scorecardresearch

विदेशी मोर्चे पर भारत का दबदबा, सिद्धांतों और हितों के बीच संतुलन बरकरार

देश का मिज़ाज सर्वे में ज्यादातर लोगों ने मोटे तौर पर मोदी सरकार की विदेश नीति पर संतोष जाहिर किया

प्रधानमंत्री मोदी के साथ अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन और दुनिया के दूसरे नेता
प्रधानमंत्री मोदी के साथ अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन और दुनिया के दूसरे नेता
अपडेटेड 22 फ़रवरी , 2024

पिछले छह महीनों के दौरान भारतीय विदेश नीति ने दुनियाभर में बदलती भू-राजनीति के कारण आए उतार-चढ़ाव को सफलता के साथ संभाला है. नई दिल्ली ने जी-20 शिखर सम्मेलन की सफल मेजबानी के साथ वैश्विक दक्षिण की मुखर आवाज बनकर अपनी कूटनीतिक क्षमता साबित की.

वहीं, इज्राएल-हमास संघर्ष और रूस-यूक्रेन जंग जैसे विभाजनकारी वैश्विक मुद्दों पर अपने 'सिद्धांतों' और 'हितों' के बीच संतुलन बनाए रखा. भारत का कूटनीतिक कौशल एक और मोर्चे पर खुलकर सामने आया जब वह कतर की अदालत में दोषी करार दिए गए आठ पूर्व भारतीय नौसैनिकों की मौत की सजा कम कराने में सफल रहा. हालांकि, चुनौतियां और भी थीं.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 2023 की यात्रा के साथ भारत-अमेरिका संबंधों में लगातार बढ़ती गर्मजोशी नवंबर में उस वक्त मुश्किल दौर में दिखी, जब वाशिंगटन ने नई दिल्ली के कथित तौर पर अमेरिकी नागरिक और खालिस्तानी आतंकवादी गुरपटवंत सिंह पन्नू की हत्या की साजिश में शामिल होने को लेकर चिंता जाहिर की. हालांकि, भारत और अमेरिका दोनों इस मामले में सहयोग कर रहे हैं.

इससे पहले, सितंबर 2023 में कनाडा के साथ रिश्ते काफी बिगड़ गए जब वहां के पीएम जस्टिन ट्रूडो ने भारत की ओर से खालिस्तानी आतंकवादी घोषित कनाडाई नागरिक हरदीप सिंह निज्जर की हत्या में कथित तौर पर नई दिल्ली का हाथ होने के आरोप लगाए. ऐसी घटनाओं के आईने में इंडिया टुडे-सीवोटर देश का मिज़ाज सर्वे में 46 फीसद उत्तरदाताओं ने मोदी सरकार की विदेश नीति को 'बेहतरीन' बताया.

हालांकि, यह आंकड़ा पिछले साल की तुलना में थोड़ा घटा है, जो अगस्त में 48 फीसद से अधिक और जनवरी 2023 में 51 फीसद से अधिक था. वहीं, 24 फीसद उत्तरदाताओं ने विदेश नीति के मोर्चे पर भारत के प्रदर्शन को 'अच्छा' माना. यह आंकड़ा अगस्त में 21.9 फीसद था.

भारत ने कनाडा के हाउस ऑफ कॉमंस में ट्रूडो के आरोपों को 'बेतुका' बताकर खारिज तो कर दिया लेकिन मामले ने द्विपक्षीय रिश्तों में खासी कड़वाहट बढ़ा दी. इसके बाद, दोनों देशों ने एक-दूसरे के राजनयिकों को निष्कासित किया और अपने नागरिकों को यात्रा न करने की सलाह भी जारी कर दी.

भारत ने कनाडाई लोगों के लिए वीजा सेवाएं अस्थायी तौर पर रोक दीं. देश का मिज़ाज सर्वे में करीब 47 फीसद लोगों की राय यही थी कि भारत ने इस जटिल मुद्दे को अच्छी तरह संभाला. 10 फीसद को लगता है कि भारत ने जरूरत से ज्यादा कड़ी प्रतिक्रिया दी और 18 फीसद का मानना है कि और अधिक आक्रामक तेवर अपनाने चाहिए थे.

नवंबर में चीन समर्थक मोहम्मद मुइज्जू के 'इंडिया आउट' के नारे के साथ राष्ट्रपति बनने के बाद से मालदीव के साथ भारत के रिश्तों में खासी गिरावट आई. इसी बीच, जनवरी के शुरू में पीएम मोदी की तरफ से लक्षद्वीप में पर्यटन उद्योग को प्रोत्साहन देने वाले वीडियो और फोटो पोस्ट किए जाने पर मालदीव के युवा मामलों के मंत्रालय में तीन उपमंत्रियों मरियम शिउना, मालशा शरीफ और महजूम माजिद ने भारत और मोदी को लेकर अपमानजनक टिप्पणी कर दी.

हालांकि, मालदीव सरकार ने उन्हें निलंबित कर दिया. लेकिन सोशल मीडिया में इस पर खासा हंगामा मचा. नतीजा यह हुआ कि बॉयकाट मालदीव अभियान ने जोर पकड़ लिया. यहां तक कि इंडियन चैंबर ऑफ कॉमर्स ने भी 'मालदीव के बहिष्कार की अपील' कर डाली. चूंकि मालदीव की अर्थव्यवस्था काफी हद तक पर्यटन पर निर्भर है और बतौर पर्यटक वहां जाने वाले भारतीयों की संख्या 11 फीसद (सर्वाधिक) थी इसलिए यह उसके लिए बड़ा झटका साबित हुआ. देश का मिज़ाज सर्वे में 63 फीसद से अधिक उत्तरदाताओं ने मालदीव के बहिष्कार का समर्थन किया; केवल 18 फीसद ने इस कदम का विरोध किया.

भारत की नेबरहुड फर्स्ट पॉलिसी अपने दक्षिण एशियाई पड़ोसी देशों के साथ शांतिपूर्ण रिश्तों और सहयोगात्मक विकास को तरजीह देने पर केंद्रित है. हालांकि, चीन की दखलंदाजी और बढ़ते प्रभाव के कारण मालदीव, श्रीलंका, म्यांमार और नेपाल जैसे सहयोगियों से भारत के साथ रिश्तों में ठहराव आने लगा है.

पड़ोसियों के साथ भारत के रिश्तों को किस तरह आंकते हैं, इस पर करीब 30 फीसद उत्तरदाताओं की राय है कि ये पहले के मुकाबले बिगड़े हैं लेकिन इससे कोई फर्क नहीं पड़ता. करीब 26 फीसद की नजर में इसमें सुधार हुआ है जबकि 26 फीसद ने माना कि संबंध बिगड़े हैं और यह चिंताजनक है.

हमास के 7 अक्तूबर के हमले—जिसमें 1,200 के करीब इज्राएली मारे गए—के बाद गाजा पर इज्राएली हमलों को लेकर भारत आतंकवाद पर अपनी शून्य सहिष्णुता की नीति पर कायम रहा. भारत ने संतुलित रुख अपनाते हुए हमास के हमले को आतंकवादी कृत्य मानकर इसकी कड़ी आलोचना तो की लेकिन इस आतंकी संगठन पर पाबंदी जैसा कोई कदम नहीं उठाया.

इज्राएल के जवाबी हमले में 26,500 बेगुनाह फिलिस्तीनी मारे गए और 65,000 घायल हुए या लापता हैं. सर्वे में यह पूछने पर कि इसे आतंकवाद के खिलाफ वैध प्रतिशोध मानते हैं या फिर नरसंहार के रूप में देखते हैं, करीब 29 फीसद उत्तरदाताओं ने कहा कि इज्राएल आत्मरक्षा के नाम पर अपराध कर रहा है. लेकिन 45 फीसद से अधिक मानते हैं कि इज्राएल ने कुछ भी गलत नहीं किया.

अब, बात उस देश के बारे में राय की, जिससे भारतीय सबसे अधिक नफरत करते हैं? पिछले साल पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने जब भारत के साथ 'शांतिपूर्ण और सार्थक चर्चा' के जरिए द्विपक्षीय मसलों को सुलझाने की पेशकश की तब भारत ने अपना सैद्धांतिक रुख दोहराते हुए दो टूक कह दिया कि "सबसे पहले आतंकवाद और शत्रुतापूर्ण रवैये से मुक्त माहौल होना जरूरी है."

पाकिस्तान समर्थित आतंकी समूहों के बार-बार भारतीय सेना को निशाना बनाकर, खासकर जम्मू में, हमले करते रहने के बीच करीब छह माह बाद देश का मिज़ाज सर्वे में 55 फीसद से अधिक उत्तरदाताओं ने कहा कि वे पाकिस्तान से बातचीत के खिलाफ हैं. सिर्फ 26 फीसद ने वार्ता का समर्थन किया.  

Advertisement
Advertisement