टीम सबसे पहले है. बाकी सब उसके बाद. टी20 विश्व कप की फतह के कुछ दिन बाद इंडिया टुडे कॉन्क्लेव में बोलते हुए भारत की ओपनिंग जोड़ी संजू सैमसन और अभिषेक शर्मा ने यही मूल संदेश दिया. संजू ने कहा कि जुलाई 2024 में श्रीलंका सीरीज से ही, जब नए हेड कोच गौतम गंभीर के मातहत सूर्यकुमार यादव ने टी20 की कप्तानी संभाली, संदेश साफ और दोटूक था: ''निजी उपलब्धि पर ध्यान नहीं.
हर फैसला यह पूछकर लिया जाता है कि फिलहाल टीम की जरूरत क्या है.’’ इस विश्व कप के प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट चुने गए संजू ने कहा, ''लोग भले कहें कि मैं तीन शतक से चूक गया, लेकिन कहीं ज्यादा बड़ा काम हुआ है. मैं मानता हूं कि मैंने टीम के लिए सचमुच बहुत अच्छा योगदान दिया.’’ उन तीन आखिरी मैचों में उनका स्कोर था: 97 नाबाद, 89, 89.
अभिषेक की तो शुरुआत ही खराब हुई. शुरुआती मैच से पहले वे बीमार पड़ गए. उन्होंने याद किया, ''मैं ठीक से खड़ा भी नहीं हो पा रहा था.’’ उसके बाद लगातार तीन बार शून्य पर वे आउट हुए. मगर सूर्यकुमार यादव ने उन्हें सीधा-सा भरोसा दिलाया: ''अगर तू अगले मैच में भी जीरो बनाता है, तो भी मैं पक्का करूंगा कि तू फाइनल खेले.’’
अभिषेक ने कहा, ''यह विश्वास था, यह टीम का माहौल था हमारे यहां—केवल इस टूर्नामेंट में ही नहीं बल्कि इन दो सालों के पूरे सफर के दौरान.’’ उन्होंने यह भी कहा, जब अच्छा परफॉर्म करने का दबाव ''आपके ऊपर से हट जाता है’’, तब ''मैदान में उतरकर अपना स्वाभाविक खेल खेलना और टीम के लिए अच्छा प्रदर्शन करना कहीं ज्यादा आसान हो जाता है.’’ फाइनल में उन्होंने ठीक यही किया, और 18 गेंदों पर ताबड़तोड़ 50 रन जड़े.
संजू को झटके और जरा पहले लगे. जनवरी में न्यूजीलैंड के खिलाफ खराब सीरीज के बाद भारत के विश्व कप एकादश में उनकी जगह तक संदेहों से घिर गई. उन्होंने कहा, ''मैं पूरी तरह टूट गया था.’’ मगर इस विकेटकीपर-बल्लेबाज ने 'फिर से तैयारी’ शुरू की.
सुपर 8 में दक्षिण अफ्रीका से हारने के बाद दांव बहुत ऊंचे हो गए—कप अपने पास बनाए रखने के लिए 'चार में से चारों जीतने’ थे. तभी संजू ने खुद से कहा कि टीम की जरूरत है कि ''तुम आगे बढ़कर जिम्मेदारी संभालो.’’
अभिषेक के साथ उनकी साझेदारी में हालांकि शायद ही कभी तनाव दिखा हो. संजू ने कहा, ''मैदान पर हमारे बीच एक तरह की मलयाली-पंजाबी दोस्ती चल रही थी. हम चीजों को ज्यादा मुश्किल नहीं बनाते... गेंद सीधी आ रही है, तो मारो.’’ अभिषेक संजू के शांत सहारे पर भरोसा करते हैं, ''आपको लगता है कि कोई आपके पीछे है.’’ संजू मैदान पर और मैदान से बाहर भी अभिषेक के साथ साझेदारी को अहमियत देते हैं: ''यह बहुत बहादुर और खुले दिल का लड़का है.’’
दोनों कामयाबी का श्रेय अपने घरों को देते हैं. खुद क्रिकेटर रह चुके अभिषेक के पिता के लिए, बकौल अभिषेक, ''मुझे इस दौर से गुजरते देखना आसान न था...हर मैच के लिए आना...हर चीज आजमाना, यहां तक कि पूजा-पाठ भी, जो उन्होंने कभी किया नहीं था.’’
सैमसन के पिता ने शुरू में ही एक अहम फैसला लिया. वे दिल्ली की नौकरी छोड़ केरल चले गए ताकि बेटा क्रिकेट को गंभीरता से आगे बढ़ा सके. संजू ने कहा, ''सब उनके विजन का हिस्सा था. मैं बहुत खुश हूं कि यह सच हो रहा है.’’

