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योगी सरकार को दो हफ्ते पहले क्यों लाना पड़ गया यूपी का बजट?

योगी सरकार ने वित्तीय वर्ष 2024-25 के लिए पेश किया 7.36 लाख करोड़ रुपए का अब तक का सबसे बड़ा बजट

 उत्तर प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ के साथ वित्तमंत्री सुरेश खन्ना
उत्तर प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ के साथ वित्तमंत्री सुरेश खन्ना
अपडेटेड 20 फ़रवरी , 2024

उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ सरकार के दूसरे कार्यकाल का तीसरा बजट इस बार नई ऊंचाइयां छू रहा था. 5 फरवरी को वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने विधानसभा में जैसे ही यह शेर 'हौसले दिल में जब मचलते हैं, आंधियों में चिराग जलते हैं' पढ़कर वित्त वर्ष 2024-25 के प्रावधानों को बताना शुरू किया, सत्ता पक्ष के विधायकों ने एक साथ मेजें थपथपा कर स्वागत किया. हालांकि पूरे बजट भाषण के दौरान रुक-रुक कर थोड़ी बहुत मेजें थपथपाई जाती रहीं लेकिन करीब एक घंटे के बाद ये मेजें एकसाथ फिर थपथपाई गईं जब बजट भाषण के अंत में खन्ना ने प्रस्तुत बजट का आकार 7.36 लाख करोड़ रु. का होने की सूचना सदन को दी.

इस तरह यूपी का यह बजट अपने आकार में अब तक का सबसे बड़ा बजट था. इतने बड़े बजट और उसे खर्च करने की चुनौती का एहसास सरकार को था. इसलिए आमतौर पर 20 फरवरी के आसपास पेश होने वाला यूपी का बजट इस बार दो हफ्ते पहले सदन में रखा गया. इस जल्दबाजी को करीब आ चुके लोकसभा चुनाव की आचार संहिता और फरवरी के मध्य में शीर्ष भाजपा नेताओं की दिल्ली में होने वाली बैठक से जोड़ा जा रहा है.

वर्ष 2024-25 के लिए भारी भरकम बजट को खर्च करने की बड़ी चुनौती प्रदेश की योगी सरकार के सामने है. चुनौती इसलिए और भी कठिन है क्योंकि इस बार लोकसभा चुनाव के चलते मार्च से लेकर मई तक आचार संहिता लागू रहेगी. अगर पिछले वर्षों के बजट के खर्च पर नजर डालें तो सरकारी तंत्र की हीलाहवाली साफ नजर आती है. पिछले वर्ष चालू वित्तीय वर्ष 2023-24 के लिए योगी सरकार ने मूल बजट से 6,90,242 करोड़ रुपए की व्यवस्था करने के साथ 28,761 करोड़ रुपए का इंतजाम अनुपूरक बजट के जरि‍ए भी किया था. इस तरह लोकसभा चुनाव के मद्देनजर योगी सरकार ने चालू वित्तीय वर्ष में 7,19,003 करोड़ रुपए से प्रदेश के विकास का खाका खींचा था.

पिछले वर्ष मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जब बजट के खर्च का ब्योरा तलब किया तो पता चला कि नवंबर-2023 तक मूल बजट का 47 फीसद यानी 3,23,033 करोड़ रुपए ही खर्च हो पाए हैं. मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को कार्रवाई की चेतावनी दी. फिर वित्त मंत्री ने बजट खर्च में कमजोरी दिखाने वाले डेढ़ दर्जन विभागों के अपर मुख्य सचिवों के साथ बैठक की. उसके बाद अधिकारियों ने योजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी लाकर बजट के उपयोग पर ध्यान देना शुरू किया.

खन्ना बताते हैं, "जारी वित्तीय वर्ष के बजट का 60 फीसद खर्च किया जा चुका है. सरकार बिना देर किए बजट की एक-एक पाई जनता के कल्याण में लगाने को प्रतिबद्ध है."

यह पहला मौका नहीं है जब बजट की धनराशि खर्च करने में अफसरों की सुस्ती बाधक बनी हो. वित्त वर्ष 2022-23 के दस महीने पूरे होने पर 55 विभाग आवंटित बजट का 50 फीसद भी नहीं खर्च कर सके थे. बीते वर्ष 28 जनवरी को मुख्यमंत्री की समीक्षा में सामने आया कि कुल 6,49,289 करोड़ रुपए के बजट में से 25 जनवरी, 2023 तक सभी विभाग मिलकर कुल 3,57,914 करोड़ रुपए ही खर्च कर पाए थे, जो कुल बजट का महज 55 फीसद था.

योगी की फटकार के बाद ही अधि‍कारी हरकत में आए और योजनाओं पर फोकस बढ़ाकर बजट खर्च करने पर ध्यान दिया. बजट पर कुंडली मारकर बैठने वाले अधिकारियों पर सरकार सख्त है. पिछले वर्ष ऐसे ही पांच लापरवाह अधि‍कारियों को योगी का कोपभाजन बनना पड़ा था.

अयोध्या में राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा के ठीक दो हफ्ते बाद विधानसभा में पेश अब तक का सबसे बड़ा 7.36 लाख करोड़ रुपए का बजट इसलिए भी अहम है कि इसके जरिए योगी सरकार अपने सांस्कृतिक और धार्मिक एजेंडे पर आगे बढ़ी है. रामराज्य के लक्ष्य पर केंद्रित योगी सरकार के आठवें बजट का प्रारंभ और अंत रामनाम के साथ हुआ. भगवान राम को समर्पित अब तक के सबसे बड़े बजट में आने वाले लोकसभा चुनाव को देखते हुए समाज के सभी वर्गों को साधने की भरसक कोशिश की गई है.

अयोध्या के साथ ही प्रदेश के कमोबेश सभी धार्मिक स्थलों के लिए भारी भरकम 5,455 करोड़ रुपए की व्यवस्था बजट में की गई है. सरकार ने पर्यटन के जरिए भी विकास का खाका खींचा है. विधानसभा में पेश बजट 2024-25 के अनुसार, राज्य में वर्ष 2023 में जनवरी से अक्तूबर तक 37.90 करोड़ से ज्यादा पर्यटक आए थे.

इनमें भारतीय पर्यटकों की संख्या लगभग 37.77 करोड़ और विदेशी पर्यटकों की संख्या 13.43 लाख रही. वाराणसी-अयोध्या के साथ प्रयागराज में भी पर्यटकों की संख्या में भारी इजाफा हुआ. वहीं प्रयागराज में महाकुंभ 2025 के मद्देनजर करोड़ों पर्यटकों के जुटने की संभावना है. इसीलिए महाकुंभ की तैयारियों को गति देने के साथ संपूर्ण प्रयागराज मंडल में तीर्थ और पर्यटन क्षेत्रों के विकास पर फोकस किया गया है. महाकुंभ के लिए विशाल टेंट सिटी, कुंभ म्यूजियम समेत कई परियोजनाओं को पूरा करने की प्रक्रिया अब सरकार की प्राथमिकता पर होगी.

योगी सरकार ने रामलला की प्राण प्रतिष्ठा और धार्मिक पर्यटन के जरिए रोजगार को जोड़ने की कोशिश की है. इसे विपक्ष से सरकार पर लगने वाले बेरोजगारी के आरोपों के काउंटर के रूप में देखा जा रहा है. दरअसल, रिकॉर्ड सरकारी नौकरियां देने के बावजूद विपक्ष रोजगार के नाम पर सरकार को घेरने की कोशिश करता रहा है. शायद यही वजह है कि बजट में युवाओं को रोजगार देने के लिए नई बड़ी योजना न केवल शुरू की गई बल्कि इसके लिए 1,000 करोड़ रुपए का इंतजाम भी किया गया. 'मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास योजना' शुरू कर राज्य सरकार ने निजी क्षेत्र को भी आर्थिक रूप से सशक्त कर रोजगार सृजन के लिए प्रोत्साहित किया है.

यूपी की आर्थिक गतिविधियों पर करीबी नजर रखने वाले इलाहाबाद विश्वविद्यालय के पूर्व प्रोफेसर सर्वेंद्र शुक्ल बताते हैं, "वित्त वर्ष 2024-25 के लिए योगी सरकार का बजट वास्तव में आस्था से अर्थ जुटाने की रणनीति ही है. बजट में धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने की योजनाओं को प्रमुखता दी गई है. बजट के जरिए योगी सरकार अगले वर्ष प्रयागराज में होने वाले महाकुंभ से पहले यूपी को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक बड़े केंद्र के रूप में उभारना चाहती है. इसके लिए सबसे कठिन चुनौती समय पर बजट की राशि‍ का सदुपयोग करने की होगी." चुनावी साल में योगी सरकार बजट के उपयोग की चुनौतियों से जितनी कुशलता से निबटेगी राज्य में विकास का पहिया उतनी ही गति से दौड़ेगा.

यूपी के वित्त मंत्री सुरेश खन्ना
यूपी के वित्त मंत्री सुरेश खन्ना

7.36 लाख करोड़ रुपए का प्रदेश का अब तक का सबसे बड़ा बजट पेश करने के बाद यूपी के वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने इंडिया टुडे के एसोसिएट एडिटर आशीष मिश्र से बात की

• नया बजट पिछली बार की तुलना में कितना अलग है?

नया बजट यथार्थ है. पिछले बजट मंन कर राजस्व का लक्ष्य 2.62 लाख करोड़ रुपए था. इस बार इसे केवल 2.70 लाख करोड़ रुपए पर ही रखा है. रोजगार सृजन के लिए हमने बजट का 25 फीसदी इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च करने का प्रावधान किया है. शिक्षा पर बजट का 17 फीसद, कृषि‍ पर 13 फीसद, चिकित्सा स्वास्थ्य पर 6 फीसद और समाज कल्याण पर 5 फीसद खर्च कर रहे हैं. भारी उद्योगों के लिए अलग से बजट चिन्ह्ति है. युवाओं को टैबलेट और स्मार्टफोन देने के लिए 4,000 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है.

• कर राजस्व के लक्ष्य को कम करने के पीछे क्या मंशा है?

पिछले बजट में जारी वित्तीय वर्ष के लिए कर राजस्व के लक्ष्य में 40,000 करोड़ रु. से ज्यादा की वृद्धि की गई थी, जो अपेक्षाकृत ज्यादा थी. इस बार बजट में लंबे चौड़े सब्जबाग नहीं दिखाए गए हैं. जितने राजस्व का कलेक्शन हो उसी के आसपास ही बजट को रखा गया है.

इस बार यूपी का बजट बहुत बड़ा है तो उसे खर्च करने की भी चुनौती होगी.

यह चुनौती तो है. केंद्रीय सहायता की तर्ज पर हमने भी विभागों को तय समय पर बजट की पहली किश्त खर्च करने का लक्ष्य निर्धारित किया है, उसके बाद ही अगली किश्त जारी करेंगे. पूरी कोशि‍श है कि बजट का एक भी पैसा लैप्स न हो.

बहुत सारे विभाग समय पर बजट ही नहीं खर्च पाते. इस बार तो चुनाव की आचार संहिता के चलते और भी दिक्कतें होंगी. कैसे निबटेंगे? 

इसके लिए काफी हद तक पिछली सरकारों की कार्यसंस्कृति जिम्मेदार है. पिछली सरकारों में प्रशासन काफी ढीला होने से सरकारी अधिकारियों, कर्मचारियों की काम करने की आदत छूट गई थी. हमारी सरकार ने प्रदेश में वित्तीय अनुशासन लागू किया है. हमने विभागवार बजट की निगरानी व्यवस्था लागू की है. इस संबंध में हर तीसरे महीने मीटिंग करते हैं. समय पर बजट न खर्च करने वाले विभागों को नोटिस जारी किया जा रहा है.

वित्तीय अनुशासन लागू करने में सरकार कितना कामयाब हुई है?

यह सतत प्रक्रिया है. हमने पिछली सरकारों की फिजूलखर्ची रोकी है. मसलन, पूरे देश में ऐसी व्यवस्था नहीं थी कि मंत्रियों का आयकर सरकार भरे, लेकिन यूपी में यह परंपरा थी. हमने इसे बंद किया.
 
ऐसा भी देखा जा रहा है कि कई विभाग बजट के लिए तर्कसंगत मांगें नहीं रखते.

आवश्यकता और 'इनोवेशन' का आकलन करके ही हम विभागों से विभि‍न्न योजनाओं के लिए मांगे गए बजट का निर्धारण करते हैं. मसलन, बजट में लखनऊ के लिए एयरोसिटी निर्माण का प्रावधान इसी तरीके से किया गया है.

• जीएसटी कलेक्शन सरकार के लिए अभी भी चुनौती है.

इसके लिए रजिस्ट्रेशन बढ़ाया गया है. लगभग 32 लाख रजिस्ट्रेशन हो चुके हैं. लगातार चेकिंग करके टैक्स चोरी रोकी जा रही है. वित्तीय वर्ष 2023-24 में कुल राजस्व प्राप्ति का लक्ष्य 2.62 लाख करोड़ रुपए रखा गया था. अब तक 1.58 लाख करोड़ रुपए का राजस्व प्राप्त हो चुका है. मार्च तक यह दो लाख करोड़ तक पहुंच जाएगा. तमाम चुनौतियों के बावजूद यूपी का राजकोषी‍य घाटा निर्धारित सीमा से नीचे ही है.

सबसे बड़ी समस्या ट्रैफिक जाम की है. बजट में इसके लिए कोई स्पष्ट योजना नहीं दिखती?

हमने शहरों में रिंग रोड के लिए 1,000 करोड़ रुपए की व्यवस्था की है. प्रदेश के सभी बस अड्डों के ऊपर मॉल बनाने की योजना को स्वीकृति दी है. इससे शहर में यातायात का दबाव कम होगा.

अयोध्या में राम मंदिर निर्माण का यूपी की अर्थव्यवस्था पर क्या प्रभाव पड़ेगा?

भाजपा सरकार सत्ता में आई थी तब यूपी की जीडीपी साढ़े 12 लाख करोड़ रुपए थी. जीडीपी का करीब एक चौथाई कृषि‍ क्षेत्र से आता है और इतना ही करीब औद्योगिक क्षेत्र का हिस्सा है. पहले यूपी का सर्विस सेक्टर कमजोर था. यूपी में काशी-विश्वनाथ कॉरिडोर बनने और सांस्कृतिक क्षेत्रों को विकसित करने से पर्यटन में अभूतपूर्व वृद्धि हुई है. इस कारण सर्विस सेक्टर काफी मजबूत हुआ. अयोध्या में राम मंदिर बनने के बाद तो देश-विदेश के पर्यटक बड़ी संख्या में यूपी आ रहे हैं. पर्यटन को बढ़ावा मिलने से सर्विस सेक्टर मजबूत होगा और जीडीपी सुदृढ़ होगी.

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