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इन गर्मियों में है मुकाबला छोटी-बड़ी फिल्मों का

बॉलीवुड बड़े बजट की फिल्में परोसने की तैयारी में है लेकिन इन गर्मियों में छोटे बजट वाले कुछ डायरेक्टर भी अपनी फिल्मों से चौंकाने को तैयार हैं.

अपडेटेड 2 जून , 2014
राइटर-डायरेक्टर नितिन कक्कड़ स्क्रंप्टियस में आराम से बैठे हैं. मुंबई के वरसोवा बीच के पास स्थित यह रेस्तरां बॉलीवुड में अपनी जगह बनाने की कोशिश में लगे लोगों का पसंदीदा अड्डा भले हो लेकिन 38 वर्षीय कक्कड़ फिल्म इंडस्ट्री में एकदम नए नहीं हैं. उनकी फिल्म फिल्मिस्तान इन गर्मियों की छुपा रुस्तम सिद्ध हो सकती है. यह फिल्म हिंदी सिनेमा को लेकर लोगों के जुनून को पेश करती है और भारत-पाकिस्तान के बीच सहज रिश्तों की वकालत करती है.

महज 1.5 करोड़ रु. के बजट से बनी इस फिल्म में हिंदी फिल्मों के दीवाने (शारिब हाशमी, जो 2012 में जब तक है जान में दिखे थे) को पाकिस्तान में आतंकवादी बंधक बना लेते हैं. फिल्म दो साल तक फिल्म समारोहों में अपनी मौजूदगी दर्ज कराती रही और 2013 में इसे सर्वश्रेष्ठ हिंदी फीचर फिल्म के राष्ट्रीय पुरस्कार से भी नवाजा गया.

लंबे सफर के बाद अब यह 6 जून को रिलीज होने जा रही है. वैसे, इन गर्मियों में रिलीज होने वाली छोटी फिल्मों की लंबी फेहरिस्त में से यह एक है. यूटीवी-डिज्नी इसे देशभर में 450 से अधिक सिनेमाघरों में रिलीज कर रहा है. इसका मुकाबला बड़े बजट की ऐक्शन थ्रिलर हॉलिडेः अ सोल्जर इज नेवर ऑफ ड्यूटी से है. इसमें अक्षय कुमार हैं. इसके साथ ही दूसरी बड़े बजट की साजिद खान की मल्टीस्टारर कॉमेडी हमशकल्स 20 जून को रिलीज हो रही है और 100 करोड़ रु. के क्लब की मजबूत दावेदार भी है.

लेकिन इस मौसम में सिर्फ पैसे का ही जादू नहीं चलने वाला है. फिल्मिस्तान  के अलावा और भी कई फिल्में बड़े परदे पर आंसू, हंसी और चीख-चिल्लाहटों की भावनाओं से लबरेज कहानियां लेकर आ रही हैं. इनमें बॉलीवुड में करियर शुरू कर रहे कई चेहरे भी नजर आएंगे जिनकी धमाकेदार शुरुआत हो सकती हैरू हंसल मेहता की सिटीलाइट्स (30 मई को रिलीज) में शांत बीवी के रोल में ऐक्टर राजकुमार राव की गर्लफ्रेंड 24 वर्षीया पत्रलेखा पारी शुरू कर रही हैं. दिल चाहता है (2001) और कमीने (2009) से लोकप्रिय हुए एडिटर ए. श्रीकर प्रसाद के बेटे 24 वर्षीय अक्षय अक्किनेनी निर्देशित पिज्जा 4 जुलाई की रिलीज हो रही है. आइए देखते हैं, अगले कुछ महीनों में क्या कुछ आपके सामने आने वाला है.
 सिटीलाइट्स की दृश्य
रीमेक है सदाबहार फॉर्मूला

रीमेक का बॉलीवुड का नशा अब भी जारी है, अब रीमेक का मामला दक्षिण भारत की ऐक्शन थ्रिलर फिल्मों से थोड़ा आगे बढ़ गया है. ब्रिटिश फिल्म मेट्रो मनिला (2013) को देख महेश भट्ट को लगा कि यह कहानी भारत में चल जाएगी और उन्होंने फॉक्स स्टार स्टुडियोज इंडिया के साथ उसे परदे पर उतारने का अधिकार हासिल कर लिया. उन्होंने फिल्म के लिए हंसल मेहता और राजकुमार राव को साइन कर लिया.

पिछले साल ही डायरेक्टर-ऐक्टर की इस जोड़ी को शाहिद के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार से नवाजा गया है. फिल्म राजस्थान के गांव से आंखों में सपने लिए मुंबई आने वाले तीन लोगों के परिवार के संघर्ष के बारे में है. शाहिद की कामयाबी से उत्साहित मेहता कहते हैं, ‘‘यह कहानी गरीबों और अमीरों के बीच बढ़ते फासले के बारे में है. यह शहर का कामकाज चलाने वाले उन हाशिए के, अनाम और अदृश्य लोगों के बारे में है, जिनकी खोज-खबर हम अपनी दुनिया में खोए लोग कभी नहीं ले पाते.’’

भट्ट ने मेहता को पूरी रचनात्मक आजादी दी और फिल्म की टीम को शाहिद के प्रोफेशनल्स में से चुनने का मौका दिया. सो, अपूर्व असरानी स्क्रिप्टराइट और एडिटर के रूप में लौटे, इसी तरह मंदर कुलकर्णी साउंड डिजाइनर और विनोद रावत कास्टिंग डायरेक्टर के तौर पर फिल्म के साथ जुड़े. इसके अलावा राव भी थे, जिनमें बकौल मेहता, ‘‘बलराज साहनी जैसी अभिनय क्षमता है.’’

लेकिन उनका मानना है फिल्म की ‘‘हीरो और असली खोज’’ तो पत्रलेखा साबित होंगी. मेहता कहते हैं, ‘‘उनमें स्वाभाविक प्रतिभा है और वे ग्रामीण औरत की कमजोर और समर्पण करने वाली छवि को तोड़ देती हैं.’’

सिटीलाइट्स से भट्ट ने अपने स्टुडियो विशेष फिल्म्स को भी नया रूप देने की कोशिश की है जो अमूमन रोमांस और हॉरर फिल्मों के लिए ही जाना जाता रहा है. अपने खार के दफ्तर में काले रंग के काउच पर आराम फरमा रहे भट्ट कहते हैं, ‘‘बॉक्स ऑफिस पर अपना जलवा दिखाने वाली कई फिल्में बनाने के बाद अब नए क्षेत्र में हाथ आजमाने का समय आ गया है. मुझे लगता है कि इस फिल्म की कामयाबी से मुझे फिल्म निर्माताओं को एक विकल्प मुहैया कराने का मौका मिल जाएगा.’’

सिटीलाइट्स में जैसे एक स्वतंत्र और प्रतिभावान डायरेक्टर के साथ एक बड़े स्टुडियो ने करार किया, उसी तरह पिज्जा के लिए भी डिज्नी-यूटीवी ने शैतान (2011) और डेविड (2013) से चर्चित हुए बिजॉय नांबियार का डायरेक्टर कार्तिक सुब्बाराज की तमिल हॉरर फिल्म का रीमेक बनाने के लिए हाथ थामा. अक्षय ओबेरॉय, दीपानिता शर्मा और पार्वती ओमनकुट्टन जैसे अपेक्षाकृत कम चर्चित चेहरों के साथ बनाई गई यह फिल्म रात में पिज्जा डिलिवरी करने वाले एक लड़के की कहानी है, जिसका सामना सफेद कपड़े पहनी एक रहस्यमय औरत से होता है.

अपने अगले प्रोजेक्ट (विधु) विनोद चोपड़ा फिल्म्स की अमिताभ बच्चन और फरहान अख्तर को लेकर बनने वाली नई फिल्म में व्यस्त नांबियार कुबूल करते हैं कि उनमें हॉरर फिल्म को बेहतरीन मुकाम पर पहुंचाने की काबिलियत शायद नहीं है, लेकिन डेविड में उनके असिस्टेंट अक्षय अक्किनेनी के रूप में में उन्हें ‘‘टेक्नीक में माहिर और सयाना फिल्ममेकर’’ मिल गया. अक्किनेनी ने स्क्रिप्ट में डर के फैक्टर को और गहराई से पिरोने के लिए करीब छह महीने तक काम किया.

ट्रेलर देखकर जापान की हॉरर फिल्म डार्क वॉटर (2002) की याद आती है. लेकिन नांबियार उससे प्रभावित होने की बात से इनकार करते हैं. वे कहते हैं, ‘‘दर्शकों को कुछ दृश्य देखकर रामगोपाल वर्मा की रात (1992) की याद आ सकती है. हमारा मकसद हर किसी के भीतर ज्यादा से ज्यादा डर पैदा करना है.’’
फिल्मीस्तान का एक दृश्य
नए-नवेलों का जमाना
जल्द रिलीज हो रही दोनों फिल्मों के हीरो अपने जुनून को लेकर पूरी तरह समर्पित हैं. कक्कड़ की फिल्मिस्तान  में सनी (हाशमी) फिल्मी धुन में रमा और ऐक्टर बनने की ख्वाहिश रखने वाला युवक है जिसे सीमा पर पाकिस्तान की तरफ एक गांव में बंधक बना लिया जाता है. वहां, वह एक स्थानीय डकैत (इनामुल हक) से दोस्ती गांठ लेता है और सनी देओल तथा 1989 की सुपरहिट फिल्म मैंने प्यार किया के संवाद की हू-ब-हू नकल उतारकर गांववालों का दिल जीत लेता है.

जोशीला और आकर्षक हाशमी अपने पहले लीड रोल में फिल्म के स्टार बन गए हैं. फिर भी, कक्कड़ को उनको लेने से पहले प्रोड्यूसर सैटेलाइट पिक्चर्स सहित कई लागों की आशंकाएं शांत करनी पड़ीं. वे कहते हैं, ‘‘मुझसे कहा गया कि अगर उसे लिया तो कोई भी यह फिल्म नहीं देखेगा. लेकिन स्क्रिप्ट की मांग ही ऐसे कलाकार की थी जो हीरो की तरह तो बिल्कुल भी नहीं दिखना चाहिए. यह कहानी एक ऐसे शख्स की है जो फिल्मी दुनिया का दीवाना है.’’

फिल्मिस्तान में बेशक बॉलीवुड की ब्लॉकबस्टर फिल्मों में नजर आने वाला मसाला जैसे पुराने अंदाज वाला हीरो, नाच-गाना और हीरोइन न हो, लेकिन फिल्म काफी मनोरंजक है. सनी देओल सरीखे ऐक्टरों की नकल के माध्यम से कक्कड़ यह बात बताना चाहते हैं कि हम सब ‘‘फिल्मी’’ हैं, वे लोग भी जो सीमा पार रहते हैं.

बॉबी जासूस के सेट पर बैठे, जो संयोग से मुंबई के अंधेरी में असली फिल्मिस्तान स्टुडियो में ही लगा था, निर्माता साहिल सांघा बॉर्न फ्री एंटरटेनमेंट की दूसरी फिल्म के लिए टैलेंटेड ऐक्ट्रेस विद्या बालन को फिल्म में लेकर खुश हैं. अपनी मंगेतर दीया मिर्जा के साथ पार्टनरशिप में प्रोडक्शन हाउस चलाने वाले सांघा कहते हैं, ‘‘वे एकमात्र ऐसी लीड ऐक्ट्रेस हैं जो किसी बड़े ऐक्टर के बिना फिल्म को कामयाबी दिला चुकी हैं.

विद्या ने एक ऐसे फैक्टर को आज मेनस्ट्रीम में ला दिया है, जिस पर पहले सोचा भी नहीं जा सकता था.’’ उनका इशारा हीरोइन केंद्रित फिल्म की कमाई की ओर था.

बॉलीवुड में बतौर डायरेक्टर शुरुआत कर रहे 35 वर्षीय समर शेख की बॉबी जासूस में विद्या बालन 30 वर्षीया महिला के रोल में हैं जो हैदराबाद में सबसे अच्छी प्राइवेट डिटेक्टिव बनने की इच्छा रखती है. बॉबी की फितूरी करतूतें और पुरुषों के क्षेत्र में कदम रखने से कइयों के ताने सुनने पड़ते हैं, उसके पिता (राजेंद्र गुप्ता) उसे परिवार की बदनामी की वजह भी मानते हैं. सांघा कहते हैं, ‘‘यह अकेली हीरोइन की फिल्म है इसलिए बेशक धांसू ही होगी. यह पारिवारिक फिल्म है, इसलिए विद्या बालन का हंसाने-गुदगुदाने वाला पह्न भी आप देख सकेंगे.’’
हॉलीडे का एक दृश्य
बड़े बजट का भी हल्ला बोल
बॉलीवुड की गर्मियों की गहमागहमी बड़े सितारों की मौजूदगी वाली व्यावसायिक फिल्मों के जिक्र के बिना अधूरी है. अक्षय कुमार और सोनाक्षी सिन्हा की पिछली फिल्म वंस अपॉन अ टाइम इन मुंबई दोबारा! (2013) भले बॉक्स ऑफिस पर औंधे मुंह गिर गई थी, लेकिन चौथी बार फिल्म में बतौर जोड़ी आने के उनके इरादे पर कोई असर नहीं पड़ा.

हिट तमिल फिल्म तुपक्की की रीमेक हॉलिडेरू अ सोल्जर इज नेवर ऑफ ड्यूटी  से उन्हें उम्मीद है कि वे राउडी राठौड़ (2012) जैसी जबरदस्त कामयाबी दोहरा पाएंगे. राउडी राठौड़ भी रीमेक थी. गजिनी (2008) से चर्चा में आए ए.आर. मुरुगदॉस के डायरेक्शन में हॉलिडे में अक्षय कुमार ऐसे फौजी की भूमिका में हैं जो गुंडों से निबटने के अलावा बॉक्सर बनीं सोनाक्षी सिन्हा को रिझने के लिए बरमुडा पहने स्टेडियम में डांस करता है.

अक्षय कुमार ही सिर्फ अजब-गजब तरह की कॉमेडी करते नहीं दिखते. साजिद खान की कॉमेडी फिल्म हमशकल्स में सैफ अली खान, रितेश देशमुख और राम कपूर छोटी स्कर्ट पहने लड़कियों के अंदाज में खूब मजेदार लग रहे हैं. साजिद हिम्मतवाला (2013) की नाकामी के बाद फिर से पूरे जोश में हैं.

साजिद ने फोन पर बताया, ‘‘पिछली फिल्म बॉक्स ऑफिस पर सफल नहीं हुई तो मैं खुश ही हूं क्योंकि इससे मुझे एहसास हुआ कि मैं अब वैसा मजाकिया नहीं रहा जिसे लोग पसंद करते थे.’’ वे मुंबई के फेमस स्टुडियो में डांस इंडिया डांस के सेट पर अपनी दो ऐक्ट्रेस तमन्ना भाटिया और ईशा गुप्ता के साथ फिल्म के प्रमोशन में व्यस्त थे.

हमशकल्स के साथ वे कॉमेडी के अपने ‘‘मजबूत’’ गढ़ में लौट रहे हैं जिसमें तीन ऐक्टर तिहरी भूमिकाओं (ट्रिपल रोल) में हैं. उनकी कामयाब हाउसफुल सीरीज की तरह हमशकल्स में भी हंसी के लिए गफलतों, उलझनों और मूर्खतापूर्ण दृश्य बनाए गए हैं. साजिद कहते हैं, ‘‘अपनी धुन में रमे रचनात्मक आदमी के नाते मैं गर्व से कह सकता हूं कि हमशकल्स मेरी अभी तक की सबसे अच्छी फिल्म है.’’

रितेश देशमुख को मस्तमौला के रूप में देखने के हफ्ते भर बाद ही दर्शक एक विलेन में नए रूप में देखेंगे. आशिकी-2 (2013) की कामयाबी से गर्वीले मोहित सूरी के डायरेक्शन में एक विलेन 27 जून को रिलीज होगी. इसमें एक और ऐक्टर का नया रूप दिखेगा. चिकने रोमांटिक हीरो सिद्धार्थ मल्होत्रा इसमें गुस्सैल गैंगस्टर गुरु के किरदार में दिखेंगे जो अपनी बातूनी और बहुत ही प्यारी-सी हीरोइन आयशा (श्रद्धा कपूर) को देखकर ही हल्का-सा मुस्कराता है.
बॉबी जासूस में विद्या बालन
खलनायक के साथ भी होगा रोमांस
फिल्म की डबिंग शुरू करने जा रहे मोहित सूरी ने फोन पर बताया, ‘‘मेरी राय में श्रद्धा आशिकी-2 में काफी रो और चीख-चिल्ला चुकी हैं. वे गुरु का जिंदगी को लेकर नजरिया ही बदल देती है.’’ इस 33 वर्षीय डायरेक्टर की पहली फिल्म जहर (2005) थी, उसके बाद से वे अभी तक नौ फिल्में बना चुके हैं. एक विलेन के बाद वे महेश भट्ट की स्क्रिप्ट अधूरी कहानी पर इमरान हाशमी, विद्या बालन और राजकुमार राव के साथ काम करेंगे. एक विलेन में उन्होंने अपनी महारत के दो क्षेत्रों रोमांस और थ्रिलर का मिश्रण बनाने की कोशिश की है.

सूरी कहते हैं, ‘‘आम तौर पर फिल्मों में हीरो होता है और विलेन प्रेम प्रसंग में अड़ंगा लगाता है. लेकिन लेखक तुषार हीरानंदानी और मुझे यह बात जच गई कि फिल्म में कोई हीरो नहीं होगा और होंगे तो सिर्फ विलेन. फिल्म यह बताती है कि हर हीरो में एक विलेन होता है, जब तक उसे अपना प्यार नहीं मिल जाता.’’

मोहित सूरी उन फिल्मकारों में हैं जो मानते हैं कि दर्शकों को सिनेमाघर में काफी उम्मीद लेकर पहुंचना चाहिए. वे कहते हैं, ‘‘अब मैंने फिल्म निर्माण को गंभीरता से लेना शुरू कर लिया है. मैं फिल्म का ट्रेलर तो बनाता रहा हूं लेकिन कभी प्रोमो तैयार नहीं किया. लेकिन मेरे प्रोड्यूसर बालाजी मोशन पिक्चर्स दोनों चाहते थे. उन्होंने कहा कि यह बड़ी फिल्म है. यह अपने आप में मेरे लिए गर्व की बात है.’’  
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