scorecardresearch

धर्म या अपराध के अड्डे!

राम जानकी मठ के महंत की हत्या ने बिहार के मठों में चलने वाले खूनी संघर्ष को फिर किया उजागर. मठ अब धार्मिक प्रचार केंद्र की बजाय अपराध के अड्डे बन गए हैं.

अपडेटेड 11 अगस्त , 2014
एक अज्ञात महिला ने जमीन का संभावित खरीदार बनकर राम जानकी मठ के महंत शशिभूषण दास को कई बार फोन किया. मठ के पास मुजफ्फरपुर जिले में करीब 50 करोड़ रु. की जमीन है. उसने जमीन का अग्रिम भुगतान करने का वादा भी किया. 26 जून को अपने भतीजे से चल रहे जायदाद संबंधी विवाद मामले में हाजीपुर के एसडीएम ऑफिस में पेश होने के बाद शशिभूषण अपनी गाड़ी से वापस मुजफ्फरपुर की ओर बढ़े. उस महिला के कहे अनुसार वे निर्धारित जगह पहुंचे, लेकिन फोन करने पर महिला का फोन स्विच ऑफ मिला. करीब एक घंटे के इंतजार के बाद शशिभूषण ने अपनी सफेद स्कॉर्पियो थोड़े सुनसान रहने वाले बेलसर-मुजफ्फरपुर रोड की ओर मोड़ दी. इसी रास्ते में बाइक सवार तीन लोगों ने उनकी गाड़ी रोकी और गोली मारकर हत्या कर दी. पुलिस को हत्यारों का कोई सुराग नहीं मिला है.

1993 में शशिभूषण को अपने पूर्ववर्ती महंत और रिश्तेदार अखिलेश दास की हत्या के बाद महंत की पदवी मिली और मठ उनके नियंत्रण में आया था. दिलचस्प कि उस हत्या का अभियुक्त शशिभूषण को भी बनाया गया. उनकी गिरफ्तारी भी हुई थी, लेकिन सबूत के अभाव में उनका कुछ नहीं हो पाया. अब इतिहास खुद को दोहराता दिख रहा है. शशिभूषण से रंजिश रखने वाले भतीजे राकेश सिंह को उनकी हत्या का अभियुक्त बनाया गया है और उसने महंत पद की दावेदारी ठोकी है. इसके दूसरे दावेदार मुकेश सिंह शशिभूषण के वफादार हैं और हत्या के वक्त उनके साथ थे. पुलिस ने उन्हें भी संदिग्ध माना है. इस घटना से बिहार के मंदिरों और मठों की गंदी राजनीति फिर उजागर हुई है, जिनके पास करोड़ों रुपए की प्रॉपर्टी है. शशिभूषण को 2005 में सामाजिक कार्यकर्ता चंद्रेश्वर सिंह चंद की हत्या का मुख्य अभियुक्त भी बनाया गया था. चंद्रेश्वर मठ की जमीन बेचने के खिलाफ अभियान चला रहे थे.

बिहार में 4,500 से ज्यादा मठ हैं और ज्यादातर का संचालन अवैध लोग कर रहे हैं. इनमें से अधिकतर दान में दी गई जमीन पर बने और इनसे धार्मिक कामों की उम्मीद की गई. लेकिन ये जायदाद विवाद में खूनी जंग में तब्दील हो गए. कई महंतों ने वर्चस्व के लिए अपराधियों को पाला और आपराधिक गतिविधियों में लिप्त पाए गए. ये अवैध जमीन सौदों के केंद्र बन गए. बिहार पहले से ही जमीन-जायदाद संबंधी सर्वाधिक हत्याओं के लिए कुख्यात है. नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो के नए आंकड़ों से एक बार फिर इसकी पुष्टि होती है. देश में 2013 में हुई प्रॉपर्टी संबंधी कुल 2,785 हत्या में से 822 सिर्फ बिहार में हुई. पिछले एक दशक में राज्य में रियल एस्टेट की कीमतों में 500 फीसदी से ज्यादा की बढोतरी हुई है. इससे जमीन के लिए संघर्ष और बढ़ा है. पटना विश्वविद्यालय के समाजशास्त्र विभाग के पूर्व अध्यक्ष हेतुकर झा कहते हैं, ''मठों की लड़ाई तो जमीन हड़पो अभियान का एक छोटा हिस्सा भर है. ''

धार्मिक ट्रस्टों के लिए बिहार राज्य बोर्ड (बीएसबीआरटी) के प्रशासक किशोर कुणाल बताते हैं, ''इन मठों पर धूर्त लोगों का कब्जा हो गया है. कई महंतों की आपराधिक पृष्ठभूमि है. '' मठों को जायदाद बेचने से रोकने लिए कदम उठा चुका ट्रस्ट मठों में व्यवस्था ठीक करने में नाममात्र ही सफल हुआ है.
राम जानकी मठ का प्रवेश द्वार
राज्य के महंत 1,000 से ज्यादा दीवानी मुकदमे लड़ रहे हैं. कई महंत उत्तराधिकार की जंग में मारे गए. 2011 में पटना के उदासीन मठ के महंत रामदास राय और फिर तरुण दास रहस्यमय तरीके से मरे पाए गए. 100 करोड़ रु. से ज्यादा की प्रॉपर्टी वाला फतुहा का कबीर मठ भी छह महंतों की हत्या देख चुका है. मार्च, 2010 में औरंगाबाद के देवकुंड मठ के महंत अखिलेश्वरानंद पुरी की हत्या कर दी गई थी. वहीं गोपालगंज के माधोपुर मठ के महंत भिखारी सिंह, सीवान के धानुती मठ के महंत गुरु गोस्वामी और भागलपुर के सुल्तानगंज के उदासीन संगत मठ के महंत हरिकिशन दास पर हत्या की साजिश का आरोप है.1981 में गोपालगंज के डीएम एम.पी.एन. शर्मा की हत्या की साजिश रचने वाले संत ज्ञानेश्वर की 2006 में इलाहाबाद में हत्या कर दी गई थी. अगस्त, 2011 में नवादा मठ में एक युवती की बलात्कार के बाद हत्या कर दी गई थी. तो अगस्त, 2012 में भागलपुर मठ के महंत और उनके सहयोगियों पर दो बहनों से गैंग रेप का आरोप लगा. साफ है कि महंत किस तरह अपराधों में लिप्त रहे हैं.

राम जानकी मठ के पुजारी शिवनाथ पांडे बताते हैं, ''शशिभूषण के तीन भतीजे मठ पर कब्जा करना चाहते थे. कुछ चेले भी इसी फिराक में थे. उनका मैनेजर अब उन 35 दुकानों से किराया वसूल सकता है जिन्हें उन्होंने मठ की जमीन पर बनवाया था. '' पुलिस के अनुसार शशिभूषण ने अपने बैंक खाते से 10 लाख रु. निकाले थे और एक प्रस्तावित जमीन सौदे के लिए उन्हें 15 लाख रु. अग्रिम तौर पर मिले थे. यह सारी रकम गायब है. वे नई स्कॉर्पियो चला रहे थे उसका रजिस्ट्रेशन एक औरत के नाम से है. बताया जाता है कि उन्होंने अपनी एक महिला मित्र को एक छोटा शॉपिंग कॉम्प्लेक्स और एक फ्लैट उपहार में दिया था. वे पूरी जिंदगी कई चीजों पर कब्जे के लिए लड़ाई में उलझे रहे. अब मोरपंखों से सजे उनके बेडरूम समेत सभी चीजें उनसे रंजिश रखने वाले भतीजों के कब्जे में हैं.
Advertisement
Advertisement