कई बातें ऐसी होती हैं, जो लोगों के दिमाग में अपनी पक्की जगह तो बना लेती हैं, लेकिन सार्वजनिक मंच पर उन्हें ठोंककर कहने की हिम्मत कोई नहीं जुटा पाता. आजतक एजेंडा के मंच ने वह खुला माहौल पैदा किया कि क्या नेता और क्या अभिनेता सबने, डिप्लोमैटिक होने की मजबूरी छोड़कर दिल की बात सामने रख दी. कांग्रेस में प्रधानमंत्री कैसे बनता है, यह सच बोलने में न दिग्विजय सिंह लजाए और न अण्णा हजारे खुलकर अपने चेले केजरीवाल के कान खींचने से पीछे हटे.
एजेंडा के पहले सत्र 'आज का नेता कैसा हो’ में केंद्रीय दूरसंचार मंत्री कपिल सिब्बल, बीजेपी नेता और राज्य सभा में विपक्ष के नेता अरुण जेटली और सीपीएम के वरिष्ठ नेता सीताराम येचुरी ने शिरकत की. जेटली ने बेहतर नेता के गुण गिनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी. लेकिन क्या नरेंद्र मोदी 2014 के लोकसभा चुनाव में पार्टी के प्रधानमंत्री पद के दावेदार होंगे, इस सवाल को वे टाल गए. वहीं कपिल सिब्बल ने राहुल गांधी के 2014 में कांग्रेस की तरफ से प्रधानमंत्री पद का दावेदार होने के सवाल पर कहा, ''2014 में कौन नेतृत्व संभालेगा, इसका फैसला हम पर छोड़ दीजिए. कांग्रेस का नेता और नेतृत्व 2014 में आपको दिख जाएगा.”
सिब्बल और जेटली ने जिस बात को पूरी कूटनीति के साथ कहा, उसी बात को कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने बिना लाग-लपेट के और बीजेपी नेता और लोकसभा में विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज ने अलग अंदाज में कहा. जेटली के उलट सुषमा ने कहा कि चुनाव से पहले किसी व्यक्ति को बीजेपी या एनडीए का नेता तय करना उचित नहीं होगा. अब पहले जैसे राजनैतिक हालात नहीं हैं और कहीं पार्टी को पीएम चुनते समय पहले से घोषित प्रत्याशी को बदलना पड़ा तो स्थिति विचित्र हो जाएगी. हालांकि वे इस बात पर कायम रहीं कि नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री पद के लिए पात्र व्यक्ति हैं.
सुषमा यह स्पष्ट करना नहीं भूलीं कि पात्र और दावेदार में फर्क होता है और फिलहाल वे मोदी को दावेदार नहीं बता रहीं. उधर आम तौर पर टीवी पर दिखने वाले कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह चुटीले और हंसी में लिपटी कूटनीति के अंदाज में नजर आए. कांग्रेस के प्रधानमंत्री पद के दावेदार के सवाल पर उन्होंने सिब्बल से उलट दो टूक लहजे में कहा, ''हमारे यहां कोई दिक्कत ही नहीं है. जिसके लिए आदेश होगा, वह प्रधानमंत्री बन जाएगा.” उनका इशारा सोनिया गांधी के आदेश की तरफ था.
दिग्विजय ने कहा, ''जहां तक बीजेपी में प्रधानमंत्री पद के योग्य उम्मीदवार का सवाल है तो सुषमा जी से ज्यादा योग्य कोई नहीं है. यह उनका हक भी है. ब्रिटिश लोकतंत्र में विपक्ष के नेता को शैडो प्राइम मिनिस्टर कहा जाता है और इस पद पर अभी सुषमा स्वराज हैं. लेकिन पता नहीं वे गुजरात में जाकर किसी और व्यक्ति को इस पद का दावेदार क्यों बता आईं.” हाजिर जवाब स्वराज कहां चूकने वाली थीं और उन्होंने भी तड़ से कहा कि दिग्विजय भाई लड़ाई लगवाने में माहिर हैं और आज भी वही काम कर रहे हैं.
लेकिन एक दूसरी लड़ाई का नया रंग तब सामने आया, जब समाजसेवी अण्णा हजारे आज तक एजेंडा के मंच पर आए. एजेंडा के सत्र 'अधूरी क्रांति’ में अण्णा ने कहा, ''अरविंद को महत्वाकांक्षा हो गई है. आज तो ये दिखाई देता है. पैसे से सत्ता और सत्ता से पैसा, लगता है अरविंद को भी इसकी अपेक्षा हो गई है.” इस सवाल पर कि क्या वे अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी को वोट, रालेगण के समाजसेवी ने कहा, ''पहले सोचता था, लेकिन अब नहीं करूंगा. उनके नजदीक भी नहीं जाऊंगा.” इस सीधे सवाल पर कि क्या सत्ता और लालच ने अरविंद को अण्णा से अलग कर दिया, अण्णा ने कहा, ''ये तो सही है.”
राजनीति और विकास की बातें हों और देश के युवाओं की चर्चा न हो, यह कैसे मुमकिन है. इसीलिए आजतक एजेंडा के मंच पर 'यंगिस्तान में है दम’ सत्र में युवा नेता सचिन पायलट, युवा क्रिकेटर सुरेश रैना और युवा अभिनेता रणदीप हुडा ने शिरकत की. पायलट ने जोर देकर कहा कि बदलाव लाने की ताकत सिर्फ राजनीति में है.
इस सवाल पर कि क्या राहुल गांधी जैसे लोग युवा नेताओं की ऊंचे पदों पर पहुंचने की महत्वाकांक्षाओं को सीमित कर देते हैं, पायलट ने कहा, ''राहुल गांधी सब पर भारी हैं. राहुल गांधी के पास जो विज़न है वह किसी के पास नहीं है.” इस सवाल पर कि राहुल अब तक गुजरात चुनाव प्रचार में क्यों नहीं गए, पायलट ने कहा, ''सोनिया जी जाएंगी, राहुल जी जाएंगे और मैं भी जाऊंगा. समय आने पर सब जाएंगे और ईंट से ईंट बजाकर आएंगे.”
सुरेश रैना ने इस बात को सिरे से खारिज कर दिया कि आइपीएल खेल और खिलाडिय़ों को बिगाड़ रहा है. रैना ने कहा कि मेरे जैसे आर्थिक रूप से कमजोर परिवार के लड़कों को आइपीएल ने शोहरत और पैसा दिया है. पिताजी की 10,000 रु. की तनख्वाह में हम जो नहीं कर सकते थे, आज कर सकते हैं.” क्रिकेटरों की देर रात पार्टी के सवाल पर रैना ने कहा कि इसका फैसला खिलाड़ी खुद लें. उन्हें सोचना होगा कि ऐसी पार्टियों के बाद वे अपना 200 फीसदी दे पाएंगे या नहीं. वहीं रणदीप हुडा ने खाप पंचायतों जैसे विवादित विषय पर अपनी बात बेबाकी से रखी. हुडा ने कहा कि खाप पंचायतें एक ही गोत्र में शादी न करने का जो मुद्दा उठा रही हैं, वह सही है. लेकिन अपनी बात मनवाने का खाप पंचायतों का तरीका गलत है.
एजेंडा के छोटे पर्दे से जुड़े सत्र में चर्चित धारावाहिक बालिका वधू की आनंदी अविका गौर ने भी शिरकत की. उनके साथ साक्षी तंवर और अन्य कलाकार भी मंच पर नजर आए. छोटे पर्दे के इन कलाकारों ने साफगोई से स्वीकार किया कि जो चीजें वे अपने नाटकों में परोस रहे हैं, उससे वे खुद इत्तेफाक नहीं रखते. सीरियल भी साबुन-तेल की तरह ही एक प्रोडक्ट है.
'सोशल मीडिया: कमाल या जंजाल’ सत्र में ट्विटर पर एक्टिव युवा अंग्रेजी लेखक चेतन भगत, सूचना और प्रसारण राज्यमंत्री मनीष तिवारी और पुलिस अफसर से सामाजिक कार्यकर्ता बनीं किरण बेदी मंच पर आईं. तिवारी और बेदी ने राय रखी कि फेसबुक जैसे सोशल मीडिया पर इतना इंतजाम होना चाहिए कि अगर किसी की मानहानि की जाती है तो उसे कानून से न्याय पाने की गुंजाइश बनी रहे. तिवारी ने कहा कि वे सोशल मीडिया के नियंत्रण के पक्षधर नहीं हैं, लेकिन इस पर होने वाली गलत गतिविधियों पर अंकुश की व्यवस्था होनी चाहिए. वहीं चेतन भगत ने कहा कि अगर कोई गाली देता है तो खा लीजिए क्योंकि गाली देने वाले को समाज खुद ही गंभीरता से नहीं लेगा.
इसके बाद 'इंडिया मांगे मोर विकास’ सत्र में उद्योगपति सुब्रत राय सहारा, संजीव गोयनका और संसदीय कार्यमंत्री कमलनाथ ने विकास की बात रखी और तकरीबन तीनों वक्ता रिटेल क्षेत्र में एफडीआइ के सवाल पर रजामंद नजर आए.
'अपनी भाषाएं हैं जरूरी’ सत्र में गीतकार जावेद अख्तर, कवि अशोक वाजपेयी और विज्ञापन लेखिका अनुजा चौहान ने शिरकत की.
आखिरकार जब कार्यक्रम के अंतिम सत्र 'लोक बनाम तंत्र’ में बहस शुरू हुई तो जमकर टांग खिंचाई हुई. कार्यकर्ता से नए-नए नेता बने अरविंद केजरीवाल, कांग्रेस के थिंक टैंक मणिशंकर अय्यर और भाजपा नेता रविशंकर प्रसाद एक साथ मंच पर दिखे तो पुरानी खलिश सार्वजनिक हो गई. केजरीवाल ने सबसे पहले अपनी बात रखकर पूरी व्यवस्था से अपनी असहमति जता दी. उसके बाद मणिशंकर ने मोर्चा संभाला और केजरीवाल को सकारात्मक राजनीति पर एक लंबा-चौड़ा भाषण दिया. अय्यर ने कहा कि यदि केजरीवाल के पास वाकई ऐसा कोई ठोस फॉर्मूला है, जिससे सीबीआई को स्वतंत्र संस्था बनाया जा सके तो वे उसे फॉर्मूले को सामने लाएं.
अय्यर खुद उसे अपनी पार्टी के पास ले जाएंगे. लेकिन तभी रविशंकर प्रसाद ने मणिशंकर अय्यर से चुटकी लेते हुए कहा कि आपकी अपनी पार्टी में चलती कितनी है. लेकिन प्रसाद ने केजरीवाल के लिए नसीहतों का पिटारा कम नहीं खोला. प्रसाद ने कहा कि आपकी पार्टी तो बनने से पहले ही टीम बिखर गई. प्रसाद ने मीडिया और न्यायपालिका के प्रति केजरीवाल के अविश्वास के प्रति भी उन्हें आगाह किया.
अब तक श्रोताओं की पांत में आ चुके जावेद अख्तर और अमर सिंह ने भी केजरीवाल को अपने सवालों के निशाने पर लिया. इतनी नसीहतों और कई बार लानतों के बावजूद केजरीवाल ने अपना धैर्य नहीं खोया और यही कहते रहे, ''मुझे जैसा देश चाहिए, उसके लिए मैं अपने तरीके से काम कर रहा हूं. आपको असहमति का अधिकार है.”
लेकिन एक आदमी है, जिससे शायद ही कोई असहमत होता हो और वह हैं कॉमेडियन राजू श्रीवास्तव. एजेंडा की भारी-भरकम बहस को अपनी धारदार शरारतों से खुशनुमा बनाने वाले राजू ने एजेंडा में मौजूद कद्दावर लोगों, उनकी पार्टियों और उनके तौर-तरीकों पर उनके सामने ही विनोद किया और सुनने वालों ने बाअदब उसे सुना. आजतक एजेंडा के पहले दिन नेता, अभिनेता, खिलाड़ी और कारोबारी सबने जिस तरह खुलकर अपनी बात रखी, वही इसकी कामयाबी है.
(अगले अंक में जारी)

