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अनुकृति शर्मा : महिला पुलिस को 'बाइकवाली पुलिस दीदियां' बनाने वाली आईपीएस

आइपीएस अधिकारी अनुकृति यह पक्का करने में लगी हैं कि बुलंदशहर में महिला पुलिसकर्मियों को बराबर का दायित्व मिले, जिससे पुलिस व्यवस्था प्रभावी भी हो और जनता के नजदीक भी.

अनुकृति शर्मा, आईपीएस अफसर
अनुकृति शर्मा, आईपीएस अफसर
अपडेटेड 1 फ़रवरी , 2024

महिला पुलिसकर्मी बाइक पर! वह भी उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर में? भले ही यह हैरत वाली बात लगे लेकिन पश्चिमी उत्तर प्रदेश में 'बाइकवाली पुलिस दीदी’ आपको कहीं भी घूमती नजर आ सकती महिला पुलिस अफसर यहां हैं. उन बाइक्स को यहां फैंटम बाइक कहा जाता है: हूटर, पुलिस की बत्ती, माइक वगैरह के साथ पुलिस की जरूरत के अनुरूप तैयार.

इसका श्रेय जाता है 2020 बैच की आइपीएस अफसर और बुलंदशहर की मौजूदा सहायक पुलिस अधीक्षक (एएसपी) अनुकृति शर्मा को. उन्होंने पुलिस को ज्यादा असरदार और जनोन्मुखी बनाने का जिम्मा उठाया है. उनके मुताबिक, इस दिशा में पहला कदम है महिला पुलिस अफसरों को ज्यादा दायित्व देना.

इसी के तहत महिला अफसरों को कहीं अहम और सामने वाले रोल दिए जा रहे हैं. हर हफ्ते पुरुष और महिला पुलिसकर्मियों की ड्यूटी में अदला-बदली होती है ताकि बिना किसी लैंगिक भेदभाव के सबको सब तरह का काम करने का मौका मिले. महिला पुलिस अफसरों को कुर्सी वाले काम देने की बजाय फील्ड में जाने, समन देने, छापे मारने यहां तक कि गिरफ्तारियां करने जैसे काम हाथ में लेने को बढ़ावा दिया जाता है.

वे कहती हैं, "यहां तक कि अर्धसैनिक बलों में भी महिलाओं को मानवाधिकार उल्लंघन से संबंधित मामलों के निबटारे के लिए नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में भेजा जाता है. मैं महिलाओं को उनकी रुचि के मुताबिक जिम्मेदारी सौंपने की हामी हूं. जरूरी नहीं कि उन्हें सिर्फ मेडिकल या महिला पीड़ितों से जुड़ी जिम्मेदारी संभालने और सीआरपीसी की धारा 164 के तहत बयान दर्ज करने तक ही सीमित रखा जाए. अगर उन्हें हर तरह के काम सौंपे जाएंगे तो इससे उनका आत्मविश्वास ही बढ़ेगा."

यह पूछने पर महिला पुलिसकर्मियों ने कितने अपराधियों को पकड़ा है, अनुकृति फौरन जवाब देती हैं, "हम छापे मारने जैसी कार्रवाई में लैंगिक आधार पर कोई अंतर नहीं करते क्योंकि इससे लैंगिक समानता की दलीलें बेमायने हो जाती हैं." पर फिर जोड़ती हैं, "पिछले महीने ही नरौरा थाने की महिला पुलिस टीम ने अलग-अलग जगह से चार पुरुष अपराधियों को गिरफ्तार किया था."

फैंटम बाइक पर महिला पुलिस अफसरों की चौकसी ने दूसरे महकमों में भी आत्मविश्वास पैदा करने का काम किया है. बुलंदशहर के सभी 25 थानों में ऐसी 1-1 बाइक उपलब्ध हैं. बाइक पर चौकसी करने वालीं महिला कॉन्स्टेबल प्रीति कुमारी कहती हैं, "पहले मैं आने-जाने के लिए अपनी स्कूटी इस्तेमाल करती थी, लेकिन अनुकृति मैडम ने हमें नोटिस देने के लिए फैंटम बाइक से जाने के लिए प्रेरित किया. अब तो हमारे लिए यह रोज की बात हो गई है."

अनुकृति का मानना है कि महिला पुलिस अधिकारियों को महत्वपूर्ण और सार्थक भूमिकाएं देने से ज्यादा कुशल, जनता के अनुकूल, कम भ्रष्ट, संवेदनशील और अधिक जवाबदेह पुलिस व्यवस्था मुमकिन हो सकती है. वे कहती हैं, "पुलिस का काम दरअसल लंबे समय से पुरुष प्रधान पेशा रहा है. आप गौर कीजिए तो पाएंगे कि अमूमन पुरुष शिकायतकर्ता ही थाने-चौकियों में आते रहे हैं. महिलाओं के लिए शिकायत लेकर पुलिस थाने जाने को आज भी अजीब नजरों से देखा जाता है. इसलिए, मैं शुरू से ही पुलिस सेवा को अधिक नागरिक-केंद्रित बनाने की कोशिश में जुटी रही हूं. हमारे थानों में किसी भी उम्र के बच्चे, बुजुर्ग या महिलाएं बेझिझक आ सकती हैं और अपनी समस्याएं हमारे साथ साझा कर सकती हैं. और अब तो सरकार की पहल 'मिशन शक्ति’ के तहत रोज ही महिला शिकायतकर्ताओं की बात सुनी जाती है."

अनुकृति कहती हैं, उनकी कोशिश पुलिस के प्रति जनता के सोच में बदलाव लाने की है. यही वजह है कि वे लोगों के साथ नियमित बैठकें और स्कूलों के दौरे भी करती हैं. उन्होंने अपनी कार्यशैली से सबका ध्यान खींचा है. पिछले साल जून में शहर की एक 70 वर्षीया महिला के घर बिजली पहुंचाने में पुलिस की मदद का वीडियो वायरल हुआ था. अनुकृति हर किसी के चेहरे पर मुस्कान लाने को अपनी सेवा का अहम हिस्सा मानती हैं.

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