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मोदी का नया मंत्रः मेक इन इंडिया

प्रधानमंत्री देश के उत्पादन क्षेत्र में नई जान फूंकने के लिए निवेशकों की खातिर लाल कालीन बिछाने की पहल कर रहे हैं.  ‘मेक इन इंडिया’ अभियान के क्या हैं मायने?

अपडेटेड 30 सितंबर , 2014
प्रधानमंत्री देश के उत्पादन क्षेत्र में नई जान फूंकने के लिए निवेशकों की खातिर लाल कालीन बिछाने की पहल कर रहे हैं. आखिर ‘‘मेक इन इंडिया’’ अभियान के क्या हैं मायने:

1. देश के उत्पादन क्षेत्र में नई जान फूंकने और अधिक से अधिक विदेशी निवेश को आकर्षित करने के लिए 25 सितंबर को इस अभियान का उद्घाटन हुआ.

2. इस अभियान का लोगो मशीन के कल-पुर्जों से बने गिर के शेर को बनाया गया है, जो आगे बढऩे को तत्पर दिखता है. डीआइपीपी के सचिव अमिताभ कांत इस परियोजना के प्रमुख हैं.

3. लक्ष्य यह है कि देश अगले तीन साल में विश्व बैंक के कारोबार में आसान देशों के सूचकांक में 134 से 50वें स्थान पर आ जाए.

4. सरकार ने वाहन, रसायन, आइटी, दवा, कपड़ा, विमानन, चमड़ा जैसे उद्योगों और रेलवे तथा पर्यटन जैसे 25 मुख्य क्षेत्रों को चिन्हित किया है, जिनमें अग्रणी बनने की भारत में अकूत क्षमता और संभावनाएं हैं.

5. औद्योगिक लाइसेंस और औद्योगिक उद्यमियों के प्रतिवेदनों के लिए ऑनलाइन आवेदन प्राप्त करने की व्यवस्था की गई है. लाइसेंस की वैद्यता की अवधि तीन साल तक बढ़ा दी गई है.

6. कपड़ा, चमड़ा और खाद्य प्रसंस्करण जैसे अधिक रोजगार की संभावना वाले उद्योगों के आधार पर पांच नए स्मार्ट शहर बनाए जाएंगे. इनमें बाकी उद्योगों को भी कर रियायतें देने का प्रस्ताव है.

7. रक्षा मंत्रालय 20 उत्पादन इकाइयां स्थापित करने की योजना बना रहा है. रक्षा साजो-सामान के अनेक मामलों के उत्पादन को लाइसेंस से पहले ही छूट दी जा चुकी है.

8. सरकार श्रम कानूनों में संशोधन की योजना बना रही है, ताकि काम के घंटों को लचीला बनाया जा सके और प्रशिक्षुओं को लिया जा सके. मजदूरों की कॉलोनी के लिए कर रियायतों का प्रस्ताव है.

9. निवेश प्रोत्साहन के लिए सक्रिय एजेंसी इन्वेस्ट इंडिया के साथ एक टीम काम करेगी जो निवेशकों को ऑनलाइन सूचना मुहैया कराएगी और अधिकारियों के साथ बैठक करवाएगी.

10. विशेष रेल, इन्फ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं के निर्माण, संचालन और रख-रखाव के लिए शत-प्रतिशत विदेशी निवेश के दरवाजे खोल दिए गए हैं. इनकी मंजूरी स्वतः मिल जाएगी.
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