विवादास्पद भूमि अधिग्रहण बिल पर मंत्रियों के समूह की अगुआई कर रहे शरद पवार कुछ परेशान हैं. प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने उनसे बिल पर संसद के सत्र से पहले आम सहमति जुटाने के लिए कहा था, लेकिन कोई नतीजा न निकला.
अक्तूबर में मंत्रियों के समूह की तीन बैठकें हुईं. 16 अक्तूबर को ए.के. एंटनी ने सुझाव दिया था कि अधिग्रहण से पहले कम-से-कम 90 फीसदी भू-स्वामियों की सहमति हासिल की जानी चाहिए. मंत्रियों के समूह की 67 फीसदी पर सहमति बनी. फौरन बाद सोनिया गांधी ने 80 फीसदी भू-स्वामियों की सहमति प्राप्त किए जाने का तर्क रखते हुए प्रधानमंत्री को एक पत्र लिखा.
29 अक्तूबर को मंत्रियों के समूह ने बिल में बदलाव कर फिर से उसे 80 फीसदी कर दिया. यह तो होना ही था. अब सब कुछ संसद के हाथ में है.

