रोजेक्ट के लिए 14 करोड़ रु. जुटाए और 2011 में एलडीएफ की सरकार के सत्ता से बेदखल होने से पहले उससे निजी भागीदारी की इजाजत हासिल की. फैजल और शबाना फाउंडेशन सरीखे जनहित में काम करने वालों की मदद से यह प्रोजेक्ट एक शानदार कामयाबी साबित हुआ. इस काम में उन्हें एनआरआइ कारोबारी केईएफ होल्डिंग्ज के फैजल कोट्टिकोल्लन और उनकी पत्नी शबाना और आइआइएम, कोझिकोड के प्रो. साजी गोपीनाथ ने अपना भरपूर सहयोग दिया.
सरकारी स्कूलों की छवि सुधारने और उन्हें छात्रों के लिए आकर्षक बनाने की कोशिशों में कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूडीएफ सरकार भी बराबरी की सहयोगी रही है. केरल अपनी इन कामयाबियों से काफी उत्साहित है. इसी उत्साह को देखते हुए केरल ने 2016 तक पूर्ण प्राथमिक शिक्षा अर्जित करने वाला पहला राज्य बनने का लक्ष्य तय किया है. कॉलेज की पढ़ाई के स्तर पर तमाम सुधार लागू किए जा रहे हैं, जिनमें पसंद आधारित क्रेडिट और सेमेस्टर सिस्टम, स्वायत्त कॉलेज, ऑनर्स डिग्री कार्यक्रम, उच्च शिक्षा संस्थानों के लिए राष्ट्रीय मूल्यांकन और प्रत्यायन परिषद और नेशनल बोर्ड ऑफ एक्रेडिटेशन पर जोर देना शामिल है.

