राष्ट्रीय राजधानी के नजदीक नोएडा के रहने वाले 24 साल के नौजवान राधे राणा ने जब 27 जनवरी को अपने फेसबुक टाइमलाइन पर यह स्टेटस अपडेट किया, तो उससे जानने वाले ज्यादातर लोगों को यह शेखी बघारने वाली बात लगी. करीब 4 घंटे में उसके कुछ दोस्तों ने इस स्टेटस को लाइक किया और सात ने अपने कमेंट लिख डाले. लेकिन इस फेसबुक स्टेटस के ठीक पांच दिन बाद जब राधे ने अपने दोस्तों के साथ नोएडा के ही एक जिम में धावा बोल कर दो नौजवानों को लहुलूहान कर दिया, तो सभी को यह समझते देर नहीं लगी कि राधे अपने इस फेसबुक स्टेटस को लेकर कितना सीरियस था.
राधे और उसके गैंग ने जिम में घुसकर 21 साल के अमरपाल और रोहित को रॉड और डंबलों से इतनी बुरी तरह मारा कि दोनों की हालत बिगड़ गई. चूंकि अमरपाल टार्गेट पर था, उसे चोट ज्यादा लगी. आनन-फानन में दोनों को मेट्रो अस्पताल में भर्ती करवाया गया, जहां 6 फरवरी की सुबह अमरपाल की मौत हो गई.
फेसबुक पर भावनाओं का इजहार तो खैर कोई नई बात नहीं है... लेकिन सोशल साइट पर बदले के ऐलान के बाद कत्ल की यह वारदात यकीनन अपने तरह की नई और अनोखी बात है. इस ऐलानिया कत्ल के बाद बेशक नोएडा सेक्टर 24 की पुलिस ने राधे के दो दोस्तों विकास राणा और श्रीपाल को गिरफ्तार कर लिया लेकिन इस वाकए ने नौजवानों में खत्म होते संयम और दिखावे की जिंदगी के पागलपन को फिर से सामने ला दिया. खासकर इसलिए, क्योंकि जिस राधे ने अपने दोस्तों के साथ मिलकर एक मामूली सी बात पर अमरपाल की जान ली, कभी वह खुद अमरपाल का अच्छा दोस्त हुआ करता था.
जमीन के मुआवजे के बदले रातोरात करोड़ों में खेल रहे नोएडा के नौजवानों के लिए अच्छी गाड़ी, गठीला बदन, लड़कियों से दोस्ती और फिल्मी जिंदगी नए शौक हैं. अमरपाल को जानने वाले बताते हैं कि स्मार्ट दिखने की चाहत ही उसे अब से कुछ महीने पहले नोएडा के सेक्टर 12 में मौजूद मास्टर जिम तक खींच लाई थी. अपने भाइयों के दूध के कारोबार में हाथ बंटाने वाले अमरपाल की यहीं राधे और उसके ग्रुप से दोस्ती हुई. लेकिन दो महीने पहले गली से गुजरते वक्त अमरपाल की बाइक से राधे की बाइक में लगी एक मामूली खरोंच दोनों के बीच दुश्मनी की वजह बन गई. दोनों में इसी बात पर तब लड़ाई भी हुई थी, लेकिन तब बड़े-बुजुर्गों के बीच-बचाव के बाद मामला शांत हो गया था.
लेकिन हकीकत यही थी कि ऊपर से यह लड़ाई भले ही शांत दिख रही हो, अंदर से शांत नहीं थी. अब इशारों ही इशारों में राधे ने फेसबुक पर अमरपाल को ललकारना शुरू कर दिया. उसने फेसबुक पर कई बार असलहों की तस्वीरें अपलोड कीं और कई बार गालियां भी लिखीं. एक बार तो उसने अपने टाइमलाइन पर देसी पिस्तौल और गोलियों की तस्वीरें तक पोस्ट कर डाली और फिर अंत में लिखा, “दोस्तो, मुझे किसी से बदला लेना है... तुम मेरा साथ दो!” लेकिन तब भी किसी को राधे के मंसूबे का अंदाजा नहीं था.
नोएडा के एसएसपी प्रवीण कुमार कहते हैं, “हमें राधे के ऐसे किसी फेसबुक स्टेटस के बारे में पहले कोई जानकारी नहीं थी. वैसे भी ये आप समझ सकते हैं कि किसी के सोशल साइट पर कब, कौन, कहां और क्या अपडेट कर रहा है, वह खुद कर रहा है या फिर उसके एकाउंट का कोई और इस्तेमाल कर रहा है, बिना गहरी पड़ताल के किसी नतीजे पर नहीं पहुंचा जा सकता.” वे फिलहाल मामले की तफ्तीश कर रहे हैं.
जाने-माने मनोचिकित्सक डॉ. समीर मल्होत्रा की नजर में यह वारदात नौजवानों में बढ़ती कुंठा, दिशाहीन ऊर्जा और सोशल मीडिया के बेजा इस्तेमाल का नमूना है. वे कहते हैं, “हर इंसान बचपन से ही अपने गुस्से पर काबू रखने का तरीका सीखता है. लेकिन दिखावा, नशा, गुटबाजी जैसी चीजें कई बार गुस्से को बेकाबू कर देती हैं.” बहरहाल, ऐलानिया कत्ल के गुनहगारों के लिए कानून चाहे जो भी सजा मुकर्रर करे, इस वारदात ने नौजवानों के खतरनाक नए मिजाज को सामने जरूर ला दिया है.

