मोदी सरकार ने अलग से कौशल विकास मंत्रालय बनाकर युवाओं को पेशेवर ढंग से प्रशिक्षित करने का अपना इरादा साफ किया है और इस बारे में पिछली सरकार की योजनाओं को आगे बढ़ाया है. लेकिन यह सरकार ऐसा क्या अलग करेगी, जिससे उसे मनमोहन सरकार की तरह मामूली कामयाबी से संतोष न करना पड़े? कौशल विकास मंत्री राजीव प्रताप रूडी ने इंडिया टुडे के प्रमुख संवाददाता संतोष कुमार और पीयूष बबेले से इसकी बारीकियों का खुलासा किया. कुछ अंशः
कौशल विकास का नारा तो पुराना है, आप इसमें नया क्या कर रहे हैं?
दिसंबर 2013 में पहली बार नेशनल स्किल क्वालिफिकेशन फ्रेमवर्क (एनएसक्यूएफ) तैयार किया गया. अब देश में हर तरह की ट्रेनिंग एनएसक्यूएफ के तहत होगी. 2016 तक सरकार से सहायता प्राप्त सभी इंस्टीट्यूट को इस फ्रेमवर्क से जुड़ना होगा और 2019 तक सरकारी नौकरी के लिए भी एनएसक्यूएफ सर्टिफिकेट जरूरी हो जाएंगे. इस तरह से हम देश में पेशेवर ट्रेनिंग के वे मानक लागू कर पाएंगे, जो विकसित देशों में चल रहे हैं.
लेकिन इसी मंशा से आई यूपीए सरकार की 2009 में कौशल विकास नीति तो पटरी से उतर चुकी है.
2009 की नीति में 50 करोड़ युवाओं को प्रशिक्षित करने का लक्ष्य रखा गया था. इनमें 5 करोड़ 2009 से 2012 के बीच और 45 करोड़ लोग 2012 से 2017 के बीच प्रशिक्षित होने थे, ये लक्ष्य नहीं पाए जा सके. इसीलिए तो दूरदर्शी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्किल डेवलपमेंट के लिए नवंबर 2014 में अलग मंत्रालय बनाया और इस साल नई राष्ट्रीय कौशल विकास नीति भी लाई जा रही है.
एनएसक्यूएफ असल में होगा कैसा?
इसमें एक से लेकर 10 तक लेवल होंगे. जैसे लेवल एक और दो का सर्टिफिकेट वेल्डर या फिटर के लिए होगा तो लेबल 3 और 4 का सर्टिफिकेट सुपरवाइजर के लिए होगा. इसी तरह लेबल 9 और 10 का सर्टिफिकेट एमडी जैसे पदों के लिए होगा. यानी लोगों के पास एक ऐसा सर्टिफिकेट होगा जो उद्योगों को बताएगा कि उनके पास किस काम का हुनर है.
ये सर्टिफिकेट आइटीआइ या स्कूली सर्टिफिकेट से कैस अलग होंगे?
अब थ्योरी के साथ ट्रेनिंग की हिस्सेदारी बढ़ाई जानी है जैसे 9वीं कक्षा में 700 घंटे थ्योरी और 300 घंटे ट्रेनिंग जरूरी होगी. 10वीं में यही अनुपात 600:400, 11वीं में 500:500 और 12वीं में 400-600 हो जाएगा. यानी क्लास के साथ ट्रेनिंग का हिस्सा बढ़ता जाएगा. बच्चों को दसवीं के सर्टिफिकेट के साथ एनएसक्यूएफ का लेवल सर्टिफिकेट मिलेगा. यह सर्टिफिकेट उसे तुरंत नौकरी पाने में मददगार होगा.
लेकिन इतनी बड़ी आबादी को ट्रेंड करने के लिए ट्रेनर कहां से आएंगे और पैसा कहां से आएगा?
पांच साल में 25 करोड़ युवाओं को ट्रेंड करने के लिए 5 लाख करोड़ रु. का निवेश चाहिए. यह बड़ी रकम है. लेकिन अगर आप देखें तो केंद्र सरकार के ही 24 मंत्रालय इस समय 70,000 करोड़ रु. की स्किल डेवलपमेंट योजनाएं चला रहे हैं. एक बार चलना शरू कर दें तो और भी रास्ते निकल आएंगे.
नई नीति में क्या विजन लेकर आ रहे हैं?
इस बारे में मोदी जी के पास विचारों का भंडार है. उनसे अलग-अलग समय पर होने वाली बातचीत से इतने आइडिया निकल आते हैं कि विस्तृत नीति बनाई जा सकती है. असल सोच स्किल्ड इंडिया का है. उस ओर हम बढ़ रहे हैं.

