मध्य प्रदेश में जुलाई 2013 के बाद से रह-रहकर नेताओं को अपने शिकंजे में लेते जा रहे व्यवसायिक परीक्षा मंडल (व्यापम) घोटाले में फंसने के बाद केंद्र सरकार ने राज्यपाल रामनरेश यादव को हटाने का मन बना लिया है. घोटाले की जांच कर रहे विशेष कार्य बल (एसटीएफ) ने वन रक्षक भर्ती परीक्षा—2013 में फर्जीवाड़े के सिलसिले में यादव के खिलाफ धोखाधड़ी और भ्रष्टाचार निरोधक कानून की धाराओं के तहत 24 फरवरी को एफआइआर दर्ज की थी. मामले में अन्य 87 लोगों को भी आरोपी बनाया गया है. वैसे, एक पखवाड़े पहले राज्यपाल के बेटे शैलेष यादव के खिलाफ व्यापम घोटाले में एफआइआर दर्ज होने और इसी मामले में उनके ओएसडी धनंजय यादव की गिरफ्तारी के बाद से ही राजभवन व्यापम की लपटों में घिरने लगा था. केंद्र सरकार ने 85 वर्षीय यादव को संकेत दे दिए थे कि बेहतर होगा कि वे खुद ही इस्तीफा दे दें, ताकि उन्हें बरखास्त करने की नौबत न आए.
सूत्रों की मानें तो इस मामले में राज्यपाल के खिलाफ ठोस मामला बन रहा है. एसटीएफ ने उनके खिलाफ जो सबूत जुटाए हैं, उनमें राजभवन से किए कॉल डिटेल्स और एसएमएस के अलावा राज्यपाल के लेटरहेड पर लिखे गए सिफारिशी पत्र भी शामिल हैं. राज्यपाल पर आरोप है कि उन्होंने अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर दो फॉरेस्ट गार्ड की भर्ती कराई. राजभवन के क्रियाकलाप से परिचित सूत्रों की मानें तो यादव अपने बेटे शैलेष के कारण संकट में हैं. यादव भले ही खांटी कांग्रेसी हैं और कांग्रेस सरकार में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री रह चुके हैं, लेकिन हवा का रुख भांपकर शैलेष ने बीजेपी नेताओं से अपनी नजदीकियां बढ़ा ली थीं. भोपाल के राजनैतिक गलियारों में इस बात की चर्चा थी कि वे जल्द ही बीजेपी में शामिल हो जाएंगे. दबी जबान से यह भी आरोप लग रहे थे कि शैलेष यूनिवर्सिटियों और अन्य पदों पर ट्रांसफर-पोस्टिंग में लगातार राजभवन का दुरुपयोग कर रहे थे. सत्ता के केंद्र वल्लभ भवन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, ''राजभवन से राज्यपाल महोदय के दस्तखत वाले कई सिफारिशी पत्र हमारे यहां भी आए. इन पत्रों में जिस तरह की सिफारिश होती थी, कोई भी मंजा हुआ नेता या राज्यपाल के पद पर बैठा व्यक्ति वैसी सिफारिश नहीं करेगा. अब लगता है कि शैलेष या उनके ओएसडी ही राज्यपाल से इस तरह के पत्रों पर दस्तखत करा रहे थे.'' वैसे भी ऊंचा सुनने के अलावा बुढ़ापे में होने वाले कई रोग उन्हें घेरे रहते हैं. विधानसभा के बजट सत्र में अभिभाषण को पढ़ने के लिए भी उन्हें दो लोग पकड़कर डाइस तक ले गए थे.
झक सफेद धोती-कुर्ते के ऊपर गांधी टोपी पहनने वाले यादव के पूरे राजनैतिक जीवन में यह पहला मौका है, जब उन्हें इतने गंभीर आरोप झेलने पड़ रहे हैं. इसीलिए एफआइआर दर्ज होने के पहले एक बयान में उन्होंने कहा था, ''मेरे 52 साल के राजनैतिक जीवन में कभी कोई दाग नहीं लगा. मेरा तो खुद का मकान तक नहीं है.'' लेकिन शायद उन्हें पता नहीं था कि उनके नाम की सिफारिशी चिट्ठियां उनके बुढ़ापे को खराब करने वाली हैं.
वैसे, यादव लगातार इस कोशिश में थे कि उन्हें इस्तीफा न देना पड़े. उन्होंने काफी हद तक मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को भी इस बात के लिए मना लिया था कि बजट सत्र के बीच में तो कम से कम उन्हें न जाना पड़े. सूत्रों की मानें तो चौहान ने गृह मंत्री राजनाथ सिंह के साथ बातचीत में राज्यपाल की पैरोकारी भी की. लेकिन राजनाथ ने स्पष्ट कर दिया कि एफआइआर होने के बाद सरकार किसी सूरत में यादव को पद पर देखना नहीं चाहती. वैसे भी कांग्रेस सरकार की तरफ से नियुक्त राज्यपाल को भ्रष्टाचार के आरोप लगने के बाद बचाने की कोई तुक नहीं है. इसके अलावा बीजेपी हाइकमान ने यह भी देखा कि राज्यपाल को भ्रष्टाचार के मामले में हटाकर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की ओर तनी व्यापम घोटाले की तोप का मुंह कांग्रेस की तरफ मोड़ा जा सकता है.
दरअसल, राज्यपाल पर एफआइआर ऐसे समय दर्ज हुई है, जब कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह ने हाइकोर्ट की तरफ से नियुक्त विशेष जांच दल (एसआइटी) को सौंपे हलफनामे में सीधे चौहान पर व्यापम घोटाले में शामिल होने और 42 नियुक्तियों की सिफारिश करने का आरोप लगाया था. इसके पहले मुख्यमंत्री के पीए रहे प्रेम नारायण के खिलाफ घोटाले में एफआइआर हो चुकी है. शिवराज सरकार में उच्च शिक्षा मंत्री रहे लक्ष्मीकांत शर्मा पहले से जेल में हैं. घोटाले के सूत्रधार औैर शिशु मंदिर के शिक्षक से जगुआर कार में फर्राटा भरने तक का सफर तय करने वाले सुधीर शर्मा भी इसी मामले में जेल में हैं. दिग्विजय ने तो यहां तक आरोप लगाया है कि शिवराज ने खुद को बचाने के लिए राजभवन, उमा भारती और अन्य लोगों के नाम एक्सेल सीट में जुड़वाए और यही छेड़छाड़ की हुई एक्सेल शीट जबलपुर हाइकोर्ट में जमा की गई. यह सारा घटनाक्रम मिल कर तीसरा कार्यकाल संभाल रहे चौहान के लिए बड़ा सिर दर्द बन गया था.
इसीलिए शुरुआत में चौहान इस बात से डर रहे थे कि अगर आरोपों के चलते राज्यपाल को जाना पड़ा तो कल ऐसे ही आरोप उनकी कुर्सी की बलि मांगेंगे. सूत्रों की मानें तो राजनाथ ने मुख्यमंत्री को समझाया कि राज्यपाल की विदाई इसलिए तय है क्योंकि उनके खिलाफ एफआइआर हुई है और एसटीएफ को पुख्ता सबूत मिले हैं, जबकि मुख्यमंत्री के खिलाफ लग रहे आरोपों की प्रकृति नैतिक ज्यादा है. कंधे पर हाइकमान का हाथ आने के बाद मुख्यमंत्री के तेवर बदल गए. उन्होंने विधानसभा में कांग्रेस को चुनौती दी, ''हिम्मत है तो सुनो शिवराज को, दम है तो सुनो शिवराज को.'' चौहान ने दिग्विजय सिंह के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया. मुख्यमंत्री कार्यालय के सूत्रों का कहना है कि सीएम की सिफारिश वाले 42 नामों की एक्सेल शीट फर्जी है. मुख्यमंत्री के एक करीबी अधिकारी ने बताया, ''हाइकोर्ट में सौंपी गई असली एक्सेल शीटों में से एक शीट खाली थी. कांग्रेस नेताओं ने यही शीट भरकर सारा बखेड़ा खड़ा किया है. जांच में यह बात सामने आएगी और आरोप लगाने वालों पर चार सौ बीसी का मुकदमा दर्ज होगा.''
लेकिन जिस कुर्सी पर आज चौहान बैठे हैं, उनसे पहले 10 साल तक उस कुर्सी पर बैठ चुके दिग्विजय ने कहा, ''एसटीएफ पूरी तरह मुख्यमंत्री के इशारे पर काम कर रही है. एसटीएफ ने छेड़छाड़ की हुई एसएमएस वाली डिटेल हाइकोर्ट में जमा की. अब हमने असली एक्सेल शीट दी है. अगर मैं झूठ बोल रहा हूं तो मेरे खिलाफ मुकदमा करें.'' एसआइटी को सौंपे पत्र में दिग्विजय ने एक दर्जन से अधिक फोन नंबरों की कॉल डिलेट निकालने का आग्रह किया है. ये फोन नंबर सीएम हाउस, चौहान और उनकी पत्नी साधना सिंह, उनसे जुड़े प्रशांत श्रीवास्तव, हरीश, वसंत भार्गव सहित कई लोगों के हैं.
व्यापम के एक व्हिसल ब्लोवर ने इंडिया टुडे को बताया, ''इन नंबरों में ऐसे 5,000 एसएमएस का ब्योरा है जो मुख्यमंत्री कार्यालय से जुड़े लोगों ने व्यापम घोटाले के सिलसिले में किए.'' यानी 1,365 मेडिकल दाखिले औैर सरकारी नियुक्तियां रद्द कराने वाले घोटाले में अब बड़ी मछलियों की बारी है. राज्यपाल की कुर्सी पर तो इनमें से महज दो नियुक्तियां कराने के आरोप ही बन आई, जब बाकी की 1,363 सीटों का चिट्ठा खुलेगा तो व्यापम आज से कहीं व्यापक दिखाई देगा.
राजभवन पहुंची व्यापम घोटाले की आंच
व्यापम घोटाले में दाग लगने के बाद मध्य प्रदेश के राज्यपाल रामनरेश यादव पर पद छोड़ने का दबाव. जांच जिस रास्ते पर आगे बढ़ रही है, उसमें फंस सकती हैं कई बड़ी मछलियां.

अपडेटेड 2 मार्च , 2015
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