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विकास का नया गलियारा

तीसरे इंडिया टुडे इंडो-जापान कॉन्क्लेव में दोनों पक्षों ने रणनीतिक, आर्थिक और सांस्कृतिक सहभागिता को और मजबूत करने की बढ़ती महत्वाकांक्षा को प्रमुखता से सामने रखा

22 मई को इंडिया टुडे इंडो-जापान कॉन्क्लेव की तस्वीर
अपडेटेड 13 जून , 2026

सारी दुनिया में इन दिनों व्याप्त अनिश्चितता के बीच 22 मई को दिल्ली में इंडिया टुडे इंडो-जापान कॉन्क्लेव 2026 का आयोजन हुआ. कॉन्क्लेव के इस तीसरे संस्करण में भारत और जापान के बीच मजबूत होते रणनीतिक और आर्थिक संबंधों को प्रमुखता से रेखांकित किया गया. इस आयोजन का विषय 'भारत-जापान: नया विकास गलियारा' था और इसमें सहयोग के नए रास्ते तलाशने के लिए नीति-निर्माता, राजनयिक, विभिन्न कारोबारों के प्रमुख और सांस्कृतिक दूत एक जगह जुटे.

अपने विशेष संबोधन में भारत में जापान के राजदूत ओनो केइची ने 10 लाख करोड़ येन के निजी निवेश प्रस्तावों का जिक्र किया और ऐलान किया कि दोनों देश ''महज अच्छे बयान और सिद्धांतों पर सहमत होने से आगे बढ़ते हुए ठोस सहयोग में जुट गए हैं.'' उन्होंने जापान-भारत आर्थिक सुरक्षा पहल और इसके पांच प्राथमिकता वाले क्षेत्रों का हवाला दिया जिनमें सेमीकंडक्टर, अहम खनिज, सूचना और संचार प्रौद्योगिकी, स्वच्छ ऊर्जा और दवाएं शामिल हैं. 

अपने मुख्य भाषण में दिल्ली के उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू ने जापानी साझेदारी के साथ राष्ट्रीय राजधानी के जीवंत अनुभव के बारे में बताया. उन्होंने कहा, ''दिल्ली मेट्रो सिर्फ एक परिवहन प्रणाली नहीं; यह कार्यकुशलता, समय की पाबंदी, सुरक्षा और स्थिरता का एक मॉडल है.'' इसी बात को आगे बढ़ाते हुए केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि पूर्वोत्तर को पूर्वी और दक्षिण-पूर्वी एशिया के साथ भारत के संपर्क का केंद्रबिंदु बनाने की जरूरत है. उन्होंने इस क्षेत्र में जापानी निवेश, सांस्कृतिक सहयोग और रणनीतिक जुड़ाव का आग्रह किया.

हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि राज्य अब खुद को भारत के सबसे परिपक्व और जापान के लिए तैयार मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम के तौर पर पेश करने में जुटा है. वहीं, केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने कहा कि भारत-जापान के रिश्ते वैश्विक अर्थव्यवस्था को आकार देने वाले दो अहम विषयों टेक्नोलॉजी और व्यापार के केंद्रबिंदु हैं.

रणनीतिक मोर्चे पर मनोहर पर्रीकर इंस्टीट्यूट फॉर डिफेंस स्टडीज ऐंड एनालिसिस (एमपी-आइडीएसए) के महानिदेशक और जापान में भारत के पूर्व राजदूत सुजन आर. चिनॉय ने भारत-जापान रिश्तों को और मजबूत करने का आग्रह किया. उन्होंने कहा कि चीन की बढ़ती आर्थिक-सैन्य ताकत तथा भू-राजनीतिक दबदबे और भारत के आर्थिक शक्ति के रूप में उभरने से इन्हें गति मिली है.

मैन्युफैक्चरिंग पर हुए सत्र में जापान चैंबर ऑफ कॉमर्स ऐंड इंडस्ट्री के भारत इकाई के अध्यक्ष ताकेशी सेओ ने बताया कि पिछले तीन साल से भारत जापानी कारोबारों के लिए निवेश के सबसे संभावनाशील स्थलों में से एक रहा है. इसी आशावाद को दोहराते हुए बेकर टिल्स एएसए इंडिया एलएलपी में जापान प्रैक्टिस के प्रमुख हिमांशु श्रीवास्तव ने कहा कि भारत एक ऐसा शेर है जिसकी भूख बरकरार है और जापान एक बहुत ही अनुभवी शेर है. उन्होंने कहा, ''जरूरत इस बात की है कि हम साथ मिलकर आगे बढ़ें.'' इसी विषय पर फेडएक्स के सेल्स एमडी हेमंत पिंपलीकर ने कहा कि सबसे अहम बात यह है कि हम दुनिया भर में व्यापार को किस तरह आगे बढ़ाते हैं.

मानव पूंजी पर बात करते हुए केंद्रीय कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय की सचिव देवश्री मुखर्जी ने इस पर जोर दिया कि द्विपक्षीय संबंधों को केवल व्यापार सौदों और तकनीकी साझेदारियों ही नहीं, बल्कि लोगों के जरिए नए सिरे से देखने की जरूरत है.

निवेश को बढ़ावा देने के मुद्दे पर भारत में जापान दूतावास के अर्थव्यवस्था और विकास मंत्री फूमियो यामाजाकी ने दो प्राथमिकताओं का जिक्र किया, ''पहली, भारत में मैन्युफैक्चरिंग इंडस्ट्री को सफल बनाना. दूसरी, आर्थिक सुरक्षा, जहां मौजूदा वैश्विक हालात को देखते हुए सप्लाइ चेन को मजबूत बनाने की बुनियादी जरूरत है.''

इस बातचीत से जाहिर हुआ कि व्यापार, प्रौद्योगिकी, बुनियादी ढांचे और संस्कृति क्षेत्र में दोनों देशों की साझेदारी का दायरा बढ़ रहा है.

मेट्रो से महानगर तक: जापान किस तरह से कर सकता है दिल्ली के शहरी भविष्य को नया स्वरूप देने में मदद

उपराज्यपाल सरदार तरनजीत सिंह संधू ने कहा, ''दिल्ली मेट्रो भारत-और जापान के बीच साझेदारी की सबसे बड़ी जीती-जागती मिसाल है. दिल्ली मेट्रो समय की पाबंदी और सुरक्षा का एक आदर्श मॉडल है.''

संधू के मुताबिक, ''हम एक मेट्रो शहर से महानगर की ओर कैसे बढ़ें? महानगर केवल बुनियादी ढांचे से परिभाषित नहीं होता, बल्कि दक्षता, सतत विकास और नवाचार से उसकी पहचान होती है.''

साथ ही उन्होंने कहा, "द्वारका केवल एक आवासीय क्षेत्र ही नहीं, बल्कि ज्ञान-आधारित उद्योग, नवाचार केंद्रों और वैश्विक साझेदारियों का हब बन सकता है. यह जापानी कंपनियों के लिए क्षेत्रीय केंद्र स्थापित करने का एक प्रमुख ठिकाना भी बन सकता है.'' 

सरदार तरनजीत सिंह संधू. उपराज्यपाल, दिल्ली

भारत-जापान: विकास के नये आयाम

जापान के राजदूत ओनो केइची ने कहा, ''हम स्वाभाविक और एक-दूसरे के पूरक साझेदार हैं. जापान को भारत की जरूरत है और भारत को जापान की. अगले साल दोनों देशों के बीच राजनयिक संबंधों के आगाज की 75वीं वर्षगांठ होगी. आइए हम मिलकर इसे यादगार बनाएं.''

आगे ओनो केइची ने कहा, ''हम महज अच्छे बयानों और सिद्धांतों पर सहमति जताने से अब आगे बढ़ते हुए अपने निजी क्षेत्रों के बीच ठोस सहयोग को गति देने की कोशिशों में जुट चुके हैं.'' 

केइची के मुताबिक, जापान और भारत पूरे हिंद-प्रशांत क्षेत्र को ज्यादा सशक्त और समृद्ध बनाने के लिए ठोस सहयोग की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं. हमारे मूलभूत मूल्य और रणनीतिक हित समान हैं.'' 

ओनो केइची, भारत में जापान के राजदूत

स्मार्ट प्रदेश: वैश्विक साझेदारी के वास्ते हरियाणा मॉडल

हरियाणा के सीएम नायब सैनी ने कहा, ''मैं यहां केवल निवेश की बात करने नहीं आया. मैं यहां भरोसे की बात करने आया हूं. एक ऐसा भरोसा, जो पिछले चार दशकों में हरियाणा और जापान के बीच विकसित हुआ है.''

सैनी के मुताबिक, ''देश और राज्य अब केवल प्रोत्साहनों के आधार पर प्रतिस्पर्धा नहीं कर रहे. अब स्पीड, आंतरिक दृढ़ता और साझेदारी को लेकर प्रतिस्पर्धा है. हमारे हिसाब से स्मार्ट राज्य वह है, जो भविष्य को पहले ही समझ ले और समस्याएं उत्पन्न होने से पहले ही निवेशकों की चिंताओं को सुने और उन पर ध्यान दे.'' 

द्विपक्षीय बढ़त: अनिश्चित वैश्विक व्यवस्था में भारत-जापान

जापान में भारत के पूर्व राजदूत रहे सुजन आर. चिनॉय ने कहा, ''स्वामी विवेकानंद ने कहा था कि भारत के हर युवा को कम-से-कम एक बार जापान जरूर जाना चाहिए, ताकि वे खुद देख सकें कि जपान कितना कुछ करने में सक्षम है.''

सुजन आर. चिनॉय के मुताबिक, ''भारत में जापान एक प्रतिष्ठित ब्रान्ड के रूप में स्थापित है. देश के हर हिस्से में साझेदारी के तौर पर इसका स्वागत होता है. यह गुणवत्ता, भरोसा और विश्वसनीयता का प्रतीक माना जाता है.'' 

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