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बुलंदी की ओर नए दौर के देवता श्री सत्य साईं बाबा का आध्यात्मिक साम्राज्य

तीन साल पहले श्री सत्य साईं बाबा की मृत्यु के बाद उनका मिशन उत्तराधिकार के लिए आंतरिक संघर्ष और साख के संकट से गुजर रहा था. पर अब संकटों से उबरकर नई बुलंदी की ओर.

अपडेटेड 28 जुलाई , 2014
तड़के साढ़े चार बजे हैं. स्त्री, पुरुष और बच्चे एक लंबी-सी कतार में अनुशासित खड़े हैं. सब हाथ जोड़े एक विशाल हॉल में पहुंचते हैं और फर्श पर अलग-अलग कतारों में एकदम शांत बैठ जाते हैं. सामने एक सफेद परदा है. पूरा हॉल भजन और वेदों के मंत्रोच्चार से गूंज उठता है. चार घंटे के इंतजार के बाद जब सफेद परदा हटता है तो पीछे सफेद संगमरमर की एक समाधि दिखाई पड़ती है. कुछ लोग सफेद संगमरमर की समाधि को छूकर प्रार्थना करते हैं और कुछ वैसे ही. यह श्री सत्य साईं बाबा की महासमाधि है और भक्तगण यहां उनका आशीर्वाद लेने के लिए जुटे हैं.

अभी बहुत लंबा समय नहीं बीता है, जब वे सशरीर यहां एक ऊंचे सिंहासन पर विराजित होकर भक्तों को दर्शन और आशीर्वाद दिया करते थे. उनका सिंहासन आज भी समाधि के बगल में रखा हुआ है. इसी सिंहासन पर बैठकर वे विभिन्न ट्रस्टों, शिक्षा और मेडिकल संस्थानों के विशाल साम्राज्य की निर्विवाद देखरेख किया करते थे. अब वे नहीं हैं तो पांच दशकों में उनकी बनाई संस्थाओं का विशाल नेटवर्क पहले की ही तरह फल-फूल रहा है. अब इन संस्थाओं का संचालन श्री सत्य साईं सेंट्रल ट्रस्ट (एसएसएससीटी) के ताकतवर पदाधिकारियों का एक समूह करता है.

साईं बाबा के बाद उनके साम्राज्य के कुशल संचालन का पूरा श्रेय इसी ट्रस्ट को जाता है. यह  ट्रस्ट का ही कमाल है, जो अपने करिश्माई धर्मगुरु की अनुपस्थिति में भी भक्तों की दैनिक प्रार्थना से लेकर तमाम संस्थाओं और संपत्तियों के कुशल प्रबंधन का काम संभाल रहा है. हालांकि देश के पूर्व मुख्य न्यायाधीश 93 वर्षीय पी.एन. भगवती अपनी बढ़ती उम्र का हवाला देकर पिछले साल अक्तूबर में ट्रस्ट में अपनी सक्रिय भूमिका से हट गए हैं और जे.वी.वी. शेट्टी भी स्वास्थ्यगत कारणों से अलग हो गए हैं.

साईं बाबा के साम्राज्य का प्रबंधनदिसंबर में न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) ए.पी. मिश्र और अर्थशास्त्री विजय केलकर को ट्रस्ट के सदस्यों में शामिल करके इस सर्वोच्च संस्था में सदस्यों की संख्या नौ बनाए रखी गई है. ट्रस्ट की बैठक महीने में एक बार होती है. यही ट्रस्ट श्री सत्य साईं इंस्टीट्यूट ऑफ हायर लर्निंग (एसएसएसआइएचएल) और दूसरे ट्रस्टों की देखरेख करता है. हालांकि ये सभी संस्थाएं अपने संसाधन खुद जुटाती हैं और उनका कामकाज भी बिल्कुल स्वतंत्र है.

केंद्रीय ट्रस्ट की संपत्तियां और निवेश ही 1523.25 करोड़ रु. का है. 2012-13 में ट्रस्ट की आमदनी 165.95 करोड़ रु. और खर्च 112.09 करोड़ रु. था. साईं साम्राज्य की संपत्तियों का कुल मूल्य कभी आंका नहीं गया क्योंकि ज्यादातर संपत्ति जमीन, इमारत और उपकरणों के रूप में है. संयुक्त राष्ट्र औद्योगिक विकास संगठन के पूर्व सलाहकार तथा अब एसएसएसआइएचएल में बिजनेस के प्राध्यापक ए. अनंतरामन कहते हैं, ''इनमें से किसी संपत्ति से कोई आमदनी नहीं होती.

इन संपत्तियों के मौजूदा मूल्य से भविष्य में कोई नकदी आने की संभावना शून्य है क्योंकि हमारी ज्यादातर सेवाएं बिल्कुल मुफ्त हैं. कई राज्यों में श्री सत्य साईं ट्रस्ट हैं, लेकिन बिहार, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश और पंजाब में ही एसएसएससीटी ट्रस्टियों को नामित करता है. साईं मिशन हालांकि 123 देशों में है, लेकिन देश के बाहर कोई संपत्ति नहीं है. एसएसएससीटी ने धर्मगुरु के न रहने पर साख के संकट से निबटने के लिए पारदर्शिता को अपना औजार बनाया.

इसके एक ट्रस्टी सीआइआइ के पूर्व प्रमुख 75 वर्षीय वी. श्रीनिवासन कहते हैं, ''हमें यह एहसास हुआ कि भक्तों का भरोसा बनाए रखने का एकमात्र तरीका यही है कि सारे क्रियाकलापों में पूरी तरह पारदर्शिता अपनाई जाए. हमने आंतरिक ऑडिट और एक निश्चित अंतराल पर रिपोर्ट जारी करने की प्रक्रिया शुरू कर दी.

इसके अलावा हम ठेके पर मूल्यांकन और अन्य प्रक्रियाएं दूसरे को देने जा रहे हैं. हम नकद चंदा भी नहीं लेते.” साईं बाबा से पहली दफा 1998 में मिलने वाले सुप्रीम कोर्ट के वकील 56 वर्षीय एस.एस. नागनंद कहते हैं, ''हम सभी एसएसएससीटी के ट्रस्टियों ने ट्रस्ट का संचालन पारदर्शी और प्रोफेशनल ढंग से करके अपने आलोचकों का मुंह बंद कर दिया है.”

अधिकारियों की नियुक्ति के लिए यह ट्रस्ट अपने प्रोफेशनल लोगों के साथ-साथ बाहर के प्रोफेशनल्स को भी आमंत्रित करता है. एसएसएसआइएचएल के रजिस्ट्रार 50 वर्षीय नरेन रामजी और परीक्षा नियंत्रक 54 वर्षीय जी.एस. श्रीरंगराजन दोनों ही इस विश्वविद्यालय के छात्र रह चुके हैं.

इसके प्रमुख कैंपस के निदेशक, 54 वर्षीय राधाकृष्णन नायर एचआर प्रोफेशनल हैं, जो पहले टाटा समूह के साथ काम कर चुके हैं. 2003 के बाद से इस विश्वविद्यालय में लगातार हर साल पांच महीने बिताने वाले कोपेनहेगन बिजनेस स्कूल के 78 वर्षीय पीटर प्रुजान कहते हैं, ''साईं बाबा में अद्भुत सांगठनिक क्षमता थी. वे समग्र शिक्षा पर जोर देते थे, जिससे छात्रों का अकादमिक ही नहीं, बल्कि कलात्मक और सांस्कृतिक विकास भी होता रहा है.”

यहां नई टेक्नोलॉजी और आधुनिक कार्यपद्धति को अपनाने की विशेष पहल भी की गई है. श्रीनिवासन कहते हैं, ''हम साईं बाबा की शिक्षाओं के प्रचार-प्रसार के लिए कुशल कम्युनिकेशन नेटवर्क, टेलीमेडिसिन सेंटर और वेब के जरिए पढ़ाई पर जोर दे रहे हैं.” लेकिन साईं मिशन की पहली प्राथमिकता जनकल्याणकारी कार्य है. एसएसएसआइएचएल ने 2012 में अपने चौथे कैंपस का उद्घाटन किया और 2013 में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर एडवांस्ड रिसर्च की नींव रखी गई.

साईं बाबा ने 1996 में अनंतपुर जलापूर्ति परियोजना की शुरुआत की थी, जिससे अब तक 731 गांवों में जलापूर्ति होती रही है. अब इस परियोजना के जरिए 75 और गांवों को पानी की आपूर्ति की जाती है. एसएसएससीटी ने 2013 में प्राकृतिक विभीषिका के बाद ओडिसा और उत्तराखंड में आपदा राहत आवास परियोजना चलाने में मदद की थी. ट्रस्ट ने मोबाइल हॉस्पिटल नेटवर्क का चार राज्यों तक विस्तार कर दिया है.

पुट्टपर्थी और बंगलुरू के दो अस्पतालों में अत्याधुनिक उपकरण लगाए गए हैं और शोध की सुविधाएं तैयार की गई हैं. इसके अलावा इन अस्पतालों से पश्चिम बंगाल और ओडिसा तक टेली हेल्थ कंसल्टेशन की सुविधा का भी विस्तार किया गया है. एसएसएससीटी ने अपने मानव सेवा कार्यों को विस्तार देने के लिए कंपनियों के साथ सीएसआर (कॉर्पोरेट सोशल रेस्पांसबिलिटी) समझौते किए हैं. ट्रस्ट ने चार महीने पहले यह पहल की थी.

आंध्र प्रदेश में अनंतपुर के पुट्टपर्थी में स्थित प्रशांति निलयम के मुख्यालय में साईं के भक्त हर वक्त उनकी 'आध्यात्मिक उपस्थिति’ की बातें करते हैं. वहां 4,563 लोग चौबीसों घंटे काम पर लगे होते हैं. उनमें से 1,268 लोग अस्पताल चलाते हैं, जबकि 1,263 लोग स्कूल और 442 लोग सामाजिक सेवाओं और महासमाधि के दर्शनार्थियों की व्यवस्था देखते हैं. इनका संचालन किसी बिना मुनाफे वाले कारोबार की तरह किया जाता है.

सेवा दल के करीब 1,590 स्वयंसेवक हर राज्य से हर महीने बारी-बारी से पुट्टपर्थी में अपनी सेवाएं देने के लिए आते हैं. यहां साईं की मृत्यु के बाद आने वालों की संख्या घटी नहीं है. यहां उत्सवों और विशेष आयोजनों में करीब 40,000 लोग पहुंचते हैं. सबसे बड़ा आयोजन नवंबर में साईं के जन्मदिन पर होता है, जब यहां हफ्ते भर का कार्यक्रम होता है. उसी समय एसएसएसआइएचएल का वार्षिक समारोह होता है, जिसमें आध्यात्मिक कुलाधिपति का खाली सिंहासन महासमाधि के पास रखा होता है.

एसएसएसआइएचएल के पूर्व छात्र और अब रेडियो साईं के कंटेंट मैनेजर 51 वर्षीय करुणा स्वरूप मुंशी कहते हैं, ''बाबा की दूरदर्शिता में सांगठनिक और सांस्थानिक मामले भी अहम थे. श्री सत्य साईं संगठन की पुख्ता व्यवस्था इसका प्रमाण है.” हालांकि रेडियो का संचालन पुट्टपर्थी से होता है, लेकिन यह आइओएस और एंड्रॉएड फोन के जरिए दुनिया भर में पहुंचता है. यह प्रति दिन प्रशांत निलयम से सुबह और शाम की प्रार्थनाओं का तीन घंटे तक सीधा प्रसारण करता है. समय-समय पर उत्सवों और विशेष आयोजनों का भी प्रसारण किया जाता है.

साईं बाबा का स्पर्श जिसके भी जीवन में हुआ है, उन सबको आस्था एक करती है. हरियाणा काडर के आइएएस अफसर और हैफेड के प्रबंध निदेशक 58 वर्षीय अशोक यादव की साईं बाबा से पहली मुलाकात 1982 में दिल्ली में न्यायमूर्ति भगवती के घर पर हुई थी. तब वे पंजाब विश्वविद्यालय में कानून की पढ़ाई कर रहे थे.

वे कहते हैं, ''बाबा की शख्सियत इतनी करिश्माई थी कि पहली ही नजर में कोई भी उनका भक्त हो जाता था. उसके बाद वह साईं की सेवा पर आधारित जीवन दर्शन में रम जाता था.” वह करिश्माई शख्सियत अब भले ही न हो, लेकिन उनका मिशन बदस्तूर कायम है और लोगों की आस्था भी बढ़ती जा रही है.   
साईं बाबा का आध्यात्मिक साम्राज्य

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