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उद्योगों की कब्रगाह रायबरेली

कभी औद्योगिक नगरी कही जाने वाली रायबरेली अब उद्योगों के बंद होने के लिए जानी जाती है.

अपडेटेड 26 नवंबर , 2012

वर्ष 2004 में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी जब पहली बार रायबरेली से सांसद बनीं तो उन्होंने यहां की महिलाओं के रोजगार में दिलचस्पी दिखाई. सोनिया की पहल पर अक्तूबर, 2005 में 'शीना होमटेक प्राइवेट लिमिटेड’ ने शीना फैक्ट्री के नाम से रायबरेली-सुल्तानपुर रोड पर इंडस्ट्रियल एरिया में एक दरी बनाने का कारखाना खोला, जहां काम करने वाली सभी 800 महिलाएं थीं. यहां की दरियों की विदेशों में काफी मांग थी. वर्ष 2009-10 में वैश्विक मंदी के चलते दरियों की बिक्री काफी कम हो गई. इस साल जनवरी से 'शीना फैक्टरी’ बंद हो गई और यहां काम करने वाली 800 महिलाएं बेरोजगार हो गईं.

मौजूदा नवंबर की 5 तारीख को रायबरेली-अमावां रोड पर स्थित 'यूपी स्टेट स्पिनिंग कंपनी’ के 450 कर्मचारी उस वक्त हैरान हो गए, जब कंपनी के गेट पर स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ( वीआरएस) का नोटिस चस्पां मिला. वर्ष 1975 में स्थापित यह कंपनी पिछले 10 वर्षों से घाटे में थी. पिछले वर्ष दिसंबर में राज्य सरकार ने मार्च, 2012 से इस कंपनी को बंद करने की घोषणा की थी, लेकिन सूबे में सपा सरकार बनने के बाद इस निर्णय को बदलकर इसे 26 जून को बंद करने का निर्णय सुना दिया गया.rae bareli

वर्ष 2012 में अब तक रायबरेली के दो बड़े उद्योग बंद हो जाने से यहां का औद्योगिक माहौल कठघरे में खड़ा हो गया है. कभी उद्योगों के लिए पूरे प्रदेश में प्रसिद्घ रायबरेली की पहचान अब यहां बंद पड़े उद्योग बन गए हैं. जिला उद्योग केंद्र के आंकड़ों के मुताबिक बीते 10 वर्षों के दौरान रायबरेली में संचालित 2,312 छोटे और मध्यम उद्योगों में से 855 या तो बंद हो चुके हैं या फिर उन्होंने बंद करने की अर्जी दी है. इसके अलावा यहां स्थापित 12 बड़े उद्योगों में से आधे बंद हो चुके हैं और जो चल रहे हैं, उनमें से कई बंद होने की कगार पर हैं. बड़ी संख्या में कारखाने बंद होने से रायबरेली में 10,000 मजदूर बेरोजगार हो चुके हैं.

वर्ष 1973 में खुली और 97 एकड़ में फैली दरियापुर इलाके में मौजूद नंदनगंज सिरोही शुगर मिल की मशीनें भी बीते दो वर्षों से खामोश हैं. 15,000 क्विंटल प्रतिदिन गन्ना पेरने की क्षमता वाली शुगर मिल की लगातार बिगड़ रही आर्थिक हालत के चलते इसे बंद कर दिया गया. यहां काम करने वाले सभी 800 कर्मचारी अब वीआरएस लेकर बेरोजगार बैठे हैं. बेरोजगारी का डर रायबरेली की इंडियन टेलीफोन इंडस्ट्री (आइटीआइ) में काम करने वाले 3,000 कर्मचारियों को भी सता रहा है.

1973 में शुरू हुई आइटीआइ के पास इस वक्त कोई काम नहीं होने से यह बंद होने के कगार पर है और कर्मचारी खाली बैठे हैं. रायबरेली में औद्योगिक माहौल तैयार करने का श्रेय पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को जाता है. 1973 से 1975 के बीच इंदिरा गांधी अपने संसदीय क्षेत्र रायबरेली में अमावा रोड पर औद्योगिक क्षेत्र फेज-1 और सुल्तानपुर रोड पर औद्योगिक क्षेत्र फेज-2 का निर्माण कराया.

केंद्र व राज्य में कांग्रेस की सरकार होने के कारण यहां उद्योगपतियों को काफी रियायतें मिलीं. स्थानीय उद्योगपति वाई. के. गुप्ता बताते हैं, ''1989 से जब यूपी में गैर-कांग्रेसी सरकारें बनीं तो रायबरेली में उद्योगों को राज्य स्तर पर मिलने वाली सुविधाएं धीरे-धीरे बंद हो गईं और कारखाने संकट में आ गए.” 1995 के आसपास जब उद्योगों को मिलने वाली सब्सिडी में काफी कटौती कर दी गई तो उद्योगों में तालाबंदी की नौबत आ गई. 'इंडियन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन’ (आइआइए) के रायबरेली चैप्टर के अध्यक्ष प्रेम खुबेले बताते हैं, ''रायबरेली में कृषि आधारित उद्योगों के लिए कच्चा माल मौजूद है, लेकिन कारखाने वे लगे जिनके लिए कच्चा माल उपलब्ध नहीं था. उद्योगों की स्थापना से पहले यहां जरूरी सर्वे नहीं किया गया.” जैसे ही गैर-कांग्रेसी राज्य सरकारों के संबंध कांग्रेस पार्टी से खराब हुए रायबरेली के उद्योग-धंधे बिजली को तरसने लगे. यही नहीं रायबरेली में आज भी उद्योगों की मूलभूत जरूरतें मयस्सर नहीं हैं.

आज स्थिति यह है कि 1975 में सरकार की पहल पर लगे उद्योगों में से 70 फीसदी बंद हो चुके हैं. इनकी जमीन या तो नीलाम हो चुकी है या फिर इनकी जमीन पर दुकानदारों ने अपने गोदाम बना लिए हैं. राजनैतिक विश्लेषक सुरेंद्र सिंह बताते हैं कि उद्योगपतियों ने केंद्र की कांग्रेस सरकार से नजदीकियां बढ़ाने के लिए रायबरेली में कारखाने लगाए. वे कहते हैं, ''1991-2004 के बीच जब गांधी परिवार का रायबरेली से नाता टूटा तो उद्योगपतियों को कारखाना बंद करने में ही मुनाफा दिखा.”

वर्तमान में रायबरेली से सांसद सोनिया गांधी पर भी यहां उद्योगों की दशा सुधारने के लिए गंभीर प्रयास न करने के आरोप लग रहे हैं. स्थानीय उद्योगपति और आइआइए के संस्थापक सदस्य प्रदीप आजाद कहते हैं, ''इंदिरा गांधी छह महीने में रायबरेली के जिला परिषद सभागार में 'डेवलेपमेंट सेमिनार’ करती थीं, जिसमें उद्योगपतियों की समस्याओं का निस्तारण किया जाता था लेकिन सोनिया कभी उद्योगपतियों से नहीं मिलीं.”

सोनिया गांधी के संसदीय क्षेत्र प्रभारी के.एल. शर्मा रायबरेली में उद्योगों के बंद होने के पीछे राज्य सरकार की नीतियों को जिम्मेदार बताते हैं. शर्मा कहते हैं कि रायबरेली ही नहीं प्रदेश का कोई ऐसा जिला नहीं है, जहां कांग्रेस सरकार के दौरान लगाए गए उद्योग संकट में न हों. प्रदेश में उद्योग बदहाल हैं.

शर्मा बताते हैं, ''शीना फैक्टरी बंद होने के पीछे वहां का प्रबंधन जिम्मेदार है. हमने घाटे में चल रही इस फैक्टरी को चलाने के लिए दूसरे उद्योगपति की व्यवस्था की लेकिन प्रबंधन फैक्टरी सौंपने को तैयार नहीं. स्पिनिंग मिल को चलाने के लिए राज्य सरकार से बात की जाएगी. बंद पड़ी दरियापुर की चीनी मिल की जमीन पर ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (एम्स) स्थापित करने का प्रस्ताव है. आइटीआइ के पास काम न होने की समस्या भी दूर की जाएगी.”

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