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अब जंगजुओं को उतारने की जरूरत ही नहीं

आम राय यह थी कि भारत को एआइ से जोड़ने में तेजी लाने, खरीद में सुधार करने और बड़े पैमाने पर मजबूत रक्षा-टेक इकोसिस्टम बनाने की जरूरत है.

AI & DEFENCE War’s New Rule Book
एआई और डिफेंस के मुद्दे पर बात रखते वक्ता
अपडेटेड 3 अप्रैल , 2026

एआइ और डिफेंस: युद्ध की नई नियमावली: रणभूमि में सब कुछ ड्रोन, एआइ और टेक्नोलॉजी से संचालित

दुनिया में युद्ध के तौर-तरीकों में आमूलचूल बदलाव आ रहा है. इंडिया टुडे कॉन्क्लेव में तीन सैन्य विशेषज्ञों ने कहा कि अकेले एआइ ही नहीं बल्कि क्वांटम कंप्यूटिंग, रोबोटिक्स और ड्रोन स्वार्म सरीखी टेक्नोलॉजी का मिलन आधुनिक रणभूमियों को नए सिरे से परिभाषित कर रहा है.

लेफ्टिनेंट जनरल राज शुक्ल ने हाल के टकरावों की मिसाल देते हुए बताया कि कैसे एआइ के जरिए उपग्रहों से लेकर सोशल मीडिया तक डेटा के भारी-भरकम आंकड़ों को प्रोसेस करके लक्ष्यों पर आनन-फानन हमले किए जा सकते हैं.

निकुंज पाराशर ने समुद्री पहलू पर बात करते हुए जोर देकर कहा कि खासकर होर्मुज जलडमरूमध्य सरीखे बेहद अहम अवरोध बिंदुओं के आसपास समुद्र पर नियंत्रण और समुद्र में दुश्मन की पहुंच को रोकने का सामरिक महत्व बढ़ रहा है.

स्मित शाह ने क्षमता और पैमाने के बीच फासले की तरफ इशारा किया. भारत में उन्नत ड्रोन टेक्नोलॉजी पर काम कर रहे हुनरमंद इंजीनियरों और स्टार्टअप का मजबूत आधार है लेकिन खरीद की निरंतर प्रक्रियाओं के न होने से विकास में बाधा पड़ रही है.

आम राय यह थी कि भारत को एआइ से जोड़ने में तेजी लाने, खरीद में सुधार करने और बड़े पैमाने पर मजबूत रक्षा-टेक इकोसिस्टम बनाने की जरूरत है. 

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