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तेलंगाना सिख सोसाइटी : अपनी बिरादरी के सिकलीगरों को दे रहे सम्मान की जिंदगी

एक सिख संगठन औजार बनाने वाले अपनी ही बिरादरी के सिकलीगरों की स्वास्थ्य और शिक्षा की जरूरतें पूरी करके उन्हें गरिमा और सम्मान की जिंदगी मुहैया करने में मदद कर रहा

टीएसएस की प्रेसिडेंट तेजदीप कौर मेनन हैदराबाद के एक स्वास्थ्य शिविर में सिख स्कूली बच्चों के साथ
टीएसएस की प्रेसिडेंट तेजदीप कौर मेनन हैदराबाद के एक स्वास्थ्य शिविर में सिख स्कूली बच्चों के साथ
अपडेटेड 1 फ़रवरी , 2024

दकनी सिखों का इतिहास यही कोई 300 साल पुराना है. उनके एकदम शुरुआती पुरखे हुजूरी सिख अठारहवीं सदी के शुरू में गुरु गोविंद सिंह के दक्कन प्रवास के दौरान उनके साथ आए थे. उसके बाद उन्होंने नांदेड़ में बस जाने का फैसला किया. यह इलाका अब महाराष्ट्र में है. 1832 के आसपास सिखों की टुकड़ी लाहौरी फौज आई. इसे महाराजा रंजीत सिंह ने निजाम की मदद के लिए शांतिरक्षक बल के तौर पर भेजा था. निजाम ने उन्हें छावनी बसाने के लिए हैदराबाद के मुहाने पर 200 एकड़ जमीन दे दी. बीच में खानाबदोश सिख आए, जिनमें हथियार बनाने वाले सिकलीगर भी थे. ये भी दक्षिण के प्रवास पर गुरु गोविंद सिंह के साथ आए दस्ते का हिस्सा थे.

ऐसी गौरवशाली शुरुआत के बाद तेलंगाना के सिख जल्द ही दुर्दिनों का शिकार हो गए. लेखक और अध्येता मनप्रीत जे. सिंह के अनुसार, इनमें से ज्यादातर सिख अब झुंडों में रह रहे निम्न आय वर्ग के थे. उनमें से ज्यादातर अपने-अपने काम-धंधों में लगे हैं, कोई ड्राइवर है तो कोई छोटा-मोटा दुकानदार और ऐसे ही उपक्रम. कुछ साहूकारी के धंधे में भी हैं. दूसरी तरफ सिकलीगर अब उस तबके का हिस्सा हैं जिन्हें विमुक्त जनजातियां या खानाबदोश कहा जाता है. ये लोग हाशिए पर जिंदगी बसर कर रहे हैं; वे अटाले से कबाड़ बीनकर उससे अनगढ़ चाकू या बर्तन वगैरह बनाते हैं, या रसोई के चाकुओं की धार तेज करते हैं और ताले-चाबियों की मरम्मत करते हैं.

कोविड के सालों के दौरान इनके हालात काफी बिगड़ गए. इसी मौके पर तेलंगाना सिख सोसाइटी (टीएसएस) आगे आई, जिसका गठन दो साल पहले ही यानी 2018 में हुआ था. उसने सिखों की स्वास्थ्य और रिहाइश संबंधी देखभाल के अलावा उन्हें बेहतर हुनर और शिक्षा से भी लैस किया. अभी तक सोसाइटी ने 1,400 से ज्यादा मरीजों को अस्पताल में भर्ती होने में मदद की है. उन्होंने 2018 और 2023 के बीच 15 स्वास्थ्य शिविर भी लगाए. इनसे लंबे वक्त से बीमारियों से घिरे 4,427 मरीजों की पहचान करने में मदद मिली, जिन्हें अस्पताल में भर्ती होने या ऑपरेशन करवाने की जरूरत थी या जो दांत या आंख की ऐसी बीमारियों से पीड़ित थे जिनका पहले पता न था.

सेवानिवृत्त आईपीएस अधिकारी और सितंबर, 2023 में दूसरे कार्यकाल के लिए टीएसएस की प्रेसिडेंट चुनी गईं तेजदीप कौर मेनन कहती हैं, "आप दुनिया के किसी भी हिस्से में हों, समुदाय के प्रति कर्तव्य की भावना सिखों के साथ अभिन्न रूप से जुड़ी रहती है." तेजदीप अक्सर सरकार से राहत कोष के लिए आवेदन करती हैं और सिख समुदाय के डॉक्टर सदस्यों से भी सहायता लेती रहती हैं, जो बुनियादी इलाज भी मुफ्त करते हैं. वे कहती हैं, "हमें देश भर के सिखों से भी दान मिलता है. इसके अलावा गुरु नानक मिशन ट्रस्ट, केयर हॉस्पिटल ग्रुप, साउथ इंडियन बैंक के अलावा दूसरी संस्थाओं से भी सीएसआर के तहत फंड मिलता है."

स्वास्थ्य के अलावा टीएसएस गरीबों के लिए सरकार की आवासीय योजना के तहत स्थायी आवास दिला रही है. जिस जमीन पर सिकलीगरों ने वर्कशॉप या घर बनाए हैं, उन पर उन्हें मालिकाना हक हासिल करने में भी वह मदद कर रहा है. 2022 में सरकार ने 45 एकड़ के उन कब्जेदारों को मालिकाना हक दे दिया जिन्होंने वहां घर और काम-धंधे लगा लिए थे. टीएसएस ने शौचालय खंडों और स्कूल की इमारतों का जीर्णोद्धार भी करवाया, और राज्य में पर्यावरण संबंधी उथलपुथल की वजह से घर गंवा बैठने वाले लोगों को रुपए-पैसे से सहायता भी की. हुनर तराशना और पढ़-लिखकर पैरों पर खड़े होने में मदद करना टीएसएस के काम का एक अहम पहलू है. 2022 में इसने राज्य भर में गरीब छात्रों के लिए शिविर लगाए, जिनमें से कई टूटे-बिखरे परिवारों से आए. टीएसएस ने उन्हें अपना मनोबल बनाने, सकारात्मक नजरिया खोजने और जीवन की गुणवत्ता में सुधार लाने में भी मदद की.

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