इसे नेताओं की अदा कहें या राजनीति की मजबूरी कि जो घोषणाएं पार्टियों के मंच से होनी चाहिए, उनके लिए एजेंडा-आजतक नेताओं को ज्यादा रास आया. एजेंडा के दूसरे दिन के पहले सत्र का आगाज करते हुए भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष नितिन गडकरी ने फरमाया, ''मैं बीजेपी के अध्यक्ष की हैसियत से, पूरी जिम्मेदारी से बोलता हूं कि लोकसभा चुनाव के पहले पार्टी अपना नेता घोषित नहीं करेगी. '' दूसरी तरफ पूर्व क्रिकेटर और पाकिस्तान की तहरीक-ए-इंसाफ पार्टी के अध्यक्ष इमरान खान ने विदेश नीति जैसे संवदेनशील मुद्दे पर न सिर्फ बेबाकी से राय जाहिर की बल्कि यहां तक कह दिया कि अगले चुनाव में अगर उनकी पार्टी की सरकार आई तो पाकिस्तान की धरती का इस्तेमाल भारत के खिलाफ आतंकवाद के लिए नहीं करने देंगे.
यही नहीं, इसी पड़ाव पर देश के गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे ने कसाब की फांसी के लिए चलाए गए ऑपरेशन एक्स के राज खोले और अफजल गुरु और दाउद इब्राहिम को लेकर सरकार की रणनीति का भी खुलासा किया.
इतनी वजनदार घोषणाओं से अगर आपको लगता है कि एजेंडा-आजतक राजनीति के गूढ़ चिंतन का ही प्लेटफॉर्म है तो थोड़ा रुक जाइए. जब 'धक-धक गर्ल' माधुरी दीक्षित मंच पर आईं तो शायर जावेद अख्तर ने पहली बार यह राज फाश किया कि 'एक लड़की को देखा तो ऐसा लगा' गाना असल में माधुरी के लिए लिखा गया था, बाद में न जाने कहां से मनीषा कोइराला वहां आ गईं. अभिनेत्री काजोल की चहकती मुस्कान और आमिर खान के दिल की हसरतों का गवाह भी यह मंच बना.
इसी मंच पर बाबा रामदेव और कांग्रेस नेता संजय निरुपम के बीच हाथापाई के अलावा बाकी सब कुछ हुआ और भर पेट झगड़े के बाद दोनों ने एक-दूसरे को नमन भी किया. और जब एजेंडे के सत्र 'भारत-पाकिस्तान क्रिकेट: मैच या महायुद्ध? ' में कपिल देव, मोहम्मद अजहरुद्दीन, सौरव गांगुली, वकार युनूस और वसीम अकरम यानी एक साथ दोनों मुल्कों के पांच कप्तान नमूदार हुए तो आयोजन हॉल से लेकर फेसबुक और ट्विटर तक सवालों की जैसे झड़ी लग गई.
एजेंडे के ही सत्र 'छोड़ो कल की बातें' में इमरान खान ने कहा कि भारत और पाकिस्तान दोनों ही मुल्कों के राजनेता चाहते हैं कि भरोसे के आधार पर रिश्ता बने. उनका मानना था कि हर बड़े फैसले में 'रिस्क' होते हैं. 21वीं सदी के लिए नई सोच की जरूरत है. इमरान ने भरोसा दिलाया कि ''पाकिस्तान में तहरीक-ए-इंसाफ पार्टी अगर सत्ता में आएगी, तो मैं अपनी धरती का इस्तेमाल भारत के खिलाफ नहीं होने दूंगा. ''
आतंकवाद का जिक्र हो और कसाब की फांसी की चर्चा न हो, कैसे मुमकिन है? गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे बोले, ''अगर आतंकवादी गुपचुप हमला कर सकते हैं तो हम फांसी का फैसला खामोशी से क्यों नहीं ले सकते? '' उन्होंने साफ किया कि अफजल गुरु सहित सात लोगों की फांसी की फाइल उनके पास है और उस पर मौजूदा संसद सत्र के बाद फैसला होगा.
लेकिन आतंक के साये से दूर क्रिकेट के मैदान के बारे में पूर्व कप्तान गांगुली बोले, ''पाकिस्तान के साथ मैच महायुद्ध तो नहीं लगा. हां, दबाव रहा. लेकिन इतना जरूर है कि पाकिस्तान से जीतने के बाद मजा आया. '' सौरव ने पाक मेहमाननवाजी का वह वाकया भी याद किया जब एक दुकानदार ने उनसे इसलिए उनके पसंदीदा पाकिस्तानी जूतों की कीमत लेने से मना कर दिया था क्योंकि वे उसके मेहमान थे. लेकिन कपिल ने याद दिलाया कि सौरव से पहले भारत-पाक क्रिकेट का स्वाद कुछ ज्यादा ही तीखा था. कपिल ने कहा, ''हम ऐसे दोस्ताना खेल की बात सोच ही नहीं सकते थे. तब यह लगता था कि जीतें चाहे हारें, लेकिन सामने वाले को मारकर आना है. '' वसीम अकरम की राय भी कुछ इसी तरह की थी, ''पहले दोनों देशों के बीच क्रिकेट में और ज्यादा दबाव होता था, पर अब इसे खेल की तरह देखा जाता है. '' वैसे अकरम को एक अफसोस भी है, ''मैं अपने 'प्राइम टाइम' में सचिन तेंदुलकर को कभी गेंदबाजी नहीं कर पाया. '' पांच कप्तान जब मंच से क्रिकेट पर चर्चा कर रहे थे और छठे कप्तान इमरान खान दर्शक दीर्घा से उन पर नजर रखे हुए थे तो स्लेजिंग यानी बकझक का जिक्र भी छिड़ गया. अजहर ने 1992 के विश्वकप में जावेद मियांदाद और किरण मोरे के बहुचर्चित पंगे का जिक्र किया. सवाल घूमकर इमरान तक पहुंचा कि मैच के बाद उन्होंने मियांदाद को क्या नसीहत दी? इस पर इमरान के शब्द थे, ''जब आपको पता है कि नसीहत देने का कोई मतलब ही नहीं है, तो दूसरे काम में दिमाग लगाना ज्यादा बेहतर है. ''
क्रिकेटरों के बाद मैदान संभाला मिस्टर परफेक्शनिस्ट आमिर खान ने. सत्यमेव जयते जैसे सीरियल के निर्माण के बावजूद वे खुद को सामाजिक कार्यकर्ता नहीं बल्कि 'एंटरटेनर' के तौर पर ही देखते हैं. भविष्य की योजना के बारे में खुलासा करते हुए वे बोले, ''मेरा एक सपना है कि मैं महाभारत बनाऊं. मैं कृष्ण के रोल में फिट बैठूंगा. मेरी मां भी मुझे बचपन में यही बुलाती थीं. वैसे मेरा सबसे प्रिय किरदार है कर्ण, पर मैं वो किरदार नहीं निभा पाऊंगा. ''
एजेंडा में चर्चा के दौरान माधुरी दीक्षित का कहना था कि कैमरे के पीछे भी महिलाओं का बोलबाला बढ़ रहा है और उनकी इमेज भी बदली है, जो ''सिल्वर स्क्रीन'' पर नजर आती है. फिल्म अभिनेत्री काजोल ने एजेंडा-आजतक में शिरकत करके चर्चा को और भी ज्यादा जीवंत बना दिया. काजोल ने खुलासा किया कि अगर अच्छी स्क्रिप्ट मिले तो वे शाहरुख खान के साथ काम करने को तैयार हैं.
लेकिन बाबा रामदेव सरकार के साथ चलने को तैयार नहीं. लगातार दहाड़ते आ रहे बाबा ने इस मंच पर भी कहा कि अगर कांग्रेस काला धन के मुद्दे पर सजग नहीं होती है तो परिणाम भुगतना पड़ेगा. सरकार का बचाव करते हुए संजय निरुपम ने सफाई देनी चाही कि काला धन रखने वालों के नाम उजागर करना अंतरराष्ट्रीय संधियों के खिलाफ है. वहीं बाबा रामदेव ने सवाल उठाया कि अगर अमेरिका कालेधन को अपने देश में ला सकता है तो भारत क्यों नहीं?
वैसे इस मंच से कही गर्ई लालू प्रसाद यादव की इस बात को भी दर्ज करना होगा कि बजट सत्र के बाद देश चुनाव मोड में जा सकता है. कांग्रेस के अघोषित प्रवक्ता की बात को हल्के में मत लीजिएगा, क्योंकि उनके पास सीटें भले कम हों, सियासी तजुर्बा असीमित है.

