तमिलनाडु की जंग: कौन जीतेगा 2026
तमिलनाडु में अप्रैल में चुनाव होने हैं, ऐसे में प्रतिद्वंद्वी गठबंधनों—द्रविड़ मुनेत्र कलगम (द्रमुक)-कांग्रेस और अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कलगम (अन्नाद्रमुक)-भाजपा—ने इंडिया टुडे कॉन्क्लेव में शुरुआती दौर में ही तीखी बहस छेड़ दी.
द्रमुक की तमिलाची तंगपांडियन और कांग्रेस के कार्ति चिदंबरम ने 234 सदस्यीय विधानसभा के लिए चुनाव में अपने धर्मनिरपेक्ष प्रगतिशील गठबंधन—इंडिया ब्लॉक का हिस्सा—के जीतने का भरोसा जताया.
उनके मुताबिक, मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन की सकारात्मक, मिलजुलकर चलने वाली छवि और सरकार के अच्छे प्रदर्शन के कारण ही उन्हें जीत हासिल होने की उम्मीद है.
भाजपा की तमिलिसाई सुंदरराजन और अन्नाद्रमुक के कोवै सत्यन ने आरोप लगाया कि स्टालिन के ''कुशासन ने राज्य को अंधकार में धकेल दिया है क्योंकि महिलाओं की सुरक्षा और कानून-व्यवस्था बेहद दयनीय है.’’
हालांकि, दोनों विरोधी खेमे इस पर जरूर एकमत रहे कि अभिनेता विजय की पार्टी तमिलगा वेत्रि कलगम (टीवीके) उनको नुकसान पहुंचा सकती है लेकिन इस नए खिलाड़ी को सीटों का ज्यादा फायदा नहीं होने वाला. सत्यन ने कहा, ''विजय के नाम का शोर ज्यादा है.
लेकिन एक लोकप्रिय स्टार होने के नाते वे हर पार्टी के वोटों में सेंध जरूर लगाएंगे.’’ कार्ति ने कहा, ''विजय के पास अच्छी खासी फैन फॉलोइंग है, जो शायद वोट बेस में तब्दील हो सकती है लेकिन सीटें मिलना आसान नहीं होगा. हालांकि, दोनों ही गठबंधनों को नुकसान जरूर पहुंचाएंगे.’’
चर्चा में महिलाओं और लड़कियों के खिलाफ अपराधों और नशीले पदार्थों का मुद्दा उठा. सत्यन ने दावा किया कि तमिलनाडु पंजाब को पीछे छोड़कर 'भारत का नशीले पदार्थों का गढ़’ बन चुका है.
सत्ता-विरोधी लहर का मुद्दा भी छाया रहा. तमिलाची ने जहां स्टालिन के खिलाफ सत्ता-विरोधी लहर नहीं होने का दावा किया, वहीं तमिलिसाई ने कहा कि एनडीए सत्ता-विरोधी लहर के कारण ही जीत हासिल करेगा. भाजपा की पूर्व प्रदेश अध्यक्ष ने द्रमुक के अधूरे वादों का मुद्दा उठाया, जिनमें शराब की दुकानों की संख्या घटाना और भ्रष्टाचार पर लगाम कसना शामिल है. बहरहाल बहस का नतीजा चुनाव के बाद ही सामने आएगा.

