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मोबाइल ने पोर्न को पहुंचाया हर पॉकेट में

मोबाइल ने पोर्न को पहुंचाया हर पॉकेट में. पोर्न कंटेंट देखना हुआ आसान. सांस्कृतिक प्रदूषण और यौन अपराधों की सुनामी का अंदेशा. 90 लाख भारतीय पोर्न को डाउनलोड करने के लिए मोबाइल फोन का इस्तेमाल करते हैं

मोबाइल पर पोर्न
मोबाइल पर पोर्न
अपडेटेड 7 नवंबर , 2013

उसके तन पर एक भी कपड़ा नहीं है और वह दोनों हाथ जोड़कर बुरी तरह से गिडग़ड़ा रही है. दिल्ली की एक व्यस्त सड़क पर भाग रही कार की पिछली सीट पर पड़ी यह लड़की, बलात्कार करने के इरादे से उसकी ओर बढ़ रहे शख्स से कहती है, ‘‘प्लीज मुझे जाने दो.’’ वह शख्स दरिंदगी से हंसता है और फिर जोर से एक थप्पड़ जमाकर लड़की को चुप करा देता है. अगली सीट पर बैठा उसका साथी अपने मोबाइल फोन पर इस वीभत्स दृश्य को कैद करने में लगा है.

एक युवा पंजाबी दुलहन के हाथों में चूड़ा (लाल सफेद चूडिय़ां) उसके नवविवाहित होने का सबूत दे रहा है. उसके साथ बलात्कार किया जा रहा है और उसके पास मौजूद कुछ आदमी ठहाका लगा रहे हैं. वह चिल्लाती है, ‘‘हाय मां.’’ लेकिन एक आदमी पंजाबी लहजे में उसका मजाक उड़ाते हुए कहता है, ‘‘इस गंदगी में अपनी पवित्र मां को क्यों खींच रही है?’’

हरियाणा के पटौदी कस्बे के बाहर गन्ने के खेत में एक कमसिन लड़की अपने प्रेमी की यौनेच्छा के आगे झुक जाती है. वह दर्द से जितना चीखती है, प्रेमी को उतना ही ज्यादा मजा आता है. वह बस कुछ देर के लिए लड़की को छोड़ता है, ताकि वह अपनी मां के फोन का जवाब दे सके. वह अपने चिंतित माता-पिता से कहती है, ‘‘मैं दोपहर तक वापस आ जाऊंगी.’’ उसका प्रेमी अपने स्मार्टफोन पर हर चीज को रिकॉर्ड कर रहा है.

इस तरह के क्लिप्स मोबाइल फोन पर अपलोड किए जा रहे हैं और इनके जरिये लाखों भारतीय अपनी काम पिपासा को बुझाने में लगे हैं और कुछ ऐसे भी हैं जो दूसरों को कष्ट देकर इसका सुख भोगने की चाहत में अपराधों को अंजाम दे रहे हैं. टेलीकॉम पोर्टल Themobileindia.com पर इंडस्ट्री के सूत्रों का हवाला देते हुए 2012 की रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत में 90 लाख से ज्यादा लोग अपने मोबाइल फोन पर वयस्क मसाले (पोर्नोग्राफी) को डाउनलोड करते हैं और उसका लुत्फ उठाते हैं. यह बताने की जरूरत नहीं कि आज मोबाइल रिपेयरिंग की लगभग हर दुकान, साइबर कैफे और यहां तक कि फुटपाथ पर लगने वाली दुकानों में ऐसे माइक्रो मेमरी कार्ड या पेन ड्राइव आराम से मिल जाएंगे, जिनमें बलात्कार, सगे रिश्तेदारों के बीच यौन संबंध, बच्चों से यौन संबंध और हिंसक सेक्स के वास्तविक या नाटकीय वीडियो होते हैं.

गली-गली में बिकता पोर्न
शुक्रवार का दिन. सुबह के अभी 10 ही बजे हैं. दिल्ली में करोल बाग की गफ्फार मार्केट की गलियों में खरीदारों की भीड़ जमा हो गई है. लाल रंग के प्लास्टिक के स्टूल पर जींस और पीली टी-शर्ट पहनकर बैठा नौजवान बबलू सिंह अपने आसपास जमा मजदूरों को कुछ क्लिप्स दिखाता है ताकि उनसे सही कीमत वसूली जा सके. एक माहिर दुकानदार की तरह वह एक मजदूर और उसके चार साथियों को भोजपुरी की तीन फिल्मों और दर्जन भर क्लिप्स को 150 रु. में बेच देता है. यह सारी सामग्री मजदूरों के चाइनीज स्मार्टफोन के मेमरी कार्ड में डाल दी जाती है. बबलू उनसे कहता है, ‘‘तुझे तो सस्ते में मिल गया है. मैं जानता हूं कि तू इसे अपने साथियों को मुफ्त में ट्रांसफर कर देगा.’’ इतना कहकर वह अपने दूसरे संभावित ग्राहकों से मुखातिब हो जाता है. इस बार कॉलेज के लड़कों को देखकर वह अपने लैपटॉप पर कुछ खास अंदाज में उंगलियां थपथपाकर इशारा करता है. वह उनसे कहता है, ‘‘इन नई क्लिप्स में शायद वे लड़कियां हो सकती हैं जिन्हें तुम जानते हो.’’ वह रिचार्ज करने के लिए लड़कों के फोन से मेमरी कार्ड बाहर निकालता है तो लड़के बड़ी उत्सुकता से उसकी ओर टकटकी लगाए देखते रहते हैं.

दक्षिण मुंबई की मनीष मार्केट में सलीम अच्छे कपड़े पहने कुछ अजनबी लोगों को देखकर आशंकित है. वे उससे ब्लू फिल्मों की क्लिप मांग रहे हैं. लेकिन उनके बार-बार मांगने पर वह राजी हो जाता है. वह आपके स्मार्टफोन के टूटे हुए टचस्क्रीन को बदलने की जगह कुछ और सेवाएं भी दे सकता है. वह उनकी ओर देखे बिना ही धीरे से बुदबुदाता है, ‘‘चार जीबी का 200 लगेगा.’’ पंद्रह मिनट बाद आपको अपने फोन पर हिडेन कैमरे से खींचे गए सार्वजनिक टॉयलेट और चेंजिंग रूम तथा सेक्स में लीन, बॉलीवुड अभिनेत्रियों (फर्जी) के करीब 50 एमएमएस वीडियो मिल जाएंगे, जो ढाई-ढाई मिनट के होते हैं. इन ऐक्ट्रेस के चेहरे छिपाए हुए होते हैं. सलीम उन्हें सलाह देता है, ‘‘अगली बार दाल-गोश्त कहकर मांगना (मुंबई के लोग पारसी लोगों के एक व्यंजन के नाम का इस्तेमाल फोन पोर्न के लिए कोड वर्ड के तौर पर करते हैं).’’

22 वर्षीय रोहित कुमार स्कूल की पढ़ाई बीच में ही छोड़कर अब चंडीगढ़ के सेक्टर 17 में सड़क किनारे पाइरेटेड डीवीडी बेचकर गुजारा करता है. वह कहता है कि देशी और विदेशी बलात्कार के वीडियो सबसे ज्यादा बिकते हैं. वह मुस्करा कर कहता है, ‘‘हर कोई, छात्र, रिक्शावाले भइया और आपकी तरह लोग सबसे पहले उसी की मांग करते हैं.’’ लेकिन क्या वह इसे मेमरी कार्ड और पेन ड्राइव में लोड कर सकता है? ‘‘कोई दिक्कत नहीं लेकिन डिलीवरी आपको कल मिलेगी.’’

अपराध बढ़ाने वाली लत
तो क्या भारतीय भी हिंसक सेक्स के प्रति आकर्षण की विकृत मानसिकता लिए हुए हैं? गूगल एडवर्ल्ड्स के मुताबिक, पिछले साल कीवर्ड ‘‘शेप (बलात्कार)’’ को एक महीने में औसतन 40,10,000 बार सर्च किया गया. जिन कीवर्ड्स को सर्च किया गया उनमें ‘‘इंडियन गर्ल्स रेप्ड’’, ‘‘रोपिंग वीडियो’’, ‘‘रोपिंग स्टोरीज’’, ‘‘रोप्ड इन पब्लिक’’, ‘‘लिट्ल गर्ल रेप्ड’’, ‘‘रोपिंग मॉम’’, ‘‘फादर रेपिंग डॉट’’ और ‘‘रोप्ड टु डेथ’’ जैसे शब्द शामिल थे. यह सिर्फ गूगल सर्च का हिसाब है. इसमें वे लोग शामिल नहीं हैं, जो मोबाइल रिपेयर की दुकान या साइबर कैफे में जाकर पोर्न क्लिप की मांग करते हैं.

चंडीगढ़ के रईस घरों में से एक में बावर्ची 31 वर्षीय यीशु कहता है कि उसे पहले मोबाइल पर पोर्न क्लिप देखने की लत लग गई थी, लेकिन अब वह उससे बाहर आ चुका है. कई साल तक असम का यह युवक अपनी 6,000 रु. की मासिक कमाई का करीब एक-चौथाई हिस्सा पोर्न क्लिप खरीदने पर खर्च कर देता था. झारखंड की रहने वाली उसकी बीवी ने उसकी इस लत को खत्म किया. वह बताता है, ‘‘बीवी इसे बिल्कुल पसंद नहीं करती थी.’’ दो साल बीत जाने पर दोनों ने पोर्न पर खर्च होने वाले पैसों को बचाकर एक मोटरसाइकिल खरीद ली है. हालांकि उसके पास अब भी सस्ते में खरीदा गया एक पुराना स्मार्टफोन है.

मुंबई के नरीमन प्वाइंट में एक बैंक की कैंटीन में काम करने वाले 19 वर्षीय जयेश पाटील को मोबाइल पर पोर्न देखने में कुछ भी गलत नहीं लगता. वह छत्रपति शिवाजी टर्मिनस के बाहर मौजूद दुकानों से हर महीने 800 रु. के क्लिप्स खरीदता है. पाटील परेल के रात की पाली वाले स्कूल में पढ़ाई करने जाता है. वह कहता है कि पोर्न देखने से उसकी पढ़ाई पर कोई असर नहीं पड़ता है. फोन पोर्न हर वर्ग के लोगों को आकर्षित करता है क्योंकि इसे लोगों की नजरों से दूर अकेले में देखा जा सकता है.

25 वर्षीया मनमीत कौर उस वक्त हैरान रह गईं जब उन्होंने अपने प्रेमी के स्मार्टफोन पर रेप पोर्न के वीडियो देखे. इन क्लिप्स में उनके प्रेमी की पूर्व प्रेमिका के अंतरंग क्षणों के दृश्य भी थे. मनमीत ने पहले तो उसकी पूर्व प्रेमिका से इस बात को लेकर झगड़ा किया. फिर अपने प्रेमी से भी किनारा कर लिया. वे कहती हैं, ‘‘वह अपने मोबाइल से मेरे साथ धोखा कर रहा था.’’

आगे आग का दरिया है
फरवरी 2013 में मैसूर स्थित ‘‘मॉरल कांशियसनेस’’ ग्रुप ने कॉलेज में पढऩे वाले 964 छात्रों का करीब सालभर तक सर्वे करने के बाद पाया कि 75 प्रतिशत अंडरग्रेजुएट छात्रों या प्री-यूनिवर्सिटी के छात्रों ने नियमित रूप से पोर्न सामग्री को देखा है. इस अध्ययन में पाया गया कि लड़के मोबाइल फोन पर एडल्ट कंटेंट देखने में लड़कियों के मुकाबले छह गुना आगे हैं. भले ही यह विश्वसनीय न लगे लेकिन 90 लाख भारतीय पोर्न को डाउनलोड करने के लिए मोबाइल फोन का इस्तेमाल करते हैं और पोर्न मटीरियल हासिल करने के लिए हर साल औसतन 5,500 रु. खर्च करते हैं.

भविष्य और उसकी दिशा अब किसी से छिपी नहीं है. अमेरिका स्थित स्ट्रेटजी एनालिटिक्स का अनुमान है कि भारत में स्मार्टफोन की संख्या 2015 तक कुल फोन उपभोक्ताओं के 33 फीसदी तक पहुंच जाएगी. मोबाइल इंडस्ट्री पर नजर रखने वाली बंगलुरू स्थित कनवर्जेंस कैटलिस्ट का अनुमान है कि भारत में स्मार्टफोन का बाजार 2013 के पूरा होने तक दोगुना हो जाएगा और हैंडसेट की संख्या करीब 4.4 करोड़ तक पहुंच जाएगी.

जनवरी में मुंबई में गोवंडी के 70 वर्षीय नियाज रजा को 13 साल की लड़की से बलात्कार के आरोप में गिरफ्तार किया गया था. यह लड़की उसकी हवस का छठा शिकार थी. नियाज पर यह भी आरोप था कि उसने अपने साथ मुख मैथुन (ओरल सेक्स) करने वाली किशोरी का 12 मिनट का मोबाइल फोन से वीडियो बनाया और उसे लोगों में बांटा. हाल ही में 15 अप्रैल को 22 वर्षीय मजदूर मनोज शाह और 19 वर्षीय प्रदीप कुमार ने पुलिस हिरासत में कबूल किया कि पूर्वी दिल्ली में पांच साल की गुडिय़ा से बलात्कार करने से पहले उन्होंने मोबाइल फोन पर पोर्न वीडियो देखे थे.

कितनी गंभीर है यह नीली लहर?
अप्रैल, 2013 में इंदौर के एक वकील कमलेश वासवानी ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की. इसमें मांग की गई है कि एक ऐसा कानून बनाया जाए जिसमें पोर्नोग्राफी देखने को गैर-जमानती अपराध माना जाए. वासवानी कहते हैं कि भारतीय समाज के सामने गंभीर खतरा है. बच्चों के सामने 20 करोड़ से ज्यादा पोर्न वीडियो और हिंसक, निर्मम और विध्वंसक सामग्री की क्लिप उपलब्ध हैं. ये चीजें इतनी बड़ी संख्या में पहले कभी नहीं थीं.

महिलाओं के खिलाफ हिंसा पर अमेरिका के ऑनलाइन रिसोर्स सेंटर वीएडब्लूनेट पर जुलाई 2004 में रॉबर्ट जेनसन के रिसर्च पेपर में बताया गया कि सभी उपलब्ध अध्ययन 1970 के दशक में पोर्नोग्राफी की स्त्रीवादी आलोचना का समर्थन करते हैं और कहते हैं कि यह महिलाओं और बच्चों के लिए घातक है.

मनोविज्ञानी और महिला एक्टिविस्ट 75 वर्षीया किश्वर अहमद शिराली कहती हैं कि पोर्नोग्राफी और यौन अपराधों के बीच किसी तरह के संबंध की पुष्टि अभी तक नहीं हो सकी है. वे कश्मीर में हिंसा की शिकार महिलाओं और बच्चों के लिए काम करती हैं. उनके मुताबिक, ‘‘बलात्कार के आरोपियों समेत ज्यादातर भारतीय भी शामिल हैं जिनमें पोर्नोग्राफी के दौर से पहले वर्षों तक पितृसत्तात्मक समाज में नारी के प्रति उपेक्षा के भाव के साथ पले-बढ़े हैं. ’’ यह सोचना भी हिलाकर रख देने वाली है कि आपका बावर्ची, ड्राइवर, पोस्टमैन, पड़ोस का किशोर लड़का या पड़ोस में भला-सा लगने वाला युवा एग्जीक्यूटिव, आपको या आपकी पांच साल की बेटी को अपना निशाना बनाने से पहले अपने मोबाइल फोन पर पोर्न देख रहा हो.
-साथ में कौशिक डेका, भुवन बग्गा, जे. बिंदुराज और किरण तारे

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