दान का सबसे बड़ा रूप कमजोर लोगों की मदद करना है. इसी तरह की सहायता गुरुग्राम निवासी 61 वर्षीय सेवानिवृत्त क्लर्क बलराम चंद्रा को हासिल हुई जो किडनी की गंभीर बीमारी से पीड़ित हैं. दरअसल, इन्हें अपनी मेहनत की कमाई का ज्यादातर हिस्सा एक निजी अस्पताल में डायलिसिस करवाने पर खर्च करना पड़ा.
बलराम बताते हैं, "दो साल में मैंने पांच-पांच लाख रुपए खर्च किए. जब पैसे नहीं बचे तो डायलिसिस करवाना छोड़ दिया." उसके बाद अप्रैल 2023 में, बलराम ने एक रिश्तेदार के माध्यम से उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले के बड़हलगंज इलाके में एक मुफ्त डायलिसिस केंद्र के बारे में सुना. पिछले सात महीनों से बलराम यहीं पर में मुफ्त डायलिसिस करा रहे हैं.
असल में, गोरखपुर शहर से 75 किमी दूर सरयू नदी के तट पर बड़हलगंज इलाके के भरौली गांव में खेतों से घिरा हुआ बाबू आर.एन. सिंह डायलिसिस सेंटर उन किडनी रोग पीड़ितों के लिए किसी तीर्थ से कम नहीं है जो नियमित डायलिसिस का खर्च उठाने में अक्षम हैं. इस डायलिसिस सेंटर का उद्घाटन 29 मार्च, 2023 को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने किया था.
तब से, 2,000 लाभार्थियों के लिए 5,000 से अधिक डायलिसिस प्रक्रियाएं मुफ्त में की जा चुकी हैं. इनमें से आधे से अधिक उत्तर प्रदेश से बाहर के राज्यों से हैं. यह अनोखा डायलिसिस सेंटर भरौली गांव के रहने वाले राम निवास सिंह (1948-2022) की स्मृति में बनाया गया है. एक किसान परिवार में जन्मे, राम निवास साल 1968 में बॉम्बे (अब मुंबई) चले गए थे और एक फैक्ट्री मजदूर के रूप में काम करने के बाद, साल 1976 में उन्होंने बॉम्बे इंटेलिजेंस सिक्युरिटी (बीआईएस) इंडिया लिमिटेड की स्थापना की थी.
बीआईएस कुछ ही वर्षों में मुंबई की शीर्ष सुरक्षा एजेंसी बन गई. 90 के दशक में, बीआईएस का विस्तार एक दर्जन से अधिक राज्यों तक हुआ और अब इसमें 60,000 से अधिक कर्मचारी काम करते हैं. साल 2003 में राम निवास को किडनी की गंभीर बीमारी का पता चला. उनके बेटे संतोष सिंह कहते हैं, "पिताजी को डायलिसिस के दौरान बहुत दर्द होता था. वे उन गांववालों की तकलीफ भी समझ रहे थे जिन्हें डायलिसिस के लिए शहरों के चक्कर लगाने पड़ते थे."
साल 2022 में 1 जनवरी को अपने जन्मदिन पर गांव भरौली में, राम निवास ने गरीबों के लिए एक मुफ्त डायलिसिस केंद्र के निर्माण की घोषणा की. अगले दिन मुंबई में उनकी मृत्यु हो गई. उसके बाद संतोष ने अपने पिता के सपने को पूरा करने का संकल्प लिया. धीरे-धीरे भरौली में 20,000 वर्ग फुट पैतृक भूमि पर एक आधुनिक डायलिसिस केंद्र को आकार दिया. सभी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद, स्वास्थ्य विभाग में 10 बिस्तरों वाला डायलिसिस केंद्र पंजीकृत हुआ.
उत्तर प्रदेश स्वास्थ्य विभाग के सेवानिवृत्त अतिरिक्त निदेशक आर.बी. अग्रवाल बताते हैं, "उत्तर प्रदेश के कई जिलों में डायलिसिस की सुविधा नहीं है. ऐसी स्थिति में, गोरखपुर के एक पिछड़े गांव में डायलिसिस सेंटर की स्थापना समाज सेवा का एक अनूठा उदाहरण है." पूरी तरह से वातानुकूलित और 24 घंटे पावर बैकअप के साथ, बाबू आर.एन. सिंह डायलिसिस सेंटर में हर बिस्तर पर ऑक्सीजन की सुविधा उपलपब्ध है. अस्पताल में मरीजों की देखरेख के लिए तीन डॉक्टरों और 15 पारामेडिकल स्टाफ की एक टीम है.
मरीजों का इलाज 'पहले आओ, पहले पाओ' नीति के आधार पर किया जाता है. मरीजों से केवल एक रुपए रजिस्ट्रेशन शुल्क ही लिया जाता है. चूंकि यह सेंटर गोरखपुर के पिछड़े इलाके में स्थित है, इसलिए यहां आने वाले 90 प्रतिशत मरीज वही हैं जिन्हें मुफ्त डायलिसिस की सख्त जरूरत होती है. इस डायलिसिस केंद्र का पूरा खर्च बीआईएस के कॉर्पोरेट सोशल रेस्पॉन्सिबिलिटी (सीएसआर) फंड की ओर से वहन किया जा रहा है.
गोरखपुर में बीआईएस के प्रबंधक मनोज कुमार सिंह कहते हैं, "हम किसी से चंदा नहीं लेते हैं. मरीज और उसके साथ आए तीमारदार को नाश्ता भी मुफ्त मिलता है." इस डायलिसिस सेंटर पर एक एम्बुलेंस भी तैयार रखी गई है, उन मरीजों के लिए जो गोरखपुर पहुंचने के बाद सेंटर आ पाने में असमर्थ होते हैं. इस तरह से गोरखपुर का भरौली गांव किडनी रोगियों के लिए वाकई वरदान साबित हो रहा है.

