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ठाकरे-पवार की सियासत का खानदानी नुस्खा

बाल ठाकरे की अंत्येष्टि के एक दिन बाद भी एनसीपी के मुखिया शरद पवार पुराने दिनों में ही खोये हुए थे. दिल्ली के कृषि भवन में कुछ मुलाकातियों से उन्होंने 2006 की उस घटना का जिक्र किया जब उन्होंने राज्यसभा के लिए महाराष्ट्र से अपनी बेटी सुप्रिया सुले को उतारने का फैसला किया था.

अपडेटेड 2 दिसंबर , 2012

बाल ठाकरे की अंत्येष्टि के एक दिन बाद भी एनसीपी के मुखिया शरद पवार पुराने दिनों में ही खोये हुए थे. दिल्ली के कृषि भवन में कुछ मुलाकातियों से उन्होंने 2006 की उस घटना का जिक्र किया जब उन्होंने राज्यसभा के लिए महाराष्ट्र से अपनी बेटी सुप्रिया सुले को उतारने का फैसला किया था.

उन्होंने बताया कि घोषणा वाले दिन देर रात शिवसेना सुप्रीमो बाल ठाकरे ने उन्हें फोन करके कहा कि सुप्रिया के खिलाफ न तो शिवसेना और न ही बीजेपी अपना उम्मीदवार उतारेगी.

पवार इससे चौंके जरूर मगर उन्होंने ठाकरे से कहा कि इसकी क्या जरूरत थी. तब ठाकरे का जवाब था, ‘‘मैं इतना नहीं गिरा हूं कि उसके खिलाफ  प्रत्याशी खड़ा करूं जिसे मैंने तब गोद में लिया था जब वह दो दिन की थी.’’ इसे कहते हैं सियासत का खानदानी नुस्खा.

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