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सबसे खुंखार आतंकियों में से एक मसूद अजहर ने दी भारत के खिलाफ जंग दी धमकी

पाकिस्तान के सबसे खूंखार आतंकियों में से एक और भारत का मोस्टवांडेट अजहर भारत के खिलाफ जंग की धमकी देते हुए इस साल 26 जनवरी को फिर सामने आया.

अपडेटेड 17 फ़रवरी , 2014
साहब, श्रीनगर के पुलिस लॉक-अप में गंदे से फर्श पर पालथी मारकर बैठा दाढ़ी वाला युवा मौलवी पूछताछ करने वालों से बड़े ही अदब से कह रहा था, ‘‘आप मुझे ज्यादा दिन नहीं रख सकते हैं.’’ वह मौलाना मसूद अजहर था, जिसे भारतीय सेना ने 1994 में गिरफ्तार किया था, उस समय वह महज 26 साल का था. उसके ये शब्द, भविष्य के लिए चेतावनी थे.

1995 में कश्मीरी आतंकी समूह अल फरान ने छह विदेशी पर्यटकों को अगवा कर लिया और बदले में अजहर को छोडऩे की मांग की. यह सौदा नहीं हो सका और आतंकियों ने सभी छह बंधकों को मार डाला.

दिसंबर, 1999 में सनसनीखेज घटनाक्रम में नेपाल के काठमांडू से दिल्ली आ रहे इंडियन एयरलाइंस के विमान आइसी-814 का अपहरण कर आतंकी अफगानिस्तान के कंधार ले गए. इसके 177 यात्रियों की जान बचाने की खातिर भारत सरकार को अजहर को छोडऩा पड़ा था.

इस साल 26 जनवरी को भारत के मोस्ट वांटेड आतंकियों में से एक अजहर फिर सामने आया. उसने पहाड़ों से घिरे मुजफ्फराबाद के यूनिवर्सिटी कॉलेज ग्राउंड में लगभग 10,000 समर्थकों को टेलीफोन से जुड़े लाउडस्पीकर की मदद से संबोधित किया, ‘‘हमें सबसे पहले भारत को अपना निशाना बनाना है. उसके बाद हम इज्राएल और अमेरिका का रुख करेंगे.’’

जगह-जगह लगे स्पीकरों की मदद से उसकी तीखी आवाज पूरे मैदान में गूंजने लगी, जो जैश-ए-मोहम्मद के सफेद-काले झंडों और अजहर के समर्थकों से अटा पड़ा था. कई समर्थक अजहर की तरह ही सिर पर काला-सफेद गमछा ओढ़े हुए थे.

भारत के गृह मंत्रालय के अधिकारियों का मानना है कि अजहर का इस तरह सार्वजनिक मंच पर सामने आना पाकिस्तानी फौज की सहमति के बगैर मुमकिन नहीं हो सकता. देश के खुफिया विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी कहते हैं, ‘‘वे इस पर हमारी प्रतिक्रिया देखना चाहते हैं.’’ अब तक भारत सरकार ने अजहर के भाषण पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है.

पिछले साल 6 अगस्त को नियंत्रण रेखा पर पांच भारतीय जवानों की बेरहमी से हत्या के बाद पाकिस्तान से भारत ने वार्ता पूरी तरह बंद कर रखी है. लोकसभा चुनाव नजदीक हैं और जम्मू-कश्मीर में साल के अंत में विधानसभा चुनाव भी होने हैं, ऐसे में अजहर की सक्रियता की वजह से राज्य में हिंसा की घटनाओं में इजाफा हो सकता है.

अजहर ने जिस यूनिवर्सिटी कॉलेज ग्राउंड पर शक्ति प्रदर्शन किया, वहीं पर कश्मीरी आतंकी अफजल गुरु की उर्दू में लिखी किताब अहले ईमान के नाम शहीद मोहम्मद अफजल गुरु का आखरी पैगाम भी लॉन्च हुई थी.

13 दिसंबर, 2001 को संसद पर हुए हमले के मामले में जैश-ए-मोहम्मद के आतंकी अफजल गुरु को पिछले साल 9 फरवरी की सुबह दिल्ली की तिहाड़ जेल में फांसी दे दी गई थी. यह किताब गुरु की जेल डायरी का संग्रह है जिसमें जिहाद और आत्मघाती हमलावरों का महिमामंडन किया गया है.

इस कार्यक्रम में अजहर छाया हुआ था और यह उसके लिए अपनी ताकत दिखाने का भी मौका था. भारत के खिलाफ जंग छेडऩे के लिए उसने 5,00,000 मुजाहिदीन तैयार करने की बात कही. 1999 में अपनी रिहाई के बाद से अजहर यही करता आ रहा है.

भारतीय संसद पर जैश के आतंकवादियों के हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच जंग की नौबत आ गई थी. शक्ति और प्रभाव के मामले में लश्कर-ए-तैयबा से होड़ लेते हुए जैश ने लगातार कई आत्मघाती हमलों को अंजाम दिया, जिसकी वजह से घाटी में इस आतंकवादी समूह का आतंक और भी बढ़ गया.

फिर भी, अपने जहरबुझे भाषणों के जरिए भारत के खिलाफ जिहाद छेडऩे के लिए उकसाने के वास्ते जाना जाता रहा अजहर पिछले लगभग एक दशक से चुप्पी साधे हुए था. 2003 में जब जैश के आतंकवादियों ने पाकिस्तान के तत्कालीन राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ की हत्या की कोशिश की थी, उसके बाद से इस आतंकवादी गुट पर प्रतिबंध लगा दिया गया था और इस आतंकवादी नेता को नजरबंद कर दिया गया था.

हालांकि बहावलपुर में जैश के मुख्यालय में चोरी-छिपे आतंकियों की गतिविधियां जारी रहीं. 2005 में अयोध्या में विवादास्पद राम जन्मभूमि स्थल पर इस गुट ने आत्मघाती हमले की असफल कोशिश की. 2007 में राहुल गांधी को अगवा करने की योजना बनाते जैश के तीन आतंकवादी उत्तर प्रदेश से गिरफ्तार किए गए थे.

 आतंकवादियों का गढ़
अजहर ने अपने समर्थकों को किसी गुप्त जगह से संबोधित किया था और सूत्रों के मुताबिक, यह स्थान बहावलपुर ही था. पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के दक्षिण में स्थित यह शहर रावलपिंडी के बाद सेना का सबसे बड़ा गढ़ है. 2000 में जब से जैश बना है, उसका गढ़ भी यही है. पिछले कुछ महीनों से बहावलपुर के संभ्रांत इलाके मॉडल टाउन में जैश के मुख्यालय में हलचल तेज हो गई है.

2008 में पाकिस्तान से राष्ट्रपति मुशर्रफ के बेदखल होने और प्रधानमंत्री नवाज शरीफ की पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (पीएमएल-एन) के सत्ता में आने के बाद से यह आतंकवादी संगठन धीरे-धीरे अपनी ताकत फिर इकट्ठी कर रहा है. जैश को अमेरिका और ब्रिटेन में बसे पाकिस्तानियों की ओर से दान में लाखों रु. मिल रहे हैं.

नई बनी पांच मंजिला इमारत में लगभग सौ कमरे हैं, एक टेलीफोन एक्सचेंज है और काफी बड़ा बेसमेंट है. एक न्यूजरूम है जिसमें दर्जनों आइमैक जैश का मुखपत्र तैयार करने में व्यस्त हैः साप्ताहिक अल-क़लम  उर्दू और इंग्लिश में और महिलाओं के लिए उर्दू का मासिक बनात-ए आयशा और बच्चों के लिए मासिक मुसलमान बच्चे.

20 फुट ऊंची चारदीवारी और उस पर लगी कंटीली बाड़ को छोड़ दिया जाए तो यह इमारत पाकिस्तान के उन मदरसों की तरह ही नजर आती है, जहां आधुनिक और इस्लामिक शिक्षा दी जाती है. कसे बदन, लंबी दाढ़ी और साफा तथा सलवार-कमीज पहने आदमी की यह छोटी-सी सेना मदरसे तक पहुंचने वाले चारों रास्तों का दौरा करती रहती है.

अपने लबादे में कलाश्निकोव छिपाए इन लोगों की नजर हर अनजान आदमी की ओर रहती है. इन ऊंची दीवारों के पीछे जो कुछ भी हो रहा है उससे मॉडल टाउन के निवासी चिंतित नहीं हैं, बल्कि स्थानीय लोग तो अजहर के ‘‘मुजाहिदों’’ की उपस्थिति में महफूज महसूस करते हैं.

अजहर थोड़ा वक्त उत्तरी वजीरिस्तान में और थोड़ा बहावलपुर परिसर में  बिताता है. माना जाता है कि वह हिजबुल मुजाहिदीन के कमांडर सैयद सलाहुद्दीन और लश्कर-ए-तैयबा के हाफिज मुहम्मद सईद के संपर्क में है. ये सभी आतंकवादी समूह पंजाब प्रांत के बाहर के हैं.

नवाज शरीफ की पीएमएल (एन) के वरिष्ठ नेता और प्रधानमंत्री के करीबी चौधरी जफर इकबाल इस बात से साफ इनकार करते हैं कि जैश के फिर सक्रिय होने का शरीफ बंधुओं से कुछ लेना-देना है. पाकिस्तानी संसद के उच्च सदन के नेता इकबाल कहते हैं, ‘‘पीएमएल (एन) के किसी भी सदस्य का कट्टर आतंकवादी संगठनों से कोई लेना-देना नहीं है. पीएमएल (एन) के सत्ता में आने और मौलाना मसूद अजहर के फिर से सक्रिय होने का भी आपस में कोई संबंध नहीं है.’’
मुजफ्फराबाद यूनिवर्सिटी मैदान में अफजल की किताब का अनावरण
मांद से बाहर आए आतंकवादी
पिछले एक दशक से अजहर भारत के 50 मोस्ट वांटेड की सूची में सबसे ऊपर है. उसमें दाऊद इब्राहिम और सलाहुद्दीन का भी नाम है. पाकिस्तान से वार्ता में भारत हमेशा उसके प्रत्यर्पण के लिए कहता रहा है, लेकिन पड़ोसी मुल्क उसके अपने यहां होने से इनकार करता रहा है.

जून, 2008 में भारतीय अधिकारी ने इसी तरह की एक वार्ता में इस्लामाबाद में एक दिन पुराने पाकिस्तानी अखबार की रिपोर्ट को दिखाते हुए कहा था कि वह बहावलपुर में मौजूद है. उन्होंने ऐसा इसलिए कहा था कि पाकिस्तानी राजनयिकों ने उसकी मौजूदगी के बारे में अज्ञानता जाहिर की थी.

अजहर शारीरिक रूप से मजबूत कभी नहीं रहा. 1990 के दशक के शुरू में आतंकी प्रशिक्षण शिविर से उसे अलग होना पड़ा क्योंकि वह फौजी ट्रेनिंग बर्दाश्त नहीं कर सका. कश्मीर में पूछताछ के दौरान वह आसानी से सब बकने लगा. उस पर नजर रखने वाले एक भारतीय खुफिया अधिकारी का कहना है कि वह लश्कर के हाफिज सईद से ज्यादा प्रभावशाली संगठनकर्ता और वक्ता है.

भारतीय अधिकारियों का मानना है कि पाकिस्तानी फौज मई में लोकसभा चुनाव और दिसंबर में विधानसभा चुनावों में गड़बड़ी फैलाने के इरादे से आतंकी नेताओं को बढ़ावा दे रही है. आतंकी संगठन अल-बद्र वर्षों तक सुप्त रहने के बाद एक बार फिर सक्रिय हो गया है. पिछले साल अक्तूबर में इसके आतंकियों ने कश्मीर में घुसने का प्रयास किया था.

जम्मू-कश्मीर के पुलिस महानिदेशक अशोक प्रसाद का कहना है, ‘‘घाटी में हाल में गिरफ्तार आतंकियों ने चुनाव में गड़बड़ी करने की योजना के बारे में बताया है.’’ अजहर के भाषण से संकेत मिलता है कि वह घाटी में फिर से पांव जमाना चाहता है.

सभा को संबोधित करते हुए उसने गुरु की फांसी का बदला लेने का संकल्प लिया. उसने जनरल मुशर्रफ को पश्चिम का एजेंट बताया लेकिन वह भूल गया कि मुशर्रफ नजरबंद हैं जबकि वह खुला घूम रहा है.
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