
जब कोई देश अपने वार्षिक बजट का 4 फीसदी यानी करीब 17 लाख करोड़ रुपए केवल इन्फ्रास्ट्रक्चर पर खर्च करने का संकल्प लेता है, तो उस पर होने वाली चर्चा न तो छोटी हो सकती है और न ही नीरस. 25 फरवरी को आयोजित इंडिया टुडे इंफ्रास्ट्रक्चर कॉन्क्लेव के तीसरे संस्करण में ऐसे ही एक व्यापक खाके की झलक देखने को मिली.
उसमें परिवहन, मैन्युफैक्चरिंग और टेक इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में वैश्विक मानकों को हासिल करने की दिशा में बढ़ते भारत की योजनाओं पर चर्चा हुई. इसमें शीर्ष राजनेता, नौकरशाह, शिक्षाविद् और उद्योग जगत के अगुआ शामिल हुए और उन्होंने अब तक की उपलब्धियों, आगे की राह और चुनौतियों पर मंथन किया.
सबकी नजरें नितिन गडकरी पर टिकी थीं. उन्होंने ऐलान किया कि अगले दो वर्षों में देश के राजमार्ग अमेरिका के बराबर हो जाएंगे. तो सर्बानंद सोनोवाल ने गर्व के साथ बताया कि भारतीय बंदरगाहों पर जहाजों का टर्नअराउंड टाइम अब अमेरिका या कनाडा से भी कम हो गया है.
इंडियन रेलवे फाइनेंस कॉर्पोरेशन के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक मनोज कुमार दुबे के मुताबिक, इस साल के बजट में घोषित सात हाइ-स्पीड रेल कॉरिडोर के निर्माण में धन कोई बाधा नहीं है. दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर विकास कुमार ने राजधानी की मेट्रो लाइनों के विस्तार की योजनाओं की तफसील से जानकारी दी, जबकि आइआइटी दिल्ली की प्रो. गीतम तिवारी ने रेखांकित किया कि लास्ट-माइल कनेक्टिविटी यानी अंतिम छोर तक संपर्क अब भी एक बड़ी चुनौती है.

अकासा एअर केफाउंडर-सीईओ विनय दुबे ने विमानन क्षेत्र में महत्वाकांक्षी दावे करते हुए कहा कि इंडिगो और एअर इंडिया सरीखे दिग्गजों के आधिपत्य वाले क्षेत्र में उनकी नई एअरलाइन अपनी पहचान बनाएगी. दिल्ली इंटरनेशनल एअरपोर्ट लिमिटेड के सीईओ विदेह कुमार जयपुरियार ने कहा कि दिल्ली वैश्विक विमानन हब बनने की दिशा में आगे बढ़ रही है.
मगर सेंटर फॉर एविएशन के सीईओ कपिल कौल ने याद दिलाया कि यह लक्ष्य हासिल करना जितना आसान दिखता है, उससे कहीं ज्यादा चुनौतीपूर्ण होगा.
तकनीकी क्षेत्र में भारत के एआइ मिशन के सीईओ अभिषेक सिंह ने हाल ही आयोजित एआइ समिट के बाद आत्मविश्वास जताते हुए कहा कि भारत समय के साथ उभरती एआइ तकनीक के विकास में अमेरिका और चीन को पीछे छोड़ने की योजना बना रहा है.
इस कॉन्क्लेव ने साफ किया कि भारत की इंफ्रास्ट्रक्चर संबंधी महत्वाकांक्षाएं अब वैश्विक स्तर की हैं. देश केवल बराबरी करने नहीं बल्कि नेतृत्व करने की दिशा में आगे बढ़ना चाहता है.

