
चेन्नै में रमेशबाबू के घर में शतरंज बस एक ही मकसद से दाखिल हुई—छह साल की बेटी वैशाली का ध्यान टेलीविजन से हटाना. उन्हें और उनकी पत्नी नागलक्ष्मी को जरा भी अंदाजा न था कि न सिर्फ उनकी नन्हीं बिटिया इस खेल को पसंद करने लगेगी बल्कि उसके छोटे भाई प्रज्ञानंद को भी यह खेल रास आ जाएगा, और फिर दोनों ग्रैंडमास्टर बनने वाली पहली भाई-बहन की जोड़ी बनकर इतिहास रच देंगे.
अब 24 बरस की वैशाली रमेशबाबू ने पिछले हफ्ते कैंडिडेट्स टूर्नामेंट जीतकर अपने ताज में एक और हीरा जड़ लिया. इस तरह से पांच बार की विश्व चैंपियन जू वेनजुन को चुनौती देने का मौका हासिल कर लिया. अगर वैशाली चीनी दिग्गज को पछाड़ देती हैं तो वे विश्व चैंपियन बनने वाली पहली भारतीय महिला बनकर इतिहास की किताबों में अपनी जगह पक्की कर लेंगी. कांच के साउंडप्रूफ एक्न्लोजर्स में दुनिया की बेहतरीन खिलाड़ियों के खिलाफ खेलना लंबे वक्त से वैशाली का सपना था.
साइप्रस में अपनी शिष्या को शीर्ष पायदान पर आते देखने के बाद भारत लौट रहे उनके कोच आर.बी. रमेश कहते हैं, ''दोनों भाई-बहन विश्व चैंपियन बनना चाहते हैं.’’ बात सिर्फ इतनी ही नहीं कि वैशाली ने दुनिया के सबसे अव्वल खिलाड़ियों से भरा-पूरा क्लासिक शतरंज का सबसे कठिन मुकाबला जीत लिया. रमेश के लिए ज्यादा गर्व की बात यह है कि शिष्या ने कितने निराले अंदाज में टूर्नामेंट जीता.
वे बोले, ''पूर्वार्ध (सात मैच) में वह संघर्ष कर रही थी. फिर वह स्थिर और शांत हो गई और खुद में ज्यादा भरोसा करने लगी.’’ हमवतन और विश्व कप विजेता दिव्या देशमुख और रूसी ग्रैंडमास्टर अलेक्सांद्रा गोर्याचकिना के खिलाफ वैशाली की जीत को खास बताते हुए रमेश ने कहा, ''दिव्या के खिलाफ उसने ओपनिंग की अपनी तैयारी इस्तेमाल नहीं की और बस अपना खेल खेलने की कोशिश की.
गोर्याचकिना के साथ उन्होंने अच्छा पोजिशनल खेल खेला, दबाव बनाए रखा और गलती करने को मजबूर किया.’’ जगमगाने के लिए ही जन्मीं जब उन्होंने 2014 में रमेश की अकादेमी चेस गुरुकुल में कदम रखा, वे 11 बरस की थीं और प्रज्ञानंद ने तब अंडर-8 का विश्व खिताब जीता ही था. रमेश बताते हैं, ''दोनों पहले ही बहुत दमदार खिलाड़ी थे. वैशाली बेहद मेहनती और आक्रामक खिलाड़ी थीं.’’ रमेश इस कामयाबी का श्रेय उनके माता-पिता को देते हैं.
बस से अकादेमी आते-जाते करीब घंटे भर के सफर में नागलक्ष्मी रोज उनके साथ होतीं. उन्हीं के शब्दों में, ''वे उन पर ज्यादा दबाव नहीं डालते. ज्यादातर माता-पिता उम्मीदों का बोझ बच्चों पर डाल देते हैं. इसका नतीजा निराशा और कुढ़न हो सकता है. इन दोनों बच्चों को अपने मनमुताबिक शतरंज खेलने की आजादी थी.’’ छोटी कद-काठी की, दुबली-पतली और साड़ी में लिपटी नागलक्ष्मी टूर्नामेंटों में जाना-पहचाना चेहरा हैं.
विदेशी धरती पर वे इन बच्चों को भावनात्मक सहारा देती हैं, यहां तक कि उनके लिए सांभर और रसम भी बनाकर उन्हें खिलाती हैं. रमेशबाबू, जिन्होंने बचपन में हुए पोलियो को पहले ही हरा दिया था और बैंक मैनेजर के तौर पर कार्यरत रहे, शुरुआत से ही दोनों बच्चों का करिअर बनाने का काम उत्साह से संभालने लगे. साइप्रस में मीडिया से बात करते हुए वैशाली ने कहा, ''हमारे पिता हमारी सबसे बड़ी ताकत हैं. उन्होंने बहुत त्याग किए हैं.’’
चेसबेस इंडिया को दिए गए एक विरले इंटरव्यू में रमेशबाबू ने भी उन वित्तीय परेशानियों का जिक्र किया जो दो पेशेवर शतरंज खिलाडिय़ों को सहारा देते वक्त आती हैं. वैशाली पीढ़ियों में जन्म लेने वाली एक अनोखी प्रतिभा हैं, यह बात शतरंज के हल्कों में अच्छी तरह जानी-पहचानी थी. बिसात पर ही नहीं बल्कि उससे परे भी. एफआइडीई (फिडे) के चैनल पर उन्होंने एक बातचीत में बताया, ''हर गेम अपने ढंग से नया होता है, कोई दिलचस्प लाइन या विचार मिल जाता है.

यहां तक कि कभी-कभी एक मोहरा गंवाकर भी मुझे बहुत खुशी मिलती है.’’ ऐसे में हैरानी क्या कि दिसंबर 2020 में जब वेस्टब्रिज आनंद चेस एकेडमी (डब्ल्यूएसीए) शुरू हुई तो वैशाली उसमें आमंत्रित किए जाने वाले पहले चार ग्रैंडमास्टरों में से एक—और अकेली महिला—थीं. पूर्व विश्व चैंपियन और डब्ल्यूएसीए के सहसंस्थापक विश्वनाथन आनंद कहते हैं, ''मैं उनके खेल से बहुत प्रभावित था. समय के साथ ज्यों-ज्यों मैं उनके बारे में और जानता गया, मुझे एहसास हुआ कि उनमें जबरदस्त दृढ़ता है. वे दबाव में आसानी से टूटतीं नहीं.’’
फर्श से अर्श पर भले ही वे धुन की पक्की रही हों मगर 2025 वैशाली के लिए सबसे मुश्किल साल था. उन्होंने कैंडिडेट्स के लिए क्वालिफाइ करने की उम्मीद लगभग खो दी थी. वे कहती हैं, ''मेरी (ईलो) रेटिंग गिर गई, सब कुछ गड्ड-मड्ड हो रहा था.’’ चेन्नै ग्रैंडमास्टर में उन्होंने संभावित नौ अंकों में से मात्र एक हासिल किया. इस टूर्नामेंट को कवर कर रहे इंटरनेशनल मास्टर (आइएम) और चेसबेस इंडिया के सहसंस्थापक सागर शाह याद करते हैं कि वैशाली तकरीबन हर गेम में हार गईं. आत्मविश्वास बहुत कम था और अनमनी-सी थीं. फिर परिवार और शतरंज के दोस्तों के सहारे ने मदद की.
वैशाली याद करती हैं, जीएम कार्तिकेयन मुरली ने उनसे कहा, मन में उठ रहे संदेहों से खुद को टूटने मत दो. बाद में चेसबेस इंडिया के साथ एक इंटरव्यू में वैशाली के शब्द थे, ''उन्होंने कहा कि मेरा अपना मोल एक टूर्नामेंट से नहीं आंका जाना चाहिए.’’ उनके भाई प्रज्ञानंद ने उन पर फिडे ग्रैंड स्विस टूर्नामेंट खेलने के लिए जोर डाला, जो उन्होंने जीता और कैंडिडेट्स के लिए लिफाइ कर लिया. वे कहती हैं, ''जब मैं खुद पर संदेह कर रही थी, उन्होंने मुझमें विश्वास बनाए रखा.’’
खेलों की दुनिया में जीत आपको उतना नहीं सिखाती जितना कि हार. आनंद कहते हैं, ''मुश्किल दौर की बहुत ज्यादा चीर-फाड़ नुक्सानदायक हो सकती है. यह प्रयोग करने का, आत्मनिरीक्षण करने का, जांचने का कि आप क्या बदल सकते हैं, और कुछ जोखिम लेने का सबसे अच्छा वक्त होता है.’’ कैंडिडेट्स 2026 में वैशाली को घबराहट भरे लक्वहों का सामना करना पड़ा. उनके अपने शब्दों में, उन्होंने 'डांवाडोल और ऊंचे दबाव वाले गेमों’ से शुरुआत की, जिसकी वजह से लगातार चार ड्रॉ के बाद एक हार मिली.
जीत के बाद फिडे के साथ इंटरव्यू में उन्होंने कहा, ''मैं किस्मत से अंक बटोर रही थी.’’ पूर्व विश्व चैंपियन टैन झोंग्यी की जबरदस्त गलती की बदौलत दूसरी जीत हासिल करने के बाद वैशाली ने ठान लिया कि वे अपने खेल की उत्कृष्टता पर ध्यान देंगी. एक अंक ऊपर और जब बस तीन राउंड बचे, वे चीनी ग्रैंडमास्टर झू जिनर से हार गईं. वैशाली को करीब से देखते आ रहे शाह कहते हैं, ''झू से उस हार के बाद कइयों के लिए आगे का रास्ता बंद हो जाता...लेकिन उन्होंने मुश्किल हालात में शांत रहकर आगे बढ़ने का रास्ता खोजा.’’
एक बार फिर वैशाली ने उन्हें शांत और स्थिर बनाए रखने के लिए अपनी टीम का शुक्रिया अदा किया. उस टीम में जीएम प्रणेश एम. भी थे, जिन्हें मिजाज को हल्का-फुल्का रखने और ब्लिट्ज गेमों की शुरुआत की योजना बनाने और खेलने में मदद के लिए लाया गया था. उल्टी गिनती शुरू सन 2011 में ग्रैडमास्टर कोनेरु हम्पी विश्व चैंपियन के तख्त के मुकाबले में उतरने वाली पहली और आखिरी भारतीय महिला थीं.
आनंद उनमें और वैशाली में समानताएं देखते हैं—दोनों खेल की जबरदस्त छात्राएं हैं, जिनमें लंबे करिअर की सूझबूझ और अक्लमंदी है. इस वक्त जब वैशाली गहन तैयारी के दौर के लिए कमर कस रही हैं, आनंद उन्हें कुछ बेशकीमती सलाह देते हैं. वे कहते हैं, ''हालांकि यह मौका ऐसा है कि उन पर बहुत ज्यादा दबाव होगा, आखिर में यह बस शतरंज ही तो है. यह बस आने और अच्छा खेल खेलने की बात है.’’
कोच रमेश पर वैशाली को इस लंबी लड़ाई के लिए तैयार करने की जिम्मेदारी आन पड़ी है. मगर वे अपनी 'सबसे मेहनती छात्रा’ को लेकर ज्यादा परेशान नहीं हैं. वे कहते हैं, ''ऐसे भी लोग हैं जो किसी भी चीज का अधिकार हासिल किए बिना जिंदगी के हरेक पहलू में महान चीजें चाहते हैं. वैशाली ने शतरंज पर ध्यान देने के लिए बहुत सारे त्याग किए हैं. खेल के प्रति उनकी प्रतिबद्धता, अनुशासन... ये सब वे खूबियां हैं जो महान चैंपियन बनने के लिए जरूरी हैं.’’
यह रही मात वैशाली 30 मार्च को साइप्रस में 2026 कैंडीडेट्स टूर्नामेंट के दौरान वैशाली और प्रज्ञानंद पर माता-पिता की ओर से बहुत कम दबाव है, इसलिए उन्हें अपनी पसंद के अनुसार खेलने की स्वतंत्रता मिलती है. वे मेरे जानने वाले सबसे मेहनती खिलाड़ियों में से हैं. आर.बी. रमेश, कोच वैशाली बहुत मजबूत हैं. हार की स्थिति में भी वे पूरी तरह से हार नहीं मानतीं... वे कठिन परिस्थितियों में भी कई मुकाबले पलट देती हैं.
विश्वनाथन आनंद पूर्व विश्व चैंपियन; सह-संस्थापक, वेस्टब्रिज आनंद चेस अकादेमी परिवार का अभिमान 19 अप्रैल को चेन्ने हवाई अड्डे पर अपने परिवार के साथ वैशाली मोहरों की मल्लिका ज्यादातर शतरंज प्रतिभाओं की तरह, वैशाली ने कम उम्र से ही 64 खानों पर राज किया वैशाली ने 2012 और 2015 में (अंडर-12 और अंडर-14) गर्ल्स वर्ल्ड यूथ शतरंज चैंपियनशिप जीती 2023 में फिडे ग्रैंड स्विस टूर्नामेंट जीता, 2024 कैंडिडेट्स के लिए क्वालिफाइ किया.
2024 में 45वें शतरंज ओलंपियाड में बोर्ड दो पर खेलीं, जहां भारतीय महिलाओं ने अपना पहला स्वर्ण पदक जीता 2024 में अर्जुन अवॉर्ड प्राप्त, ऐसा करने वाली 7वीं महिला शतरंज खिलाड़ी; शतरंज में 20 से अधिक पुरस्कार जीते 2026 कैंडिडेट्स जीतकर विश्व चैंपियन बनने की चुनौती देने वाली दूसरी भारतीय महिला बनीं 2013 में चेन्नै में मैग्नस कार्लसन के साथ खेले गए प्रदर्शनी मैच के बाद सुर्खियों में आईं.
2023 में ग्रैंडमास्टर (जीएम) बनीं, कोनेरू हंपी और हरिका द्रोणावल्ली के बाद यह खिताब पाने वाली तीसरी भारतीय महिला 2024 कैंडिडेट्स में कठिन पहले हाफ के बाद लगातार पांच मैच जीतकर दूसरे स्थान पर रहीं 2025 फिडे ग्रैंड स्विस टूर्नामेंट जीता, 2026 कैंडिडेट्स में जगह पक्की की अगले साल की शुरुआत में पांच बार की चीनी विश्व चैंपियन झू वेनजुन का सामना करेंगी.

