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मुंबई में यहां बनते हैं धारावाहिक

कैलाश पर्वत, राजस्थान का मनभावन गांव या मुंबई का भव्य मकान. टेलीविजन इंडस्ट्री के नए ठिकाने नैगांव में कोई भी नजारा आसानी से तैयार किया जा सकता है.

अपडेटेड 14 जुलाई , 2014
अभिनेत्री सुहासी धामी को गोरेगांव के अपने घर से नैगांव ईस्ट के मालजीपाड़ा में रामदेव फिल्म सिटी पहुंचने में 40 मिनट लगे हैं. वहां वे लाइफ ओके के लोकप्रिय शो देवों के देव...महादेव की शूटिंग कर रही हैं. उन्हें आज नीले रंग के परदे के आगे चट्टान पर बैठकर और पैर पर पैर रखे हुए ‘ओम नमः शिवाय’ का जाप करना है. पार्वती की भूमिका करने वाली धामी 100×80 फुट के स्टुडियो में तैयार किए गए कैलाश पर्वत पर एकदम अकेली बैठी हैं.

नैगांव में ही राजस्थान के गांव जैतसर (कलर्स चैनल पर बालिका वधू), वाराणसी (ज़ी टीवी पर सपने सुहाने लड़़कपन के), अकबर का महल (बिग मैजिक पर हर मुश्किल का हल अकबर बीरबल), एक काल्पनिक जगह (लाइफ ओके पर द एडवेंचर्स ऑफ हातिम) और दक्षिण मुंबई का शानदार मकान (ज़ी टीवी पर आने वाले सीरियल जमाई राजा) का मॉडल बनाया गया है. यह टीवी प्रोड्यूसर्स की जन्नत नैगांव है.

मुंबई के ठाणे जिले का यह उत्तरी उपनगर पिछले पांच साल में टीवी निर्माताओं का पसंदीदा ठिकाना बन गया है. आशुतोष गोवारीकर की इस साल के आखिर में स्टार प्लस पर प्रसारित होने वाली सीरीज एवरेस्ट की शूटिंग नैगांव में ही हो रही है. सोनी के लोकप्रिय क्राइम शो सीआइडी और क्राइम पेट्रोल के निर्माण से जुड़़े लोगों को जब बीहड़ जंगल या हरे-भरे फार्म की जरूरत होती है, तो वे यहीं आते हैं.

यह जगह सिर्फ टीवी इंडस्ट्री के लिए ही पसंदीदा ठिकाना नहीं है. धर्मा प्रोडक्शन की फिल्म हम्प्टी शर्मा की दुलहनिया के लिए जब ढाबे की खोज मची तो नैगांव में मन-मुताबिक लोकेशन मिल गई. कभी गौशालाओं और मुंबई-अहमदाबाद हाइवे एनएच-8 पर सफर करने वालों के लिए खाने-पीने की जगह भजन संस डेयरी फार्म के लिए मशहूर नैगांव अब गोरेगांव ईस्ट में फिल्म सिटी और अंधेरी ईस्ट के स्टुडियो को कड़ी चुनौती दे रहा है.

मुंबई में यहां सीरियल बनते हैंछह साल पहले जब बालिका वधू का प्रोडक्शन हाउस स्फेयरओरिजिंस मुंबई में राजस्थान का नजारा तैयार करने के लिए सबसे पहले यहां आया था तो ऐसा कुछ भी नहीं था. शो के प्रोड्यूसर संजय वाधवा कहते हैं, “हम मुंबई में ही अपनी पसंद की जगह तलाश रहे थे. लेकिन बात नहीं बन पा रही थी.” मलाड वेस्ट के मड आइलैंड में बंगले, गोरेगांव ईस्ट की फिल्म सिटी और संक्रमण स्टुडियो, कांदिवली वेस्ट और चांदीवली तथा अंधेरी ईस्ट के आसपास के स्टुडियो टीवी प्रोड्यूसर्स के मनपंसद ठिकाने थे. लेकिन मनोरंजन चैनलों की संख्या और धारावाहिकों की लोकप्रियता बढऩे की वजह से नई जगहों की जरूरत महसूस की जाने लगी.

वाधवा को नैगांव के कमन गांव में बने मैग्नम स्टुडियो में पसंद की जगह मिल गई. वे कहते हैं, “वहां हम जो चाहे, कर सकते थे.” शो के एग्जिक्यूटिव प्रोड्यूसर शेख जाकिर सलाम कहते हैं कि 2008 में जब वे अपनी टीम के साथ पहली बार यहां आए तो हर तरफ गौशालाएं और फार्म दिखाई देते थे. भारतीय टेलीविजन पर दूसरा सबसे लंबा चलने वाला धारावाहिक बालिका वधू स्टुडियो की 13 मंजिलों में से सात मंजिलों पर कब्जा जमाए हुए है.

इनमें से दो मंजिलों का इस्तेमाल गोदाम के तौर पर किया जाता है, जिनमें कपड़े और अन्य सामान रखा जाता है. सलाम कहते हैं कि नैगांव का सबसे बड़ा आकर्षण है यहां तरह-तरह के आउटडोर लोकेशंस की भरमार. वे बताते हैं, “आपको झील, झ्रना, खेत, पहाड़, मंदिर जो भी चाहिए, सब यहां मिल जाएगा. अगर नैगांव न होता तो बालिका वधू वैसा नहीं बन पाता जैसा यह आज है.”

बालिका वधू की कामयाबी की वजह से नैगांव दूसरे निर्माताओं की नजर में आ गया. जय प्रोडक्शन (रब से सोणा इश्क), हैट्स ऑफ प्रोडक्शंस (बहनें, ब्याह हमारी बहू का, मिसेज तेंडुलकर), स्वास्तिक पिक्चर्स (मान रहे तेरा पिता) और शाकुंतलम टेलीफिल्म्स (गुनाहों का देवता) ने अपने सेट यहीं बनाए.

दिसंबर 2011 से प्रसारित हो रहे देवों के देव...महादेव के प्रोडक्शन हेड संजय शर्मा कहते हैं, “यहां बहुत शांतिपूर्ण माहौल है. यह जगह शहर के शोर-शराबे से बिल्कुल दूर है. यहां भीड़-भाड़ नहीं है, यह साफ-सुथरी और हरियाली से लदी हुई है.”

धारावाहिकों की बाढ़ आने से रोजगार के अवसर भी काफी बढ़ गए हैं. सलाम को जब टेरेस की जरूरत हुई तो कमन गांव में किराने की एक दुकान के 35 वर्षीय मालिक सोहन बनवरलाल गोयल की जानकारी बहुत काम आई. गोयल इस समय नैगांव में लोकेशन बताने वालों में सबसे व्यस्त व्यक्ति बन गए हैं और इसके लिए विरार-वसई महानगरपालिका और वालिव पुलिस स्टेशन से जरूरी मंजूरी भी दिलाते हैं.

वे कहते हैं, “शूरू में बड़ा रोमांच होता था क्योंकि स्थानीय लोगों को लगा कि इसमें बहुत पैसा है. लेकिन उन्हें मालूम नहीं था कि सेट पर काम करने के लिए एलाइड मजदूर यूनियन (जो लाइटमैन, सेट बनाने वालों और स्पॉट ब्वायज का प्रतिनिधित्व करता है) का सदस्य बनना पड़ता है.” गोयल के पास अब आठ दुकानें हैं.

धीरे-धीरे यहां के लोगों को इंडस्ट्री की जानकारी हो गई और उन्होंने उसकी जरूरतों को ध्यान में रखकर अपना धंधा शुरू कर दिया, जैसे कैटरिंग (मॉम्स और सिद्धिविनायक), जेनरेटर उपलब्ध कराना (एमडी पावर), धारावाहिक के सामान की दुकानें (लक्ष्मी गोपाल प्रॉपर्टी वाला) और ट्रांसपोर्ट की व्यवस्था.
बालिका वधू के गोदाम का इस्तेमाल कॉस्ट्यूम और सामान रखने के लिए
(बालिका वधू के गोदाम का इस्तेमाल कॉस्ट्यूम और सामान रखने के लिए होता है)

चोवारीवाला ट्रांसपोर्ट चलाने वाले 30 वर्षीय संजय मौर्य ने 2004 में दो टैंपो के साथ अपना कारोबार शुरू किया था, लेकिन अब उनके पास 24 गाडिय़ां हैं जो धारावाहिक में काम आने वाले जरूरी सामान, लाइट और कैमरा आदि को एक लोकेशन से दूसरे लोकेशन तक पहुंचाने का काम करती हैं.

2011 में उन्होंने प्रोडक्शन हाउसों का खर्च बचाने के लिए वैनिटी वैन शुरू की. मौर्य कहते हैं कि मुंबई में दूसरी जगहों के मुकाबले नैगांव टीवी प्रोड्यूसरों और चैनलों के लिए कम खर्चीली जगह है. वे कहते हैं, “यहां फ्लोर के रेट पचास फीसदी से भी कम हैं. यहां शूटिंग के सामान पर किसी तरह की चुंगी भी नहीं है.”

यहां से नजदीक वसई, विरार और मीरा रोड में बहुत-से टेक्नीशियन और स्पॉट बॉय रहते हैं, जिनसे बहुत मदद मिलती है. लाइफ ओके के शो द एडवेंचर ऑफ हातिम और देवों के देव...महादेव जैसे धारावाहिकों के निर्माण से जुड़े दूर-दराज के इलाकों में रहने वाले लोगों ने अब स्टार सिटी के अपार्टमेंट्स में किराए पर रहना शुरू कर दिया है. स्टार सिटी नैगांव रेलवे स्टेशन के पास है.

नैगांव कर्मचारियों के लिए भले ही सहूलियत वाली जगह हो लेकिन कलाकारों के लिए यह आकर्षक जगह कतई नहीं. वजहः यहां मनोरंजन के लिए कुछ खास नहीं है. सपने सुहाने लड़कपन के में गुंजन की भूमिका निभाने वाली रूपल त्यागी की शिकायत है कि नैगांव में खाने-पीने के साफ-सुथरे रेस्तरां नहीं हैं. उन्होंने ग्रीन रूम (शूटिंग के लिए तैयार होने की जगह) की दीवारें गारफील्ड के पोस्टरों से सजाई हैं, जैसे कह रही हों, “मेरे कमरे में स्वागत है.

आप जाएंगे कब?” उन्होंने अपने कमरे में छोटा-सा फ्रिज और माइक्रोवेव रख लिया है, जिससे खाने-पीने का इंतजाम वे खुद रखती हैं. वे कहती हैं, “यहां कोई भी आने की हिम्मत नहीं करता. मेरे दोस्त तीन साल में सिर्फ दो बार ही मुझसे मिलने आए हैं. यहां जिम और सैलून जैसी जरूरी चीजों की बहुत जरूरत है. शूटिंग के बीच समय मिलने पर कलाकारों को समय बिताने के लिए यहां कुछ भी नहीं है.”

बालिका वधू में आनंदी की भूमिका निभाने वाली तोरल रसपुत्र दृश्यों के बीच समय मिलने पर अपने कमरे में सोना पसंद करती हैं. उनकी भी रूपाली जैसी शिकायत है. माटुंगा में रहने वाली तोरल को यहां आने में एक घंटा लगता है और वे कई बार पूरे वीकेंड शूटिंग करती हैं. उनके शब्दों में, “अगर हमारे बस में होता तो मैं यहां मॉल बना देती. यहां काम खत्म करके जब मैं वापस घर पहुंचती हूं तो मुंबई में सब कुछ बंद हो चुका होता है.”

बालिका वधू में जग्या का रोल कर रहे तोरल के सहकर्मी शशांक व्यास नैगांव में रहते हैं. 2010-11 में हर रोज 14-16 घंटे शूटिंग की वजह से शशांक ने पिछले डेढ़ साल से यहीं पर रहना शुरू कर दिया है. पहले वे सांता क्रूज में रहते थे, जहां से आने में उन्हें काफी समय लगता था. वे कहते हैं, “मुझे यहां अच्छा खाना नहीं मिल पाता था और दलिया या कॉर्नफ्लैक्स खाकर पेट भरना पड़ता था. यहां अच्छे रेस्तरां नहीं हैं. यह अच्छा फैसला था. मैंने काफी पैसा बचाया और उसे निवेश किया.”
रामदेव फिल्म सिटी में द एडवेंचर्स ऑफ हातिम के सेट पर जूनियर आर्टिस्ट
(रामदेव फिल्म सिटी में द एडवेंचर्स ऑफ हातिम के सेट पर जूनियर आर्टिस्ट)

नैगांव इंडस्ट्री की जरूरतों के हिसाब से विकसित होने में लगा है, लेकिन यहां अभी कई समस्याएं हैं. शुक्रवार का दिन श्बिना बिजली के दिन्य के तौर पर जाना जाता है. बिजली की कटौती आम बात है. हर तीन-चार घंटे पर बिजली गुल हो जाती है. सड़कों पर लाइट की व्यवस्था नहीं है, जिससे सुरक्षा बड़ा मुद्दा है, खासकर महिलाओं के लिए. यहां सार्वजनिक परिवहन की भी व्यवस्था नहीं है, जिसकी वजह से ऑटो वाले थोड़ी दूरी के लिए भी ज्यादा पैसा वसूलते हैं.

कुछ विकास भी हुआ है. नैगांव ईस्ट के परेरा नगर में कई आवासीय इमारतें बन गई हैं. सड़कों पर वाहनों की संख्या बढ़ गई है क्योंकि ऑटो और बसें कर्मचारियों को रेलवे स्टेशन से सेटों तक पहुंचाती हैं. नैगांव में तीन-सितारा होटल हैं, जिनमें स्विमिंग पूल बने हुए हैं. गोयल कहते हैं, “छह साल पहले 10,000 वर्ग फुट की संपत्ति की कीमत सिर्फ एक लाख रु. थी, जो अब 10 लाख रु. हो गई है.”

कभी आशंकित रहने वाले स्थानीय लोगों ने अब नए पड़ोसियों का स्वागत करना शुरू कर दिया है. संजय शर्मा कहते हैं, “शुरू में यहां काफी दादागीरी थी. लेकिन अब वे दोस्त बन गए हैं. अगर मुझे कोई समस्या हुई तो कम से कम 100 लोग मदद के लिए जुट जाएंगे.”

नैगांव को अपनी विरासत पर गर्व है. इनमें से एक है भजन संस डेयरी फार्म, जिसमें 2,000 भैंसें और 50 गाएं हैं. सुहासी इसे ‘अभिशाप’ कहती हैं क्योंकि यहां की स्वादिष्ट मिठाइयां उन्हें बहुत पसंद हैं. वे कहती हैं, “यहां की आम लस्सी और मसाला मिल्क लाजवाब है. मुझे और मोहित रैना (जो देवों के देव...महादेव के नायक हैं) को यहां का गाजर का हलवा बेहद पसंद है.” शिव-पार्वती गाजर के हलवे का आनंद लें, ऐसा तो सिर्फ नैगांव में ही संभव है.
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