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अमेरिका के प्राइमरी चुनाव में ताल ठोंक रहे ये भारतीय

अमेरिका के कैलिफोर्निया में चुनाव के लिए चार भारतीय-अमेरिकी अपनी बिरादरी के दबदबे का इम्तिहान लेने की तैयारी कर रहे हैं.

अपडेटेड 9 जून , 2014
अमेरिकी राजनीति में भारतीय-अमेरिकी बिरादरी के असर और पहचान के लिए कैलिफोर्निया में 3 जून को होने वाले प्राइमरी चुनाव बेहद अहम साबित हो सकते हैं. अमेरिका में आम चुनाव के उम्मीदवार तय करने के लिए हर राज्य में अलग-अलग दिन प्राइमरी चुनाव होते हैं. कैलिफोर्निया में चार भारतीय-अमेरिकी तीन उच्च पदों की उम्मीदवारी के लिए मैदान में हैं—एक गवर्नर पद की उम्मीदवारी के लिए, तो तीन अमेरिकी हाउस ऑफ रिप्रजेंटेटिव्ज (प्रतिनिधि सभा) के दो सदस्यों की उम्मीदवारी की दौड़ में हैं. इससे तय होगा कि नवंबर के आम चुनावों में वे मैदान में होंगे या नहीं. कैलिफोर्निया की प्राइमरी प्रणाली के मुताबिक, सर्वाधिक मत पाने वाले दो प्रत्याशी आम चुनावों में मैदान में होंगे, चाहे उनका संबंध किसी भी पार्टी से क्यों न हो.

फिलहाल प्रतिनिधि सभा में एकमात्र भारतीय-अमेरिकी डेमोक्रैट सांसद 49 वर्षीय अमी बेरा के अपने सैक्रामेंटो क्षेत्र से प्राइमरी चुनाव निकाल लेने की उम्मीद है. लेकिन नवंबर के चुनावों में उन्हें अपने संभावित रिपब्लिकन प्रतिद्वंद्वी से कड़ी टक्कर मिलने की भी संभावना जताई जा रही है. इस सीट से वे 2012 के चुनावों में भी मामूली अंतर से ही जीते थे.
सिलिकॉन वैली इलाके में ओबामा सरकार के पूर्व अधिकारी 37 वर्षीय रो खन्ना जब पिछले साल प्राइमरी में मौजूदा डेमोक्रैट सांसद माइक होंडा को चुनौती देने उतरे तो उन्होंने बड़े दमखम के साथ शुरुआत की थी.
वनिला सिंह
खन्ना ने तेजी से चंदा उगाहने का कार्यक्रम शुरू किया तो उन्हें याहू की सीईओ मैरिसा मेयर, फेसबुक की सीईओ शेरिल सैंडबर्ग और वेंचर कैपिटलिस्ट विनोद खोसला जैसी उद्योग जगत की आला हस्तियों का समर्थन मिला. खन्ना कहते हैं, “मुझे सिलिकॉन वैली के आला अन्वेषकों और टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में अगुआ हस्तियों का जोरदार समर्थन मिला क्योंकि मैं अर्थव्यवस्था की प्रगति और 21वीं सदी में युवाओं को नौकरियों के लिए तैयार करने का स्पष्ट नजरिया लेकर उन तक पहुंचा था.” हाल के हफ्तों में उन्हें स्थानीय मीडिया का भी इस आधार पर समर्थन हासिल हुआ कि टेक्नोलॉजी और व्यापार के पैरोकार खन्ना खास तौर से सिलिकॉन वैली के सरोकारों को आगे बढ़ाने के मामले में 72 वर्षीय होंडा से बेहतर साबित होंगे.

लेकिन मीडिया और टेक्नोलॉजी के सीईओ का समर्थन जमीनी स्तर पर यूनियनों और पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच लोकप्रियता हासिल करने की बराबरी नहीं कर सकता. सात बार चुनाव लड़ चुके दिग्गज होंडा को राष्ट्रपति बराक ओबामा समेत कई डेमोक्रैटिक नेताओं और मजदूर यूनियनों का समर्थन हासिल है. खन्ना के प्राइमरी प्रतिद्वंद्वियों में दूसरी भारतीय-अमेरिकी, रिपब्लिकन पार्टी की 43 वर्षीया वनिला सिंह भी हैं, जो स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर और डॉक्टर हैं. खन्ना और होंडा के 3 जून को बढ़त पा लेने की उम्मीद है. वनिला को अगर रिपब्लिकन वोट मिलते हैं और होंडा को डेमोक्रैट समर्थन दे देते हैं तो खन्ना पीछे रह सकते हैं.
अमी बेरा
राज्यों में सबसे बड़े चुनाव में 40 वर्षीय नील कशकरी गवर्नर पद के लिए रिपब्लिकन उम्मीदवारी की दौड़ में हैं. उनकी ख्याति 2008 के वित्तीय संकट के दौरान टीएआरपी बैंक को संकट से निकालने वाले कार्यक्रम के प्रशासक के तौर पर रही है. कैलिफोर्निया के डेमोक्रैटिक गवर्नर जेरी ब्राउन के प्राइमरी चुनाव में सबसे ऊपर रहने और नवंबर के चुनावों में भी फिर से चुन लिए जाने की उम्मीद है लेकिन कशकरी टी पार्टी के लोकप्रिय टिम डोनेली से रिपब्लिकन उम्मीदवारी पाने की होड़ में हैं. मिट रोमनी, कोंडालीजा राइस और जेब बुश जैसे बड़े रिपब्लिकन नेताओं ने कशकरी को चुनने की अपील की है और दलील दी है कि अगर नवंबर के चुनावों के लिए डोनेली उम्मीदवारी पा जाते हैं तो उनके नस्लवादी बयानों का खामियाजा सभी रिपब्लिकन उम्मीदवारों को भुगतना पड़ेगा. कशकरी चुनाव में डोनेली से पीछे रहे हैं लेकिन आखिरी दिनों में उन्होंने कुछ बढ़त बनाई है. वे कहते हैं, “मैं हर नस्लीय समूह को रिपब्लिकन पार्टी में वापस लाने की योजना बना रहा हूं. मेरा फोकस कड़ी मेहनत के सिद्धांत, रोजगार और शिक्षा पर है. चूंकि मैं भारतीय मूल का हूं, इससे विभिन्न वोटरों के समूह तक मेरी पहुंच कुछ आसान हो जाती है.”

अमेरिका में आबादी के लिहाज से कैलिफोर्निया सबसे बड़ा राज्य है. यहां भारतीय मूल के लोगों की भी सबसे बड़ी आबादी है. यहां भारतीय मूल के लोग करीब 5 लाख हैं यानी कुल आबादी में 1.5 प्रतिशत हैं. अमेरिका के मेनलैंड में खन्ना का इलाका ही ऐसा है जहां एशियाई-अमेरिकी बहुसंख्यक हैं. भारतीय-अमेरिकियों के लिए इस राज्य में कामयाबी महत्वपूर्ण होगी. गैर-मुनाफा व्यापार समूह टीआइई (द इंडस आंट्रेप्रेन्यर्स) के पूर्व अध्यक्ष तथा पालो अल्टो में क्लियरस्टोन वेंचर पार्टनर्स के वेंचर डायरेक्टर विश मिश्र कहते हैं, “इन उम्मीदवारों ने भारतीय-अमेरिकी समुदाय में उत्साह पैदा किया है, इस बार इस समुदाय का वोटिंग सर्वाधिक रह सकता है.”

अपनी उम्मीदवारी की दौड़ में मशगूल इन उम्मीदवारों ने भारत के चुनावों में भी खासी दिलचस्पी ली है. कशकरी कहते हैं, “काफी लोगों को इस बात की उम्मीद है कि नई सरकार बेहद जरूरी आर्थिक सुधारों पर अमल करेगी.”
रो खन्ना
इनके अलावा 3 जून को प्राइमरी चुनाव में मैदान में डेमोक्रैटिक पार्टी के उपेंद्र चौधरी भी हैं. वे न्यूजर्सी से प्रतिनिधि सभा के लिए उम्मीदवारी के लिए लड़ रहे हैं. एक और भारतीय-अमेरिकी मनन त्रिवेदी 20 मई को पेनसिल्वेनिया से डेमोक्रैटिक प्राइमरी चुनाव निर्विरोध जीत गए हैं और वे नवंबर में चुनाव में प्रतिनिधि सभा के लिए मैदान में होंगे. फिलहाल अमेरिका में भारतीय मूल के लोग तो कम-से-कम चुनाव मैदान में सुस्ताने का वक्त नहीं निकाल सकते.
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