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इस युद्ध के और भी कई निष्कर्ष

नजारियन ने तर्क दिया कि यह संघर्ष ऐसे समय में हो रहा है जब वैश्विक गठबंधन बदल रहे हैं और ऊर्जा सुरक्षा पर दबाव है. उन्होंने कहा कि उभरती नई व्यवस्था 'शीत युद्ध 2.0’ जैसी हो सकती है.

The Great Reordering Power Shifts and the Next Global Order
जियोपॉलिटिकल कंसल्टेंट एडेल नाज़ेरियन
अपडेटेड 3 अप्रैल , 2026

जियोपॉलिटिकल कंसल्टेंट: एडेल नाजेरियन

यह जंग भू-राजनीतिक होड़ का हिस्सा है और एक नई वैश्विक व्यवस्था को आकार दे रहा है. भू-राजनीतिक सलाहकार एडेल नजारियन ने इंडिया टुडे कॉन्क्लेव में मुख्य तौर पर यही बात कही. उनके मुताबिक, हालांकि युद्धों में मानवीय स्तर पर शायद ही कोई विजेता बनता हो लेकिन वे अक्सर राष्ट्रों के बीच रणनीतिक पुनर्गठन को गति देते हैं.

उनका मानना है कि वर्तमान संघर्ष से अमेरिका और भारत के बीच रिश्ते और गहरे होंगे, साथ ही खाड़ी सहयोग परिषद के देश पश्चिम के करीब आएंगे. उन्होंने यह भी कहा कि ईरान का भविष्य ''ईरानी जनता को तय करना है. मुझे नहीं लगता कि किसी भी तरह के हस्तक्षेप के बिना कोई वास्तविक, प्रभावी परिवर्तन हो सकता है.’’

नजारियन ने तर्क दिया कि यह संघर्ष ऐसे समय में हो रहा है जब वैश्विक गठबंधन बदल रहे हैं और ऊर्जा सुरक्षा पर दबाव है. उन्होंने कहा कि उभरती नई व्यवस्था 'शीत युद्ध 2.0’ जैसी हो सकती है, जो न केवल सैन्य शक्ति से बल्कि तकनीकी प्रतिस्पर्धा और रणनीतिक संसाधनों से भी आकार लेगी क्योंकि देश परंपरागत किस्म की तेल निर्भरता से इतर दुर्लभ खनिजों पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं.

एडेल नजारियन, जियोपॉलिटिकल कंसल्टेंट
युद्ध से मानवीय स्तर पर किसी को लाभ नहीं होता लेकिन भू-राजनीतिक लिहाज से यह एक बड़ी चुनौती है और नई वैश्विक व्यवस्था बनाने की एक प्रतिस्पर्धा है.

उभरती नई व्यवस्था शीत युद्ध 2.0 जैसी हो सकती है, जिस पर न केवल सैन्य शक्ति बल्कि तकनीकी प्रतिस्पर्धा और रणनीतिक संसाधनों का भी पूरा प्रभाव दिखेगा. 

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