मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने 22 जून को कहा, ''मैं ईमानदार था. ईमानदार हूं और आगे भी मैं ईमानदार रहूंगा. '' तनावग्रस्त चौहान ने खजुराहो में बीजेपी विधायकों के प्रशिक्षण सत्र के दौरान यह टिप्पणी की. चौहान और उनकी पत्नी साधना सिंह करोड़ों रु. के मध्य प्रदेश व्यावसायिक परीक्षा मंडल (व्यापम) घोटाले पर आलोचनाओं के घेरे में हैं.
इसके एक दिन बाद चौहान ने ट्वीट कर अपनी पत्नी का आक्रामक तरीके से समर्थन किया: क्या मेरी पत्नी के 17 रिश्तेदारों का परिवहन आरक्षक परीक्षा में चयन हुआ है? एक का भी नहीं. यहां तक कि पूरे महाराष्ट्र से किसी का नहीं.
इन दिनों व्यापम घोटाले को लेकर अपने और अपनी पत्नी के बारे में चौहान को बार-बार सफाई देनी पड़ रही है.
खुद उनकी पार्टी की नेता और केंद्रीय मंत्री उमा भारती ने इसे बिहार के चारा घोटाले से भी बड़ा घोटाला बताया है. मध्य प्रदेश के गृह मंत्री बाबूलाल गौर ने इस सवाल पर कोई टिप्पणी करने से इनकार कर दिया कि इस घोटाले में कितनी घूसखोरी हुई है. उन्होंने कहा कि अभी मामले की जांच चल रही है.
चौहान के करीबी, राज्य के पूर्व मंत्री लक्ष्मीकांत शर्मा सहित 400 से ज्यादा लोगों को इस घोटाले में हाथ होने के चलते गिरफ्तार किया जा चुका है. इनमें फर्जी तरीके से एमबीबीएस कोर्स में दाखिला पाने वाले छात्र-छात्राओं और पुलिस सहित विभिन्न विभागों में नौकरी पाने वाले काफी लोग शामिल हैं. इस घोटाले में 4,000 से ज्यादा लोग शामिल हैं, जिसमें अरबों रु. का लेन-देन हुआ बताते हैं.
कई राजनेता, व्यापम के अधिकारी और दलालों ने मेडिकल कोर्सेज में दाखिला दिलाकर छात्रों से खूब पैसा कमाया. कई बेरोजगार नौजवानों ने फर्जी तरीके से पुलिस विभाग में कांस्टेबल, सब इंस्पेक्टर बनने के लिए भारी रकम चुकाई. चौहान ने विधानसभा में पिछले महीने स्वीकार किया था कि 1,000 से ज्यादा छात्रों को प्रदेश के मेडिकल कॉलेजों में फर्जी तरीके से दाखिला दिलाया गया. चौहान ने सीबीआइ जांच से बचने के लिए इस मामले की जांच मध्य प्रदेश की स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) को सौंप दी.
घोटाले की जांच की आंच मुख्यमंत्री चौहान के दरवाजे तक पहुंच चुकी है. काफी टालमटोल के बाद एसटीएफ ने उनके पूर्व निजी सचिव (पीएस) प्रेम चंद प्रसाद और उनकी बेटी अनीता को 26 जून को पूछताछ के लिए समन जारी किया. अनीता को कथित रूप से गलत तरीके से एमबीबीएस कोर्स में दाखिला मिला. हालांकि, इन दोनों ने अदालत से अग्रिम जमानत हासिल कर ली है.
सूत्रों के मुताबिक, प्रेम ने व्यापम के पूर्व सीनियर सिस्टम एनालिस्ट नितिन महिंद्रा और व्यापम के पूर्व परीक्षा नियंत्रक पंकज त्रिवेदी (दोनों जेल में) को मुख्यमंत्री आवास से फोन कर अनीता को 2012 में प्री मेडिकल टेस्ट (पीएमटी) पास करने में मदद करने को कहा था. घोटाले में नाम आते ही चौहान ने प्रेम को मुख्यमंत्री आवास से निकाल बाहर किया.
मध्य प्रदेश कांग्रेस के प्रवक्ता के.के. मिश्र ने दावा किया है कि विभिन्न परीक्षाओं में अभ्यर्थियों को फायदा पहुंचाने के लिए व्यापम के शीर्ष अधिकारियों को मुख्यमंत्री आवास से 139 से ज्यादा फोन किए गए. उनका आरोप है कि एसटीएफ की जांच से ये कॉल डिटेल गायब कर दिए गए.
मिश्र का दावा है कि महाराष्ट्र के गोंदिया जिले की रहने वाली साधना सिंह के 19 रिश्तेदारों का चयन परिवहन विभाग में हुआ है. चौहान और बीजेपी इन आरोपों को आधारहीन बता रहे हैं. प्रदेश सरकार ने मिश्र के खिलाफ मानहानि का मुकदमा भी दायर कर दिया है.
कांग्रेस ही नहीं, बीजेपी के ही चौहान विरोधी लोग, जैसे कि पार्टी उपाध्यक्ष प्रभात झा, केंद्रीय मंत्री उमा भारती और गौर भी गुपचुप तरीके से इस मौके का और चौहान की कमजोर स्थिति का फायदा उठाकर खुद को मजबूत करना चाहते हैं.
सच यह भी है कि एसटीएफ की जांच ने तभी रफ्तार पकड़ी जब आरएसएस के मध्य भारत प्रांत के संघचालक और प्रभात झा के करीबीमंत हे मुक्तिबोध आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत से मिले. भागवत 25 मई को दो दिवसीय दौरे पर भोपाल आए थे.
मुक्तिबोध ने भागवत से कहा बताते हैं कि इस घोटाले में आरएसएस का नाम घसीटा जा रहा है. उन्होंने चौहान को निशाना बनाते हुए कहा कि वे राज्य में भ्रष्टाचार पर अंकुश नहीं लगा पा रहे हैं. इस पर भागवत ने चौहान को घोटाले पर सख्त रुख दिखाने का निर्देश दिया. इसके बाद जांच आगे बढ़ी. 15 जून को लक्ष्मीकांत शर्मा को गिरफ्तार कर लिया गया.
इधर, मुक्तिबोध कहते हैं कि वे भागवत से मिले जरूर थे लेकिन उनसे व्यापम घोटाले के बारे में कोई बात नहीं की थी. उन्होंने इंडिया टुडे से कहा, ''आरएसएस का और मेरा राजनीति से कोई लेना-देना नहीं है. फरवरी में एसटीएफ की जांच से यह पता चला कि आरएसएस के पूर्व प्रमुख दिवंगत के.एस. सुदर्शन के सहायक मेहर कुमार को शर्मा की सिफारिश पर ही राज्य के माप-तौल विभाग में अधिकारी बनाया गया.
इसके बाद से आरएसएस का क्षेत्रीय नेतृत्व असहज है. व्यापम ने माप-तौल विभाग में आपूर्ति अधिकारियों की भर्ती के लिए 7 अक्तूबर, 2012 को भर्ती परीक्षा आयोजित की थी जिसमें कथित तौर पर मेहर सहित 18 अभ्यर्थियों का फर्जी तरीके से चयन किया गया. प्रदेश की सत्ता में संघ के ताकतवर व्यक्ïित के रूप में उभरे मुक्तितबोध ने उपयुक्त समय पर सहजता से कदम उठाया है. राजनैतिक हलकों में कई लोगों का मानना है कि यह कदम झा के इशारे पर उठाया गया है.

उमा भारती के केंद्रीय मंत्री बनने के बाद घोटाले पर कार्रवाई के लिए चौहान पर दबाव और बढ़ गया. उन्होंने घोटाले की सीबीआइ जांच की मांग की यह भी जोड़ा कि अब चूंकि एसटीएफ जांच कर रही है, ऐसे में उसे समय दिया जाना चाहिए. उधर गृह मंत्री गौर भी चौहान के जले पर नमक छिड़क रहे हैं. उन्होंने एसटीएफ से इस मामले में कठोर कार्रवाई करने और किसी को भी नहीं बख्शने को कहा है.
प्रदेश हाइकोर्ट जांच की निगरानी कर रहा है. मंत्रिमंडल के सबसे वरिष्ठ सदस्य गौर के चौहान से ताल्लुकात अच्छे नहीं हैं. प्रधानमंत्री मोदी के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होने के लिए चौहान और उनके कई मंत्री तो विमान से दिल्ली गए थे जबकि वरिष्ठ मंत्री होने के बावजूद गौर ट्रेन से दिल्ली आए-गए. रिश्तों में खटास का यह सार्वजनिक प्रदर्र्शन था.
वैसे अब जब अपनों ने भी शिवराज को घेरने का मन बना लिया है तो ऐसे में उनकी मुश्किलें कई गुना बढ़ सकती हैं.
इसके एक दिन बाद चौहान ने ट्वीट कर अपनी पत्नी का आक्रामक तरीके से समर्थन किया: क्या मेरी पत्नी के 17 रिश्तेदारों का परिवहन आरक्षक परीक्षा में चयन हुआ है? एक का भी नहीं. यहां तक कि पूरे महाराष्ट्र से किसी का नहीं.
इन दिनों व्यापम घोटाले को लेकर अपने और अपनी पत्नी के बारे में चौहान को बार-बार सफाई देनी पड़ रही है.
खुद उनकी पार्टी की नेता और केंद्रीय मंत्री उमा भारती ने इसे बिहार के चारा घोटाले से भी बड़ा घोटाला बताया है. मध्य प्रदेश के गृह मंत्री बाबूलाल गौर ने इस सवाल पर कोई टिप्पणी करने से इनकार कर दिया कि इस घोटाले में कितनी घूसखोरी हुई है. उन्होंने कहा कि अभी मामले की जांच चल रही है.
चौहान के करीबी, राज्य के पूर्व मंत्री लक्ष्मीकांत शर्मा सहित 400 से ज्यादा लोगों को इस घोटाले में हाथ होने के चलते गिरफ्तार किया जा चुका है. इनमें फर्जी तरीके से एमबीबीएस कोर्स में दाखिला पाने वाले छात्र-छात्राओं और पुलिस सहित विभिन्न विभागों में नौकरी पाने वाले काफी लोग शामिल हैं. इस घोटाले में 4,000 से ज्यादा लोग शामिल हैं, जिसमें अरबों रु. का लेन-देन हुआ बताते हैं.
कई राजनेता, व्यापम के अधिकारी और दलालों ने मेडिकल कोर्सेज में दाखिला दिलाकर छात्रों से खूब पैसा कमाया. कई बेरोजगार नौजवानों ने फर्जी तरीके से पुलिस विभाग में कांस्टेबल, सब इंस्पेक्टर बनने के लिए भारी रकम चुकाई. चौहान ने विधानसभा में पिछले महीने स्वीकार किया था कि 1,000 से ज्यादा छात्रों को प्रदेश के मेडिकल कॉलेजों में फर्जी तरीके से दाखिला दिलाया गया. चौहान ने सीबीआइ जांच से बचने के लिए इस मामले की जांच मध्य प्रदेश की स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) को सौंप दी.
घोटाले की जांच की आंच मुख्यमंत्री चौहान के दरवाजे तक पहुंच चुकी है. काफी टालमटोल के बाद एसटीएफ ने उनके पूर्व निजी सचिव (पीएस) प्रेम चंद प्रसाद और उनकी बेटी अनीता को 26 जून को पूछताछ के लिए समन जारी किया. अनीता को कथित रूप से गलत तरीके से एमबीबीएस कोर्स में दाखिला मिला. हालांकि, इन दोनों ने अदालत से अग्रिम जमानत हासिल कर ली है.
सूत्रों के मुताबिक, प्रेम ने व्यापम के पूर्व सीनियर सिस्टम एनालिस्ट नितिन महिंद्रा और व्यापम के पूर्व परीक्षा नियंत्रक पंकज त्रिवेदी (दोनों जेल में) को मुख्यमंत्री आवास से फोन कर अनीता को 2012 में प्री मेडिकल टेस्ट (पीएमटी) पास करने में मदद करने को कहा था. घोटाले में नाम आते ही चौहान ने प्रेम को मुख्यमंत्री आवास से निकाल बाहर किया.
मध्य प्रदेश कांग्रेस के प्रवक्ता के.के. मिश्र ने दावा किया है कि विभिन्न परीक्षाओं में अभ्यर्थियों को फायदा पहुंचाने के लिए व्यापम के शीर्ष अधिकारियों को मुख्यमंत्री आवास से 139 से ज्यादा फोन किए गए. उनका आरोप है कि एसटीएफ की जांच से ये कॉल डिटेल गायब कर दिए गए.
मिश्र का दावा है कि महाराष्ट्र के गोंदिया जिले की रहने वाली साधना सिंह के 19 रिश्तेदारों का चयन परिवहन विभाग में हुआ है. चौहान और बीजेपी इन आरोपों को आधारहीन बता रहे हैं. प्रदेश सरकार ने मिश्र के खिलाफ मानहानि का मुकदमा भी दायर कर दिया है.
कांग्रेस ही नहीं, बीजेपी के ही चौहान विरोधी लोग, जैसे कि पार्टी उपाध्यक्ष प्रभात झा, केंद्रीय मंत्री उमा भारती और गौर भी गुपचुप तरीके से इस मौके का और चौहान की कमजोर स्थिति का फायदा उठाकर खुद को मजबूत करना चाहते हैं.
सच यह भी है कि एसटीएफ की जांच ने तभी रफ्तार पकड़ी जब आरएसएस के मध्य भारत प्रांत के संघचालक और प्रभात झा के करीबीमंत हे मुक्तिबोध आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत से मिले. भागवत 25 मई को दो दिवसीय दौरे पर भोपाल आए थे.
मुक्तिबोध ने भागवत से कहा बताते हैं कि इस घोटाले में आरएसएस का नाम घसीटा जा रहा है. उन्होंने चौहान को निशाना बनाते हुए कहा कि वे राज्य में भ्रष्टाचार पर अंकुश नहीं लगा पा रहे हैं. इस पर भागवत ने चौहान को घोटाले पर सख्त रुख दिखाने का निर्देश दिया. इसके बाद जांच आगे बढ़ी. 15 जून को लक्ष्मीकांत शर्मा को गिरफ्तार कर लिया गया.
इधर, मुक्तिबोध कहते हैं कि वे भागवत से मिले जरूर थे लेकिन उनसे व्यापम घोटाले के बारे में कोई बात नहीं की थी. उन्होंने इंडिया टुडे से कहा, ''आरएसएस का और मेरा राजनीति से कोई लेना-देना नहीं है. फरवरी में एसटीएफ की जांच से यह पता चला कि आरएसएस के पूर्व प्रमुख दिवंगत के.एस. सुदर्शन के सहायक मेहर कुमार को शर्मा की सिफारिश पर ही राज्य के माप-तौल विभाग में अधिकारी बनाया गया.
इसके बाद से आरएसएस का क्षेत्रीय नेतृत्व असहज है. व्यापम ने माप-तौल विभाग में आपूर्ति अधिकारियों की भर्ती के लिए 7 अक्तूबर, 2012 को भर्ती परीक्षा आयोजित की थी जिसमें कथित तौर पर मेहर सहित 18 अभ्यर्थियों का फर्जी तरीके से चयन किया गया. प्रदेश की सत्ता में संघ के ताकतवर व्यक्ïित के रूप में उभरे मुक्तितबोध ने उपयुक्त समय पर सहजता से कदम उठाया है. राजनैतिक हलकों में कई लोगों का मानना है कि यह कदम झा के इशारे पर उठाया गया है.

उमा भारती के केंद्रीय मंत्री बनने के बाद घोटाले पर कार्रवाई के लिए चौहान पर दबाव और बढ़ गया. उन्होंने घोटाले की सीबीआइ जांच की मांग की यह भी जोड़ा कि अब चूंकि एसटीएफ जांच कर रही है, ऐसे में उसे समय दिया जाना चाहिए. उधर गृह मंत्री गौर भी चौहान के जले पर नमक छिड़क रहे हैं. उन्होंने एसटीएफ से इस मामले में कठोर कार्रवाई करने और किसी को भी नहीं बख्शने को कहा है.
प्रदेश हाइकोर्ट जांच की निगरानी कर रहा है. मंत्रिमंडल के सबसे वरिष्ठ सदस्य गौर के चौहान से ताल्लुकात अच्छे नहीं हैं. प्रधानमंत्री मोदी के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होने के लिए चौहान और उनके कई मंत्री तो विमान से दिल्ली गए थे जबकि वरिष्ठ मंत्री होने के बावजूद गौर ट्रेन से दिल्ली आए-गए. रिश्तों में खटास का यह सार्वजनिक प्रदर्र्शन था.
वैसे अब जब अपनों ने भी शिवराज को घेरने का मन बना लिया है तो ऐसे में उनकी मुश्किलें कई गुना बढ़ सकती हैं.

