हैदराबाद के मशहूर रेस्तरां शाह गौस ने बिरयानी गैस पर पकाना बंद कर दिया. यह रेस्तरां जलाऊ लकड़ी पर आ गया. देश भर के हजारों दूसरे रेस्तरां भी यही कर रहे हैं. इसकी वजह ईरान की जंग कही जा सकती है, जिसने भारत का व्यावसायिक एलपीजी का अब तक का सबसे बदतर संकट पैदा किया. देश में कोई पांच लाख से ज्यादा रेस्तरांओं में से करीब 90 फीसद एलपीजी से खाना पकाते हैं.
करीब 60 फीसद एलपीजी पश्चिम एशिया से आयात की जाती है. अचानक आपूर्ति में आई कमी ने रेस्तरांओं में काम करने वाले 85 लाख लोगों के लिए रोजी-रोटी का संकट खड़ा कर दिया. दिल्ली में 19 किलो के व्यावसायिक सिलेंडर की कीमत दिसंबर में 1,580.50 रुपए से बढ़कर 22 मार्च को 1,884.50 रुपए पर पहुंच गई.
सरकार की प्राथमिकता घरेलू आपूर्ति थी, इसलिए कालाबाजारी होने लगी. इंडियन होटल ऐंड रेस्तरां एसोसिएशन ने 10 मार्च को बताया कि मुंबई के 20 फीसद होटल/रेस्तरां बंद हो गए. बेंगलूरू में 40,000 से ज्यादा प्रतिष्ठानों ने रसोई पर ताले डाल दिए.
व्हाइटफील्ड सरीखे आइटी कॉरिडोर में पेइंग गेस्ट के तौर पर रह रहे दस लाख से ज्यादा लोगों ने देखा कि हॉस्टलों ने अपने मेनू से डोसा, चपाती और रोटी हटा दीं. सीनियर सेल्स एग्जीक्यूटिव मार्टिन एम. कहते हैं, ''हम पिछले कुछ दिनों से टोस्ट, इलेक्ट्रिक हीटर पर उबले अंडे और फल खा रहे हैं.’’ सबसे ज्यादा असर सड़क किनारे ठेला लगाने वालों, ढाबों और क्लाउड किचन पर पड़ा.
क्या किया जा रहा
राज्यों की प्रतिक्रियाएं अलग-अलग रहीं. दिल्ली ने रेगुलेटेड कमर्शियल एलएनजी की आपूर्ति शहर की औसत दैनिक 9,000 सिलेंडरों की खपत के 20 फीसद तक सीमित कर दी और 42 फीसद हिस्सा रेस्तरांओं को दिया. पेट्रोलियम सचिव नीरज मित्तल ने 21 मार्च को सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों को लिखा कि 23 मार्च से व्यावसायिक एलपीजी का आवंटन 20 फीसद बढ़ाया गया है, जिससे आपूर्ति संकट से पहले के स्तर के 50 फीसद पर पहुंच गई है.
प्राथमिकता रेस्तरांओं, ढाबों, होटलों, औद्योगिक कैंटीनों और फूड प्रोसेसिंग इकाइयों को दी जानी है, लेकिन व्यावसायिक उपभोक्ताओं को तेल मार्केटिंग कंपनियों के साथ रजिस्टर करना और पीएनजी कनेक्शन का आवेदन करना होगा.
और क्या करने की जरूरत
बहरहाल, नेशनल रेस्टोरेंट एसोसिएशन ऑफ इंडिया के प्रेसिडेंट सागर दरयानी राज्य सरकारों से सेक्टर के लिए ज्यादा एलपीजी आवंटन का अनुरोध कर रहे हैं, जिसे महामारी के दौरान अनिवार्य सेवा की श्रेणी में रखा गया था. प्रभावित लोगों को वित्तीय राहत पैकेज मिलना चाहिए. साथ ही पीएनजी का विस्तार और इलेक्ट्रिक तथा सौर ऊर्जा से चलने वाले उपकरणों को अपनाया जाए.

