यूसुफ अब्दुल गनी: भारत में जॉर्डन के राजदूत
भारत में जॉर्डन के राजदूत यूसुफ अब्दुल गनी ने पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच अपने देश के रुख को स्पष्ट करते हुए शांति, तटस्थता और क्षेत्रीय संप्रभुता के सम्मान को सबसे महत्वपूर्ण बताया. इंडिया टुडे कॉन्क्लेव में उन्होंने जोर दिया कि अशांत क्षेत्र में होने के बावजूद जॉर्डन ने हमेशा विवादों के शांतिपूर्ण समाधान का रास्ता चुना है.
अब्दुल गनी ने अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की तरफ से जंग के बाद ईरान का नक्शा बदलने और ग्रेटर इज्राएल की चर्चा को 'निरर्थक’ करार देते हुए खारिज कर दिया और तर्क दिया कि मौजूदा परिदृश्य कायम रखना बेहद जरूरी है.
जॉर्डन की तटस्थता इस्राइल का समर्थन करना है, इस तरह की आलोचना के जवाब में अब्दुल गनी ने इस बात पर जोर दिया कि उनका देश किसी पक्ष का समर्थन नहीं करता और अपनी संप्रभुता की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है.
संघर्ष से पहले जॉर्डन ने मिसाइल दागने के लिए ईरान और इज्राइल दोनों से उसके हवाई क्षेत्र का इस्तेमाल न करने का अनुरोध किया था. उन्होंने खाड़ी में नागरिक ठिकानों पर हमलों के साथ अमेरिकी हमले की भी निंदा की और कहा कि जॉर्डन भी इससे प्रभावित हुआ है.
अब्दुल गनी ने भारत-जॉर्डन की बढ़ती साझेदारी को रेखांकित किया और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और किंग अब्दुल्ला द्वितीय की मित्रता, नवीकरणीय ऊर्जा और उर्वरकों में सहयोग तथा अगले पांच वर्षों में द्विपक्षीय व्यापार तीन अरब डॉलर से बढ़ाकर पांच अरब डॉलर करने के लक्ष्य का उल्लेख किया. उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया में स्थायी शांति वैश्विक स्थिरता के लिए जरूरी है, जिसमें भारत के रणनीतिक और आर्थिक हित भी शामिल हैं.
युद्ध से कुछ हासिल नहीं होता. यह केवल लोगों की पीड़ा और मुश्किलें बढ़ाता है. यह ऊर्जा संकट का सबब बनता है और लोगों के आपसी संबंधों में भी दरार पैदा करता है.
पश्चिम एशिया के एक स्थिर मानचित्र को बदलने का कोई तुक नहीं—जॉर्डन इस इलाके और इससे बाहर भी सभी देशों की क्षेत्रीय संप्रभुता में विश्वास करता है.

