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नजरिया ईरान का

भारत में खामेनेई की गहरी दिलचस्पी और उसके बहुलतावादी समाज के प्रति सम्मान को भी प्रमुखता से सामने रखा.

From Sacred Rule to State Ayatollah Khamenei’s Iran Toda
डॉ. अब्दुल माजिद हकीम इलाही
अपडेटेड 2 अप्रैल , 2026

डॉ. अब्दुल माजिद हकीम इलाही: ईरान के सुप्रीम लीडर के प्रतिनिधि

भारत में ईरान के सर्वोच्च नेता के नुमाइंदे डॉ. अब्दुल माजिद हकीम इलाही ने कहा कि दिवंगत आयतुल्ला अली खामेनेई ने 'शहादत’ हासिल कर ली है. उन्होंने नए नेतृत्व के हाथों में सत्ता सौंपे जाने का बचाव किया. इंडिया टुडे कॉन्क्लेव 2026 में बोलते हुए उन्होंने भारत के साथ ईरान के सभ्यतागत रिश्तों को रेखांकित किया और जोर देकर कहा कि 'तेहरान युद्ध नहीं चाहता.’’

इलाही ने यह भी कहा कि दिवंगत नेता ने अपनी जान को खतरा होने के बावजूद निजी सुरक्षा बढ़ाने—गुप्त जगह पर या बंकर में जाने—से जानबूझकर इनकार कर दिया था. उन्होंने कहा, ''उनका मानना था कि अगर ईरान के लोगों को सुरक्षित ठिकाने नहीं मिल सकते, तो उन्हें खुद अपने लिए विशेष सुरक्षा नहीं लेनी चाहिए.’’ इसे उन्होंने नेतृत्व और नागरिकों के बीच बराबरी के फलसफे के हिस्से के तौर पर पेश किया.

इलाही ने खामेनेई की मौत को अल्लाह की राह में शहादत की शिया अवधारणा के दायरे में रखा. इलाही ने भारत में खामेनेई की गहरी दिलचस्पी और उसके बहुलतावादी समाज के प्रति सम्मान को भी प्रमुखता से सामने रखा. इलाही ने नए सर्वोच्च नेता मुज्तबा खामेनेई, को ऐसा 'बौद्धिक और दार्शनिक विचारक’ बताया जो अपने वालिद की तरह ही सीधी-सादी जिंदगी जीते हैं.

मौजूदा संघर्ष में ईरान की कार्रवाइयों का बचाव करते हुए इलाही ने कहा कि तेहरान पर दूसरों ने हमला किया और वह अपनी आत्मरक्षा में कार्रवाई कर रहा है. उन्होंने जोर देकर कहा कि इस्लाम इनसानी जिंदगी की पवित्रता को बहुत ऊंची अहमियत देता है, लेकिन ईरान को अपने लोगों की हिफाजत करने की जरूरत थी और इसलिए उसने क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी अड्डों पर हमले किए.

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